Friday, May 1, 2026
- Advertisement -

बच्चों के स्कूल फोबिया को कैसे करें दूर

आपने बच्चों के मुंह से अक्सर ये सुना होगा, ‘मुझे स्कूल नहीं जाना है।’ ऐसे में पेरेंट्स उन्हें डांट कर या समझा कर स्कूल भेज देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि बच्चे बदमाशी कर रहे हैं, लेकिन, ऐसा बच्चे रोज-रोज करें तो जरूरी नहीं है कि ये उनकी बदमाशी हो। जब बच्चा लंबे समय तक स्कूल जाने से मना करे तो उसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे कि बच्चों में स्कूल फोबिया।

जब बच्चा पहली बार घर से निकलकर स्कूल पहुंचता है तो यह उसके लिए एक अलग अनुभव होता है। स्कूल में सब कुछ उसके लिए नया होता है। कुछ बच्चे तो स्कूल के माहौल में जल्दी एडजस्ट जाते हैं लेकिन, कुछ बच्चों को स्कूल के नए माहौल को अपनाने में समय लग जाता है। स्कूल जाने के डर से कई बच्चों में बुखार,दस्त और उल्टी आदि की समस्या शुरू हो जाती है। मेडिकल साइंस के टर्म में इसे ‘स्कूल फोबिया’ कहते हैं। ज्यादातर 6 से 15 साल तक के बच्चे स्कूल फोबिया का शिकार होते हैं।

क्यों बच्चे स्कूल जाने से घबराते हैं?

ल्ल बच्चा माता-पिता से दूर नहीं रह पाता हो

ल्ल पेरेंट्स का बच्चों पर अनावश्यक दबाव

ल्ल बच्चे को स्कूल में टीचर की डांट का डर सताता हो

ल्ल होमवर्क न करने पर मिलने वाली सजा का डर

ल्ल स्कूल में किसी के साथ मतभेद हुआ हो

अगर बच्चा स्कूल जाने से डरता हो या हमेशा न जाने के बहाने ढूंढता हो तो थोड़ा ध्यान से अपने बच्चों को समझें और उनकी समस्या का पता लगाने की कोशिश करें और उसके स्कूल फोबिया को दूर करने की कोशिश करें। यदि आपका बच्चा स्कूल के बारे में किसी तरह की चिंता से घिरा हुआ हो तो यह उसके स्वास्थ्य पर भी नजर आता है। बच्चों में पेट दर्द और सिर दर्द की शिकायत हो सकती है। उल्टी जैसी समस्या भी हो सकती है। रात को सोने में परेशानी भी हो सकती है। इसके अलावा, हो सकता है कि कोई क्लासमेट या कोई सीनियर स्टूडेंट बच्चे के साथ किसी तरह की बुलिंग कर रहा हो। यह भी हो सकता है कि बच्चा किसी खास टीचर से डरता हो। इसलिए वे स्कूल जाने से मना कर रहा हो।

बच्चों के स्कूल फोबिया को दूर करने के लिए उसकी बात को समझने की कोशिश करें। बच्चे से बात करें कि क्यों वह स्कूल जाने से मना कर रहा है। उसकी समस्या को समझने की कोशिश करें। बच्चे का क्लास में कोई फ्रेंड, क्लासमेट्स, टीचर, और स्कूल के काउंसलर से भी बात करें। बच्चे की सही तकलीफ का पता लगाएं। समस्या जानने के बाद किसी भी समस्या का समाधान हो सकता है। फिर चाहे वह स्कूल फोबिया ही क्यों न हो। बच्चे को स्कूल में होने वाले डेली-एक्सपीरियंस को लिखने को मोटिवेट करें। वह स्कूल के बारे में कुछ लिखेगा, इससे उसके स्कूल टाइम कैसा जा रहा यह पता चलेगा। हर दिन के बारे में अगर वह आपको बताए या फिर उसे डायरी में लिखता है तो भी अच्छी बात है। इससे भी आप वजह जान सकते हैं कि बच्चा स्कूल जाने के लिए क्यों मना कर रहा है। बातों को लिखने से मन हल्का हो जाता है।

बच्चों को स्कूल की कुछ बातें पसंद नहीं होती है। इसके कारण भी वह स्कूल जाने से कतराते हैं। इसलिए बच्चे को स्कूल की पसंद और नापसंद वाली बातों की लिस्ट बनाने को बोलें। उनसे बात करते हुए स्कूल में बिताए क्वालिटी टाइम पर भी बात करें। इससे भी आपको मालूम हो सकेगा कि क्यों आपके बच्चे स्कूल नहीं जाते और स्कूल फोबिया की वजह क्या है?

