Tuesday, June 16, 2026
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गैंगस्टरों पर शिकंजा कसना होगा

Nazariya 22


YOGESH KUMAR SONIबीते दिनों गैंगस्टरों पर शिकंजा कसने के लिए उनके अड्डों पर एनआईए ने दिल्ली,पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में स्थित ठिकानों पर छापे मारे। केंद्रस सरकार के अनुसार बवाना गैंग और बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों पर केंद्रीय एजेंसियों ने छापेमारी की। बवाना गैंग पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने नीरज बवाना की क्राइम की जन्मपत्री को खंगाला है। बवाना गैंग और बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों पर भी केंद्रीय एजेंसियां अपना बडा प्रहार बताने में लगी हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अभी भी यह ही है कि गैंगस्टरों पर सिर्फ बात ही कही जाती है, क्योंकि उन लोगों द्वारा की हत्या, लूटपाट व रंगदारी में कोई कमी नहीं आ रही। वैसे तो दिल्ली हमारी राष्ट्रीय राजधानी है, जिसके बारे में यह कहा जाता है कि यहां परिंदा भी पर नही मार सकता, लेकिन गैंगस्टरों ने इस मिथ को तोड़ सा दिया। यदि आंकड़ों पर गौर करें तो पहले से गैंगस्टर व गैंगवार बढ़ी है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर इनके क्राइम करते व जेल के अंदर से वीडियो शेयर होते हैं, जिससे युवा पीढ़ी इनसे प्रभावित हो रही है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 2016 से 2020 तक हर वर्ष लगभग 600 कैदी फरार हुए हैं, जो बहुत बड़ा आंकड़ा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह भी है कि गैंगस्टर जेल से ही पूरा सिस्टम चला रहे हैं। यदि जेलों की स्थिति पर गौर करें तो हालात बेहद चिंताजनक हैं। जेल में कैदियों की सुरक्षा व संचालन प्रक्रिया को लेकर हमेशा सवालिया निशान खड़ा रहा है। इसका सजीव उदाहरण एक बार फिर सामने आया, जब हाल ही में दिल्ली स्थित मंडोली जेल में एक कैदी को पेट दर्द की शिकायत पर अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पता चला कि उसने पेट में मोबाइल निगल रखा था। जब उसकी जांच हुई तो चार मोबाइल निकले। इस घटना एक बार फिर एहसास दिलाया की जेल सुरक्षा केवल बातों और दावो में है।

इस मामलें में दिल्ली के जेलों को लेकर आरटीआई लगाई, जिससे यह जानकारी मिली कि इस वर्ष के जून महीने तक कैदियों के पास से 320 मोबाइल बरामद किए जा चुके हैं। यह सिर्फ दिल्ली का आंकड़ा है। आश्चर्य सबसे बड़ा यह है कि देश की ही नहीं, पूरे एशिया में सबसे सुरक्षित कहे जाने वाली तिहाड़ जेल का आलम भी अन्य जेलों की तरह है। कुछ कैदी जो जेल से बाहर आकर वहां की आपबीती बताते हैं, उनके अनुसार जेल में रह रहे पुराने व खुंखार कैदी जेल में से ही अपनी सरकार चलाते है। वो नए व मजबूर कैदियों को अपने परिजनों से बात कराने का पैसा मांगते हैं, जो रकम वह बाहर अपने गुर्गों के अकाउंट में जमा करवाते हैं। मोबाइल के अलावा नशीले पदार्थ व अन्य सुविधाएं भी बेहद आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। जेल में नए व शरीफ कैदी की पिटाई न हो या यूं कहें कि उनके साथ गलत बर्ताव न हो तो उसके एवज में बड़ी रकम मांगी जाती है। जो कैदी नहीं देते या असक्षम होते हैं, तो उनको जीना हराम कर दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस पूरे खेल में जेल प्रशासन पूर्ण रूप से मिला होता है, क्योंकि हर तरह की कमाई का हिस्सा संबंधित अधिकारियों को जाता है। खेल स्पष्ट है कि जहां जेल प्रशासन की मर्जी से कोई परिंदा पर नहीं मार सकता, वहां इस तरह की स्थिति बहुत बड़ी गड़बड़ दर्शाता है।

देश की अन्य राज्यों की जेलों की बात करें तो कई उदाहरण हैं। विगत दिनों पंजाब के लुधियाना शहर की जेल में दो गुटों में हुई हिंसक झड़प में एक कैदी की मौत को गई थी और 11 लोग घायल हुए थे, जिन में छह पुलिसकर्मी भी शामिल थे। दोनों गुटों ने एक-दूसरे पर पत्थरबाजी की। कैदियों ने अपने मोबाइल में घटना का वीडियो बनाया और उसे फेसबुक पर लाइव तक चला डाला था। उत्तर प्रदेश की बात करें तो शायद ही ऐसा कोई दिन जाता होगा कि कोई बड़ी घटना न होती हो। पूरे देश की स्थिति लगभग एक जैसी है। और यहां के किस्से फिल्म की तरह होते हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के अनुसार 2021 के अंत तक 4,33,031 लोग देश की जेलों में बंद थे। जिसमें से 69 फीसदी कैदी अंडर ट्रायल थे या फिर ऐसे लोग जिन्हें अपराध के लिए दोषी तय किया जाना है। अंडर ट्रायल कैदियों की यह संख्या दुनिया के किसी अन्य देश में बंद विचाराधीन कैदियों से कहीं ज्यादा है। भारत में 31 दिसंबर 2016 तक कुल 1412 जेल हैं, जिसमें 137 सेंट्रल जेल और 394 जिला जेल के अलावा 732 सब जेल हैं। देशभर में महिलाओं के लिए अलग से 20 जेल बनाए गए हैं। सबसे अधिक महिला जेल तमिलनाडु में हैं, जहां पर राज्य भर में 5 महिला जेल हैं, जबकि इसके बाद केरल में 3 महिला राजस्थान में 2 जेल हैं। आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में महज एक महिला जेल है। देश के 1412 जेलों में लगभग साढे चार लाख कैदी बंद हैं। जबकि इन जेलों में 3,80,876 कैदियों को ही रखने की क्षमता है। उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो यहां की जेलों में करीब 96000 कैदी कैद हैं, जबकि यहां पर महज 58 हजार कैदियों को रखने की क्षमता है। इस तरह से यूपी की जेलों में क्षमता से कहीं ज्यादा 165 फीसदी कैदी बंद हैं। दादर नागर हवेली में क्षमता से दोगुना 200 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 190 फीसदी, दिल्ली में 180 फीसदी और मेघालय में 133 फीसदी कैदी बंद हैं।

कड़ी निगरानी में यह घिनौना खेल इतने खुलेआम चल रहा है तो अन्य क्षेत्रों की सुरक्षा को लेकर हमें गंभीरता से सोचना पड़ेगा। इस मामले में शासन-प्रशासन को बेहद कड़ा एक्शन लेने की जरूरत है, क्योंकि ऐसी घटनाओं से हमारा सम्मान देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों तक में कम हो रहा है।


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