Tuesday, March 24, 2026
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किसानों की जमीन पर ग्रीन वर्ज, एमडीए पर क्यों नहीं?

  • परतापुर से लेकर मोदीपुरम तक का मामला, बंधक बनी जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की शरण में पहुंचे किसान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: किसानों की बंधक बनी जमीन को मेरठ विकास प्राधिकरण से मुक्त कराने के खिलाफ अब किसानों ने आवाज उठानी शुरू कर दी है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं परतापुर से लेकर मोदीपुरम तक एनएच-58 के दोनों तरफ मास्टर प्लान-2021 में ग्रीन वर्ज दर्शायी गई हैं। किसानों की बड़ी मात्रा में जमीन एक तरह से एमडीए में बंधक हैं। इसके लिए कोई धनराशि एमडीए ने नहीं दी, फिर भी जमीन बंधक हैं।

किसी तरह का निर्माण किसान अपनी जमीन में नहीं करा सकता। क्योंकि ग्रीन वर्ज में निर्माण करने पर ध्वस्तीकरण कर दिया जाता हैं। इसी को लेकर किसान त्रस्त हैं। बंधक बनी जमीन को लेकर किसान सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गए। जहां से पूरा मामला कमिश्नर की अदालत में शिफ्ट कर दिया गया हैं, यहीं पर अब ग्रीन वर्ज को लेकर सुनवाई होगी। हालांकि मास्टर प्लान 2031 भी आ गया हैं तथा उसे फाइनल रूप दिया जा रहा हैं, उसमें फिर से ग्रीन वर्ज एनएच-58 पर दोनों तरफ लगा दी हैं।

इसके बाद से ही किसानों के होश उड़े हुए हैं। मास्टर प्लान में सड़क के दोनों ओर ग्रीन वर्ज है, लेकिन जहां पर मेरठ विकास प्राधिकरण की आवासीय योजना दी है, वहां स्वत: ही ग्रीन वर्ज खत्म हो जाती है। मेरठ विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों ने जब मास्टर प्लान 2021 बनाया था, तब प्राधिकरण की योजनाओं को छोड़कर बाकी पर ग्रीन वर्ज लगा दी गई थी। हालांकि प्राधिकरण की योजना वेदव्यासपुरी, श्रद्धापुरी, सैनिक विहार और पल्लवपुरम को ग्रीन वर्ज से मुक्त रखा गया है।

इसी को किसानों ने मुद्दा बनाते हुए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक अपनी आवाज उठाने की कोशिश की। अब हाईकोर्ट के आदेश पर ग्रीन वर्ज के मुद्दे को लेकर सुनवाई कमिश्नर की अदालत में होगी। कमिश्नर के यहां पर ग्रीन वर्ज से संबंधित तमाम दस्तावेज किसानों ने दाखिल करा दी है। कमिश्नर की अदालत में वाद दायर करने वाले तस्लीम का कहना है कि ग्रीन वर्ज को एनएच-58 पर लगाने के मामले में मेरठ विकास प्राधिकरण ने भेदभाव किया है,

जहां भी मेरठ विकास प्राधिकरण की आवासीय योजना है, वहां पर ग्रीन वर्ज लागू नहीं किया गया। मास्टर प्लान में मेरठ विकास प्राधिकरण की योजनाओं को ग्रीन वर्ज से मुक्त रखा गया है। यही नहीं, जो किसानों की जमीन थी उस पर ग्रीन वर्ज मास्टर प्लान में दर्शा दी गई। इसी वजह से 2021 में जो मास्टर प्लान तैयार किया गया था, उसको लेकर किसान आज तक परेशान है। यही नहीं, किसानों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय में भी अपील की, मगर वहां से कोई राहत नहीं मिली,

जिसके बाद हाईकोर्ट ने किसानों को कमिश्नर की अदालत में पहुंचने के लिए कहा। फिलहाल किसान कमिश्नर की अदालत में पहुंच गए हैं और किस तरह से ग्रीन वर्ज को खत्म की जाए? इसकी गुहार लगाई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि मास्टर प्लान 2031 फाइनल किया जा रहा हैं। इसमें भी ग्रीन वर्ज को लागू कर दिया गया हैं। इस तरह से ग्रीन वर्ज हाइवे से खत्म नहीं होगी। इसको लेकर ही किसान परेशान हैं।

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