Tuesday, May 26, 2026
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विरासत हो रही बर्बाद, सब बेखबर

  • 2500 साल पुराने नौचंदी मेले की विरासत की जा रही नष्ट, डंपिंग ग्राउंड में तब्दील कर दिया नौचंदी मैदान
  • योगी सरकार के प्रयासों पर अफसर पानी फेरने पर उतारू
  • नगर निगम और जिला पंचायत के विवाद के चलते शासन ने खुद संभाली थी आयोजन की जिम्मेदारी
  • वादा था महानगर की साप्ताहिक पैंठों को शिफ्ट करने का, लेकिन बना दिया गया अस्तबल
  • मेला आयोजन के नाम पर हर साल भारी भरकम रकम ठिकाने लगाने की आदत है बन गयी अफसरों की

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मेला नौचंदी का एक समृद्ध इतिहास और विरासत है। उत्तर भारत का यह प्रसिद्ध मेला हिन्दू मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। देश और दुनिया से उत्तर भारत के इस प्रसिद्ध मेले को देखने के लिए लोग आते हैं। देश के तमाम राज्यों से यहां कारोबारी अपनी दुकानें सजाने आते हैं। वो अपने उत्पादो का यहां प्रदर्शन व प्रचार करते हैं। इसके अलावा दुनिया भर के तमाम नामचीन कलाकार नौचंदी के पटेल मंडप में अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन करने को आते हैं। मेला के पटेल मंडप में इंडो पाक मुशायरा सुनने के लिए दुनिया भर से शायरी व कविताओं के शौकीन पहुंचते हैं।

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मेले में तमाम देशों के स्वादिष्ट व्यंजनों की दुकानें व स्टाल लगते हैं। अब इसकी विरासत की बात कर लेते हैं। मेला स्थल पर मौजूद प्राचीन चंडी देवी मंदिर के पुजारी महेंद्र शर्मा बताते हैं कि मेला 2048 साल पुराना है। इसके तमाम साक्ष्य मौजूद हैं। जिस चंडी मंदिर के वह पुजारी हैं, उस मंदिर में रावण की पत्नी रानी मंदोदरी पूजा-अर्चना करने को आया करती थी। इतनी समृद्ध विरासत होने के बाद भी अफसरों की लापरवाही उसको नष्ट करने पर तुली है।

अफसरों की उदासीनता बनी मुसीबत

करीब 2500 साल पुरानी विरासत व इतिहास संयोए मेरठ का नौचंदी मेला अपने आयोजन के जिम्मेदार अफसरों की उदासीनता पर आंसू बहा रहा है। अच्छे भले मेला स्थल को अफसरो की लापरवाही ने डंपिंग ग्राउंड में तब्दील कर दिया है। डंपिंग ग्राउंड से उठती सड़ांध से वहां एक पल भी रुक पाना मुश्किल है। इसके आसपास की एक बड़ी आबादी डंपिंग ग्राउंड में तब्दील किए जा रहे मेला नौचंदी की वजह से पलायन की तैयारी में है। आसपास के लोगों का कहना है कि मेला स्थल का स्वरूप अफसर ही नष्ट करने पर तुले हैं।

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आबादी के बीच डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया है। इसको लेकर प्रशासन के अफसरों से लेकर सीएम योगी तक से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन नौचंदी मेला स्थल को डंपिंग ग्राउंड मे तब्दील करने पर उतारू अफसरों को लगता है कि इससे तथा इस इलाके के लोगों को उठानी पड़ रही मुसीबत से कोई सरोकार नहीं रह गया है। मेला नौचंदी बाले मियां मजार और चंड़ी देवी मंदिर की सांझी धरोहर मानी जाती है।

पेड़ लगाकर पानी देना भूले

नौचंदी मेला स्थल को हरा भरा बनाए रखने के लिए मेला के तमाम बाजारों के बीच हरे पेड़ लगाए गए थे, जिन अफसरों ने ये पेड़ लगवाए थे, वो इन पेड़ों की सुध लेना भूले बैठे हैं। हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो पेड़ लगाए गए हैं। उनमें से बहुत से सूख चुके हैं और कुछ सूखने की कगार पर हैं। इन पेड़ों में पानी देने का कोई इंतजाम मेला का आयोजन करने वाले अफसरों ने नहीं किया है। पेड़ लगाने के नाम पर सिर्फ और सिर्फ सरकारी पैसा ठिकाने लगाने का काम किया गया है।

