जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: केरल में विश्वविद्यालय कानून संशोधन विधेयक विवाद पर एक बार फिर से सियासी घमासान शुरू हो गया है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राज्य सरकार के प्रस्ताव पर नाराजगी प्रकट की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने मुझे पत्र लिखकर आश्वासन दिया कि कोई हस्तक्षेप नहीं होगा लेकिन अब वे प्रस्ताव कर रहे हैं कि वे कुलपति की नियुक्ति करेंगे। इसका मतलब होगा शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता का क्षरण। जब तक मैं यहां हूं, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता का क्षरण नहीं होने दूंगा। मुख्यमंत्री अपनी बातों से पलट क्यों रहे हैं।
सरकार को कुलपतियों को संचालित करने की शक्ति नहीं दी जा सकती: राज्यपाल
सब कुछ मेरिट के आधार पर माना जाएगा। सरकार को कुलपतियों को संचालित करने की शक्ति नहीं दी जा सकती है। मैं इसे स्पष्ट रूप से कह रहा हूं, यह कार्यकारी हस्तक्षेप होगा।
तीन साल पहले कन्नूर में मेरी जान लेने की कोशिश की गई: राज्यपाल
केरल के राज्यपाल ने कहा कि तीन साल पहले कन्नूर में मेरी जान लेने की कोशिश की गई थी। पुलिस को केस दर्ज करने से किसने रोका? गृह विभाग किसके पास था? आप राज्यपाल के कार्यालय को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। आपने मुझ पर दबाव बनाने के लिए, मुझे डराने की कोशिश करने के लिए अपने बॉक्स में हर हथकंडा आजमाया है।
एक सितंबर को केरल विधानसभा ने विश्वविद्यालय कानून (संशोधन) विधेयक पारित किया था
गौरतलब है कि केरल विधानसभा में एक सितंबर को विवादास्पद विश्वविद्यालय कानून (संशोधन) विधेयक 2022 पारित कर दिया गया था। इसके परिणामस्वरूप राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल की शक्तियों को कम करने की कोशिश थी। राज्य के विपक्षी दल कांग्रेस-यूडीएफ ने मतदान से पहले सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए आरोप लगाया था कि सरकार विश्वविद्यालयों में प्रमुख पदों पर सत्तारूढ़ दल की कठपुतलियों को नियुक्त करने का प्रयास कर रही है।

