Wednesday, March 18, 2026
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संभल हिंसा पर मेरठ में भी हाई अलर्ट

  • अतिसंवेदनशील इलाकों में रखी जा रही पैनी नजर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: संभल में रविवार हुई हिंसा के बाद मेरठ में भी पुलिस फोर्स अलर्ट पर है। शहर के अतिसंवेदनशील इलाकों पर नजर रखी जा रही है। खुफिया सूचना तंत्र सक्रिय है। एलआईयू के लोग तमाम इलाकों में देखे गए। संभल हिंसा की खबरें दिन भर सोशल मीडिया पर वायरल होती रहीं। वहां हिंसा के दौरान बड़े स्तर पर आगजनी हुई। संभल हिंसा की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन के आलाधिकारी अलर्ट मोड पर हैं। सूत्रों ने जानकारी दी है कि संभल हिंसा के बाद लखनऊ से भी प्रदेश भर में पुलिस प्रशासन के अफसरों को चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं, दूसरी ओर संभल से आने वाली खबरों पर भी अधिकारी पैनी नजर रख रहे हैं। संभल में हिंसा और पूर्व सांसद की हापुड़ रोड स्थित मीट फैक्ट्री पर हिन्दू संगठनों के हंगामे को लेकर भी कुछ लोग नाराजगी का इजहार कर रहे हैं। हालांकि मीट फैक्ट्री प्रकरण निपट गया। हंगामा करने वाले हिन्दू संगठन लगा रहे थे, वैसा जांच में कुछ भी पाया नहीं गया। रविवार देर शाम शहर के संवेदनशील इलाकों में चौकसी देखी गयी। पुलिस का मूवमेंट आम दिनों के अपेक्षा अधिक नजर आया।

मरीज की मौत पर लोकप्रिय में जमकर हंगामा

मेरठ: मेडिकल थाना क्षेत्र के जागृति विहार निवासी मरीज की मौत के बाद करीब ढाई लाख के बिल की पेमेंट के लिए लोकप्रिय हॉस्पिटल में मरीज की मौत के बाद उसका शव नहीं दिया। इसको लेकर जागृति विहार व परिवार के लोगों ने वहां जमकर हंगामा काटा। उन्होंने मरीज के इलाज में देरी के भी गंभीर आरोप लगाए। बताया गया है कि मेडिकल के जागृति विहार मकान नंबर-727/9 निवासी राघव सिंह पंवार लोकप्रिय अस्पताल में बतौर गार्ड 30 साल से ज्यादा अरसे तक नौकरी कर रहे थे। उनके लिवर में कुछ परेशानी थी।

उन्होंने शहर के एक निजी चिकित्सिक से इलाज कराया। बाद में निजी चिकित्सक ने उन्हें 16 नवंबर को लोकप्रिय हॉस्पिटल में भर्ती होने की सलाह दी। परिजनों ने बताया कि राघव सिंह का आयुष्मान कार्ड बना हुआ था। निजी डाक्टर जो पहले इलाज कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आयुष्मान कार्ड पर सरकारी खर्च पर इलाज हो जाएगा, लेकिन आरोप है कि जिन निजी चिकित्सक ने यहां इलाज के लिए भेजा था। उन्होंने उसके बाद इलाज नहीं किया। लोकप्रिय के किसी दूसरे डाक्टर को यह केस रेफर कर दिया गया।

मृतक के पुत्र कार्तिक ने बताया कि आयुष्मान कार्ड होते हुए भी अस्पताल के स्टाफ ने करीब दो लाख रुपये दवाओं व अन्य के नाम पर खर्च कराए। रविवार सुबह तक राघव सबसे बात कर रहे थे। ऐसा कुछ नहीं लगा कि उनकी मौत हो जाएगी, लेकिन शाम करीब पांच बजे स्टाफ ने बताया कि राघव की मौत हो चुकी है और साथ ही करीब ढाई लाख का बिल भी थमा दिया। यह भी कहा कि पहले बिल जमा करो उसके बाद ही मरीज का शव मिलेगा।

हॉस्पिटल स्टॉफ के रवैये से परेशान राघव की मौत से दुखी परिजनों ने वहां हंगामा शुरू कर दिया। इस बीच वहां जागृति विहार से बड़ी संख्या में लोग आ गए। हंगामा शुरू हो गया। सूचना पर पुलिस पहुंच गयी। परिजनों ने विधायक अतुल प्रधान को मामले की जानकारी दी तो विधायक ने कहा कि वह सीएमओ से बात कर रहे हैं। इतना ही नहीं उन्होंने परिजनों को भी सीएमओ का मोबाइल नंबर दे दिया।

बैकफुट पर स्टॉफ

मामला तुल पकड़ता देखकर बाद में स्टॉफ बैकफुट पर आ गया। परिजनों से कहा कि वह बगैर बिल जमा करे शव ले जा सकते हैं, लेकिन उन्हें डेथ सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा। डेथ सर्टिफिकेट तब तक नहीं देंगे जब तक पूरा बिल जमा नहीं किया जाएगा। इस संबंध में सीएमओ अशोक कटारिया ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है।

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