Friday, April 23, 2021
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केसर की खुशबू से महक रहा स्याऊ का जंगल

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  • चांदपुर से सटे गांव स्याऊ के किसान ने केसर की खेती कर बनाया रिकॉर्ड

जनवाणी संवाददाता |

चांदपुर: कस्बे से सटे ग्राम स्याऊ के जंगल में एक किसान के खेत से आरही केसर की खुशबू से पूरा जंगल महक रहा है। किसान ने कड़ी मेहनत से केसर उगाकर साबित कर दिया है कि केसर की खुशबू सिर्फ काश्मीर घाटी से ही नहीं बल्कि मैदानी क्षेत्र के जंगल से भी आ सकती है।

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाली कश्मीर घाटी केसर की क्यारियो के लिए भी विश्व भर में अपनी पहचान रखती है । कश्मीर घाटी सर्दियों के मौसम केसर की खुशबू से महक उठती है। कश्मीर की घाटियों से ही केसर उगाया जाता है कस्बे से सटे ग्राम स्याऊ के रहने वाले किसान दिग्विजय सिंह ने अपने जंगल में केसर उगा कर इस मिथक को तोड़ा है।

दिग्विजय सिंह ने ग्राम सयाऊ के जंगल में स्थित आधा बीघा खेत में बनाई गई क्यारियों से केसर उगा कर साबित कर दिया है कि अन्नदाता कहां जाने वाला किसान परंपरागत फसलों को छोड़कर यदि दूसरी फसलों की ओर ध्यान दें तो वह अपनी आमदनी बढ़ाने के साथ ही नाम भी कमा सकता है।

ग्राम स्याऊ में स्थित प्राचीन बाबा झारखंड शिव मंदिर के बगल में दिग्विजय सिंह के खेत से आ रही केसर की खुशबू से मंदिर परिसर ही नहीं बल्कि पूरा जंगल महक रहा है। प्रयोग के तौर पर दिग्विजय सिंह ने इस वर्ष अक्टूबर माह में अपने आधा बीघा खेत में केसर की फसल बोई थी।

किसान ने कड़ाके की सर्दी के मौसम में दिन रात कड़ी मेहनत की और इसका परिणाम उत्साहवर्धक रहा है। इस समय किसान के खेत में केसर की फसल लहरा रही है ।पेड़ों के ऊपर लगे केसरिया रंग के फूल अलग से ही अपनी पहचान बना रहे। खेत से उठती केसर की खुशबू बरबस ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। लोग जब खेत में पहुंचते हैं तो किसान खेत में खड़े पौधों से लोगों को केसर के पौधों का परिचय कराता है।

किसान दिग्विजय सिंह ने बताया कि इस बार उन्होंने प्रयोग के तौर पर अपने बेटे के कहे अनुसार आधा बीघा जंगल में केसर की फसल बोई थी। वर्तमान में केसर के लगभग 4 फुट से ऊंचे पेड़ खेत में खड़े हैं और उनसे वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर केसर के फूलों की पंखुड़ियों को इकट्ठा कर रहे हैं। किसान ने बताया कि पैदावार अच्छी हुई है।

हालाँकि बिक्री के बाद ही होने वाली आमदनी का सही अनुमान लग सकता है ।किसान दिग्विजय सिंह का कहना है कि उन्होंने अब तक फसल की देखभाल पर लगभग दस हजार रूपये खर्च किए हैं ,और वह आगे भी केसर की खेती करने के इच्छुक हैं । उन्होंने बताया कि केसर की फसल के लिए गुल बनाते समय उनके बीच एक मीटर की दूरी रखी जाए तो उस भूमि से आलू की फसल पैदा कर अतिरिक्त आमदनी भी की जा सकती है।

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