अफसरों ने ही दफन कर दिए अपने आदेश

मेला नौचंदी की दशा सुधारने को लेकर नगर निगम और जिला पंचायत के अफसर तमाम दावे किया करते थे। उनके हाथ से नौचंदी मेला का आयोजन शासन ने अपने हाथ में ले लिया है। जब शासन ने मेला आयोजन का काम अपने हाथ में लिया तो उम्मीद की जा रही थी कि अब मेला स्थल के दिन बहुर जाएंगे। शासन ने नौचंदी मेला को स्थानीय स्वरूप से ऊपर उठाते हुए उसको प्रांतीय स्तर के मेले का दर्जा देने की घोषणा की थी।

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साथ ही यह भी है कि मेला नौचंदी के आयोजन पूरा होने के बाद मेला स्थल की देख रेख की जाती रहे, इसके लिए पूरे महानगर में जितनी भी साप्तहिक पैठें हैं उनको मेला स्थल में शिफ्ट कर दिया जाएगा। इससे एक साथ कई फायदे होंगे। पहला बड़ा फायदा तो यह है कि मेला स्थल का रखरखाव हो सकेगा। दूसरा साप्ताहिक पैंठ जिन बाजारों में लगते हैं वहां और उसके आसपास जाम सरीखे हालात रहते हैं। इस जाम का साइड इफेक्ट पूरे इलाके में रहता है।

डंपिंग ग्राउंड में सांस लेना भी हुआ दुश्वार

मेला नौचंदी स्थल को नगर निगम अफसरों ने डंपिंग ग्राउंड बनाकर रख दिया है। वहां सांस एक पल रुक कर सांस लेना भी दुश्वार है। मेला स्थल के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि जब से यहां पर निगम प्रशासन ने शहर के एक बड़े इलाके का कूड़ा डंप करना शुरू कराया है तब ये यहां रहना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि कई पीढ़ियों से उनका परिवार इस इलाके में रहता है, लेकिन अब उनका यहां रहना मुश्किल हो गया है। दिन भर यहां सड़ांध उठाती है। हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मेहमानों ने भी अब उनके यहां आना बंद कर दिया है। इसको लेकर अनेक स्तरों पर शिकायतों के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

पाथे जा रहे हैं उपले

नौचंदी मेला स्थल के आसपास लोग बड़ी संख्या में डेयरियां संचालित करते हैं। जहां पर डेयरियां संचालित की जा रही हैं, वहां पर पशुओं के गोबर को रखने की जगह नहीं है। डेयरी के पशुओं के गोबर को ठिकाने लगाने के का काम मेला नौचंदी के मैदान में किया जाता है। यहां सुबह शाम गोबर लाकर डंप किया जाता और दोपहर में उसके उपले पाथे जाते हैं। आसपास के लोगों ने बताया कि मेला खत्म होने के बाद इस मैदान में दशकों से गोबर पाथे जाने का काम किया जा रहा है। न कोई रोकने वाला है और न कोई टोकने वाला। भले ही अफसर दावे कुछ भी करते हों।

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दुकानों की जगह अस्तबल

नौचंदी मेला स्थल में जहां दुकानें लगती हैं प्रशासन की अनदेखी के चलते आसपास के लोगों ने वहां अपने पालतु पशु बांध दिए हैं। जय जवान जय किसान गेट के समाने वाले नौचंदी के बाजार के शेड में किसी शख्स ने अपने घोड़ों का अस्तलब बना दिया है। उसके बगल में एक अन्य शख्स से गाय भैंस बांध दी हैं। यहां क्रिकेट खेल रहे बच्चों ने बताया कि पूरा मेला स्थल अनदेखी के चलते तबेले में तब्दील हो गया है। बारिश और सर्दी के मौसम में जिन लोगों के पास पालतु पशुओं को बांधने की जगह नहीं है, वो लोग पालतु पशु मेला स्थल में बनाए गए शेडों में बांध देते हैं। जिससे नौचंदी मेला मैदान अस्तबल में तब्दील हो गया।

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