जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: वैश्विक सराफा बाजार और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच दुनिया के केंद्रीय बैंकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश विकल्प सोने (Gold) की ओर बढ़ गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्च में भारी बिक्री के बाद अप्रैल में केंद्रीय बैंक फिर से शुद्ध खरीदार बन गए। इस दौरान कुल 17 टन सोने की शुद्ध खरीद दर्ज की गई, जबकि भारत ने इस अवधि में खरीद से दूरी बनाए रखी।
पोलैंड बना सबसे बड़ा खरीदार, चीन की भी मजबूत वापसी
आंकड़ों के मुताबिक, नेशनल बैंक ऑफ पोलैंड अप्रैल में सबसे बड़ा खरीददार रहा, जिसने अकेले 14 टन सोना खरीदा। वहीं चीन के पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने 8 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा, जो दिसंबर 2024 के बाद उसकी सबसे बड़ी मासिक खरीद है। चीन लगातार 18 महीनों से सोना खरीद रहा है, जिससे उसका कुल स्वर्ण भंडार बढ़कर 2,322 टन तक पहुंच गया है। चेक गणराज्य ने भी लगातार 38वें महीने खरीद जारी रखते हुए 2 टन सोना जोड़ा।
भारत ने फिलहाल रोकी खरीदारी
भारत के संदर्भ में, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अप्रैल में कोई नई खरीद नहीं की। वर्ष 2026 में अब तक आरबीआई ने केवल मार्च में 200 किलोग्राम सोना खरीदा है। इससे पहले 2025 में 4.2 टन और 2024 में रिकॉर्ड 72.6 टन सोने की खरीद की गई थी। वर्तमान में भारत का स्वर्ण भंडार 880.52 टन पर स्थिर है।
चीन की रणनीति और डॉलर निर्भरता में कमी की कोशिश
जेपी मॉर्गन के अनुसार, चीन का सोना खरीदने का कदम एक दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करना है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के डॉलर रिजर्व फ्रीज किए जाने की घटना ने भी चीन को और अधिक सतर्क किया है।
रूस और अन्य देशों का रुख अलग
वहीं रूस ने अप्रैल में लगातार चौथे महीने 6 टन सोना बेचा और इस वर्ष अब तक कुल 22 टन की बिक्री कर चुका है। उज्बेकिस्तान ने भी अप्रैल में 1 टन सोना बेचा, हालांकि वर्ष 2026 में अब तक 24 टन की कुल खरीद के साथ वह पोलैंड के बाद दूसरे स्थान पर बना हुआ है। तुर्किये, जो मार्च में बड़ा विक्रेता था, अप्रैल में लगभग स्थिर रुख पर रहा।

