- परियोजना में लंबित कार्यों में नहीं होनी चाहिए लापरवाही, कमिश्नर के सख्त निर्देश
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर खुर्जा-पिलखनी कॉरिडोर में मेरठ में कुल तीन मामले लंबित हैं, जिसमें सकौती के निकट 200 मीटर भूमि पर कब्जा ना मिलने, ग्राम छज्जूपुर एवं उपेड़ा में भी कब्जा नहीं मिलने तथा ग्राम खिर्वानौबाद में आरयूबी को हटाए जाने संबंधी प्रकरण सम्मिलित हैं। इस संबंध में कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने विगत बैठक के उपरांत से प्रगति न होने पर असंतोष व्यक्त करते हुए तहसीलदार सरधना सहित संबंधित अधिकारियों को तत्परता से आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अन्यथा राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना में लंबित कार्यों में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित का उत्तरदायित्व निर्धारित करेंगे।
इसके अतिरिक्त जनपद गाजियाबाद व हापुड़ में चकरोड एवं नाली के सापेक्ष वैकल्पिक भूमि के संबंध में कार्रवाई लंबित पाई गई, जिसके लिए संबंधित अधिकारियों को सचेत किया गया। डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के दूसरे कॉरिडोर खुर्जा-दादरी सेक्शन के संबंध में जनपद गौतमबुद्धनगर में कुल छह प्रकरण तथा बुलंदशहर में एक मामला लंबित बताया गया। यह पाया गया कि विगत माह निर्वाचन आदि कारणों से सभी जनपदों में परियोजना के कार्यों को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी है।
इस संबंध में अपेक्षा की गई कि परियोजना के कार्यों को व्यक्तिगत रुचि व शीर्ष प्राथमिकता प्रदान करते हुए, तीव्र गति से संपादित कराएं। इसमें कोई विलंब किसी अधिकारी एवं विभाग के स्तर पर ना हो। बैठक में सभी जनपदों के संबंधित अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारियों के अतिरिक्त लोक निर्माण विभाग, वन विभाग, उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन तथा ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के अधिकारीगण सम्मिलित रहे। बैठक का संचालन श्री अनिल कालरा, महाप्रबन्धक, डेडिटकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉपोर्रेशन द्वारा किया गया। उनके द्वारा बताया गया कि परियोजना के ईस्टर्न कॉरिडोर का मुख्यत: दो भागों, खुर्जा-दादरी सैक्शन तथा खुर्जा-पिलखनी सेक्शन में निर्माण कराया जा रहा है।

