- कीट लगने पर हताश न हो बागवान, तत्काल करें जिला उद्यान विभाग से संपर्क
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आम फसल में गुजिया व मिज कीट लगने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में बागवान विशेष सावधानी बरत फसल को नष्ट होने से बचा सकते हैं। आम पौधा व वृक्षों में लक्षण दिखते ही बागवान तत्काल जिला उद्यान विभाग में संपर्क करें।
जिला उद्यान अधिकारी सुनील ने बताया कि सूबे में आम की अच्छी उत्पादकता के लिए जरुरी है कि फसल को सम-सामयिक हानिकारक कीटों से बचाया जाए।

बागवानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। उद्यान एवं प्रसंस्करण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा बागवानों को कीट के प्रकार एवं प्रकोप नियंत्रण के लिए कई सलाह दी जा रही हैं। बताया कि गुजिया कीट के शिशु जमीन से निकलकर पेड़ों पर चढ़ते हैं। मुलायम पत्तियों, मंजरियों एवं फलों से रस चूसकर क्षति पहुंचाते हैं।
इसके शिशु एक-दो मिमी लंबे एवं हल्के गुलाबी रंग के होते हैं। मादा वयस्क कीट सफेद रंग के पंखहीन एवं चपटे होते हैं। इस कीट के नियंत्रण के लिए बागों की गहरी जोताई गुड़ाई करना चाहिए। आम पेड़ के मुख्य तने पर भूमि से 50-60 सेमी ऊंचाई पर 400 गेज की पॉलीथिन शीट की 50 सेमी चौड़ी पट्टी को तने के चारों ओर लपेट कर ऊपर नीचे सुतली से बांधकर पॉलीथिन शीट के ऊपरी व निचली हिस्से पर ग्रीस लगा देना चाहिए।
इससे कीट पेड़ों के ऊपर नहीं चढ़ पाएंगे। अधिक प्रकोप की स्थिति में यदि कीट पेड़ों पर चढ़ जाते हैं तो ऐसी दशा में मानोक्रोटोफास 36 ईसी एक मिली अथवा डायमेथोएट 40 ईसी दो मिली दवा अथवा डायजिनान 20 ईसी दो मिली अथवा डायमेथोएट 30 ईसी 1.5 मिली दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर बौर निकलने की अवस्था पर एक छिड़काव करना आम फसल के लिए काफी लाभदायक साबित होगा।