बच्चे से उसकी पसंद-नापसंद की बात करें। इसमें उनके शौक और हॉबी को शामिल कर सकते हैं। उनसे पूछें कि उसे किस चीज का शौक है और बताएं कि स्कूल में होते हुए इसे कैसे पूरा कर सकते हैं। इससे आपका बच्चा स्कूल के टाइम को एन्जॉय करने लगेगा और धीरे-धीरे बहाने बनाना बंद कर देगा। इस तरीके से स्कूल फोबिया दूर हो सकता है।

स्कूल फोबिया को दूर करने के लिए अपनाएं ये टिप्स

ल्ल बच्चे को स्कूल भेजने के लिए उसके लिए कुछ शॉपिंग जरूर करें। बच्चे को स्कूल बैग, टिफिन बॉक्स, वॉटर बोतल, शूज, स्टेशनरी आदि चीजें दिलवाएं। इससे बच्चे के अंदर एक्ससाइटमेंट आएगा। स्कूल के लिए शॉपिंग करते समय बच्चे को बताएं कि वो स्कूल जाने वाला है। उसके लिए आप शॉपिंग कर रहे हैं।

ल्ल बच्चों का स्कूल जाना फन लगे इसके लिए आप स्कूल के एन्वायरमेंट, वहां के प्ले ग्राउंड और स्कूल की अच्छी-अच्छी बातें बताएं। ध्यान रहें, बच्चे को सकारात्मक बातें ही बताएं। उसे बताएं कि वो स्कूल में गेम्स खेलेगा, उसे बड़ा मजा आएगा। साथ ही उसके नए दोस्त बनेंगे।
ल्ल बच्चे से उसकी भावनाएं जानने को भी कोशिश करें। उसे पहली बार पेरेंट्स के बिना किसी नई जगह जाना कैसा लग रहा है।

ल्ल बच्चों का स्कूल जाना शुरू हो, उससे पहले ही पेरेंट्स बच्चे को उसके शेड्यूल के बारे में बताएं।

ल्ल बच्चे को दिलासा दें कि स्कूल में कुछ भी होगा तो आप हैं उसकी प्रॉब्लम्स सुनने के लिए. उसकी हेल्प करने के लिए आप हरदम उसके साथ हैं।

ल्ल बच्चों का स्कूल जाना अगर बस से तय है तो उसके बारे में भी बताएं कि वह अकेले कितने सारे हम उम्र के बच्चों के साथ ट्रैवल करेगा।

ल्ल बच्चे के लिए लंच बॉक्स में उसकी पसंद खाना दें।

ल्ल बच्चा जब स्कूल से वापस आ जाए , तो उससे पूछें कि उसे पहले दिन स्कूल में क्या-क्या अच्छा लगा।

ल्ल पॉसिबल हो तो स्कूल के ही एक-दो बच्चों से अपने बच्चे को मिलवाएं। जिससे बच्चे के स्कूल में दोस्त पहले से ही होंगे। हो सके तो अपने पड़ोस में ही उस स्कूल का बच्चा देखें।

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

किसानों के लिए वरदान हैं बैंगन की टॉप 5 किस्में

किसानों के लिए बैंगन की खेती में बेहतर उत्पादन...

धान उगाने की एरोबिक विधि

डॉ.शालिनी गुप्ता, डॉ.आर.एस.सेंगर एरोबिक धान उगाने की एक पद्धति है,...

बढ़ती मांग से चीकू की खेती बनी फायदेमंद

चीकू एक ऐसा फल है जो स्वाद के साथ-साथ...

झालमुड़ी कथा की व्यथा और जनता

झालमुड़ी और जनता का नाता पुराना है। एक तरफ...

तस्वीरों में दुनिया देखने वाले रघु रॉय

भारतीय फोटो पत्रकारिता के इतिहास में कुछ नाम ऐसे...
spot_imgspot_img