Tuesday, June 25, 2024
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क्रिएटिव फ्रीडम घटने पर बोले हनी सिंह

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‘बेशरम रंग’ लाख विरोध के बावजूद रंग जमाने और अपने मकसद में कामयाब रहा। ‘पठान’ फिल्म में दीपिका पादुकोण और शाहरुख खान पर फिल्माए इस गाने को यूट्यूब पर रिलीज के पहले 11 दिन में 11 करोड़ से अधिक व्यूज मिल चुके हैं। शाहरुख खान ने अपनी लास्ट मेगाहिट 2013 में दीपिका के साथ ही ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ दी थी। उसके बाद से शाहरुख को एक अदद हिट का शिद्दत से इंतजार है। ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ में मशहूर रैपर हनी सिंह का गाया और शाहरुख-दीपिका पर फिल्माया गाना ‘लुंगी डान्स’ चार्टबस्टर साबित हुआ था।

अब हनी सिंह ने ‘बेशरम रंग’ गाने पर चल रहे विवाद को लेकर मुंह खोला है। हनी सिंह खुद भी अतीत में ‘चार बोतल वोडका, काम मेरा रोज का’ जैसे गाने देने के लिए आलोचनाओं के घेरे में रह चुके हैं। हनी सिंह ने ‘बेशरम रंग’ गाने के हवाले में कहा है- ‘पहले बहुत आजादी थी, लोग भले ही कम पढ़े-लिखे थे लेकिन कहीं ज्यादा सेंसिबल थे, वो बौद्धिक रूप से समझदार थे और चीजों को मनोरंजन के रूप में लेते थे, किसी भी बात को दिल पर नहीं लेते थे।” हनी सिंह ने अपनी बात को समझाने के लिए ‘रोजा’ फिल्म के गाने ‘रुक्मणी रुक्मणी शादी के बाद क्या हुआ’ और ‘खलनायक’ के गाने ‘चोली के पीछे क्या है’ का जिक्र किया।

‘रोजा’ 1992 और ‘खलनायक’ 1993 में रिलीज हुई थी। हनी सिंह के मुताबिक वो ऐसे गाने सुनते ही बड़े हुए लेकिन जब उन्होंने इस तरह के बोल लिखे तो विरोध शुरू हो गया। अब तो हालात और विकट हो गए हैं। हनी सिंह ने एक बार कपिल शर्मा के शो में भी कहा था, मुझ पर गानों के लिए ऊंगली उठाई जाती है लेकिन कोई मुझे बताए कि ‘आज की रात मेरे दिल की सलामी ले ले’ गाने में ऐसी कौन सी सलामी है जो रात को ही दी जा सकती है।’

औरतों की तालीम पर तालिबानी पहरा

तालिबान हुकूमत ने 20 दिसंबर से अफगानिस्तान की यूनिवर्सिटीज को महिलाओं के लिए प्रतिबंधित घोषित कर दिया है। वजह बताई गई है कि छात्राएं उचित ड्रेस कोड सहित निर्देशों का पालन नहीं कर रही थीं। अफगान उच्च शिक्षा मंत्री नेदा मोहम्मद नदीम के मुताबिक , ‘जो छात्राएं घर से विश्वविद्यालयों में आ रही थीं, वे भी हिजाब के निर्देशों का पालन नहीं कर रही थीं। वे ऐसे कपड़े पहन रही थीं, जैसे किसी शादी में जा रही हों।

’ अफगान लड़कियों के लिए विश्वविद्यालय शिक्षा पर अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया गया है। पिछले साल अगस्त में तालिबान के देश पर कब्जे के बाद, विश्वविद्यालयों को लिंग के आधार पर अलग कक्षाओं और प्रवेश सहित नए नियमों को लागू करने के लिए मजबूर किया गया था, जबकि महिलाओं को केवल महिला प्रोफेसरों या बूढ़े पुरुषों द्वारा पढ़ाए जाने की अनुमति थी।

तालिबान का ये कदम खुद के पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। सउदी अरब, कतर और तुर्की ने तालिबान के इस कदम की निन्दा करते हुए अफगान प्रशासन से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। तुर्की के राष्ट्रपति के प्रवक्ता इब्राहिम कालिन ने ट्वीट में लिखा, ‘तालिबान का यह कदम ‘इस्लाम की भावना के खिलाफ’ है और इसका धर्म में कोई स्थान नहीं है।’ कौन अब तालिबान को समझाए कि एक लड़के को पढ़ाने से एक व्यक्ति शिक्षित होता है, जबकि अगर एक लड़की को शिक्षा दी जाए तो पूरा परिवार शिक्षित होता है।

स्लॉग ओवर

मक्खन दिल्ली से चंडीगढ़ फ्लाइट पर जा रहा था। उसे मिडल सीट अलॉट हुई। मक्खन अपनी सीट छोड़ विंडो सीट पर बैठ गया। विंडो सीट एक बुजुर्ग महिला के नाम से बुक थी। महिला ने उसे अपनी सीट छोड़ने के लिए कहा लेकिन मक्खन नहीं माना। बोला- ‘मुझे विंडो से नीचे का व्यू देखना है।’ महिला ने एयर होस्टेस से शिकायत की।

एयर होस्टेस ने मक्खन से विंडो सीट छोड़ने की गुजारिश की लेकिन वो टस से मस नहीं हुआ। थक हार एयर होस्टेस ने फ्लाइट के कैप्टन को सारा माजरा बताया। कैप्टन ने फिर मक्खन के पास जाकर कान में कुछ फुसफुसाया। मक्खन बिना एक शब्द बोले तपाक से विंडो सीट छोड़ मिडल सीट पर बैठ गया। एयर होस्टेस इस पर बड़ी हैरान हुई। उसने कैप्टन से पूछा कि आपने आखिर उसके कान में क्या कहा? कैप्टन-‘कुछ नहीं, बस ये कि सिर्फ़ मिडल सीट्स चंडीगढ़ जाएंगी, बाकी सब जालंधर।’
(लेखक आज तक के पूर्व न्यूज एडिटर और देशनामा यूट्यूब चैनल के संचालक हैं)


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