Friday, March 27, 2026
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भक्तों के कष्ट हरण को स्वयं अवतार लेते हैं भगवान: कथा व्यास

  • श्रीमदभागवत कथा ज्ञान सप्ताह के तीसरे दिन कृष्ण जन्म प्रसंग सुनाया

जनवाणी संवाददाता |

नजीबाबाद: नगर के निकटवर्ती ग्राम दरियापुर में श्री मदभागवत कथा ज्ञान सप्ताह के तीसरे दिन श्रीकृष्ण जन्म लीला का प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास सारंग नागर ने कहा कि भक्तों के कष्ट हरण के लिए स्वयं भदवान अवतार लेते हैं। गुरुवार को श्रीमदभागवत कथा के तीसरे दिन कथाव्यास के मुख से श्री कृष्ण के जन्म का बखान सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।

निकटवर्ती ग्राम दरियापुर स्थित वाणिज्यकर कार्यालय के निकट हंसा भवन में श्रीमदभागवत कथा ज्ञान सप्ताह जारी है। कथा व्यास सारंग नागर ने कहा कि श्रीमदभागवत कथा सुनने मात्र से ही कष्टो से मुक्ति मिल जाती है। भगवान श्री राधा कृष्ण के जयकारों ने वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

कथा व्यास सारंग नागर ने कहा कि भक्त की ओर से भगवान को सच्चे मन से याद किए जाने पर वे किसी न किसी रूप में स्वयं आकर दर्शन देते हैं और भक्तों का उद्धार करते हैं। अपने भक्त के कष्टो को हरने के लिए भगवान कोई न कोई माध्यम बना देते हैं।

कंस के अत्याचार से धरतीवासियों को बचाने और कौरवों का संहार करने के लिए ही भगवान श्रीकृष्ण के रूप में स्वयं अवतरित हुए। देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण ने अवतार लिया। भगवान श्रीकृष्ण उत्सव के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण से कितना कुछ छूटा।

पहले पिता छूटे, माता छूटी, यशोदा मां, नंद बाबा फिर वे भी छूटे, संगी साथी छूटे फिर राधा भी छूटी, गोकुल छूटा फिर मथुरा भी छूटी, श्रीकृष्ण से जीवन भर कुछ न कुछ छूटता ही रहा। अगर नहीं छूटा तो उनका देवत्व नहीं छूटा। उनकी मुस्कान नहीं छूटी और उनकी सकारात्मकता नहीं छूटी।

सब कुछ छूटने पर भी कैसे खुश रहा जा सकता है। ये भगवान श्रीकृष्ण से अच्छा कोई और नहीं सिखा सकता है। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को धूमधाम से मनाया गया। कथा व्यास ने श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए सभी को भाव विभोर कर दिया। संगीत बद्ध कथा में कथा व्यास के साथ मोहन गुप्ता व साथियों का सहयोग रहा।

कथा का आयोजन वशिष्ठ परिवार ने कराया। कथा प्रतिदिन शाम तीन बजे से आरम्भ हो रही है। सुरेश शर्मा, राजीव अग्रवाल,श्रीराम कक्कड़, राजबाला आत्रेय, लव वशिष्ठ, कुश वशिष्ठ, अनुज वशिष्ठ, पायल वशिष्ठ, हिमानी वशिष्ठ, प्रीती वशिष्ठ, रिद्धि, सिद्धि, वाणी, अनुति, आदि सहित काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा सुनकर धर्मलाभ उठाया।

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