- चोरी के वाहनों की तलाश में आए दिन दूसरे राज्यों की पुलिस की दबिशें
- बड़ा सवाल: यदि वाहन चोरी नहीं हो रहे तो कहां से आए रहे हैं पार्ट्स
शेखर शर्मा |
मेरठ: सदर का सोतीगंज इलाका चोरी के दो पहिया वाहनों को खपाने का ठिकाना बन गया है। यहां कितने बडेÞ स्तर पर चोरी के वाहनों के पार्ट्स खपाए जा रहे हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में यहां दो पाहिया वाहनों के ओल्ड पार्ट्स की करीब पचास दुकानें खुल गई हैं। देश के तमाम राज्यों की पुलिस यहां चोरी के वाहनों की तलाश में आए दिन छापे डालती है। यह बात अलग है कि माल बरादगी और धरपकड़ से ज्यादा जोर ले देकर मामले को दफा-दफा करने पर अधिक दिया जाता है।
आए दिन दूसरे राज्यों की पुलिस के छापे
चोरी के दो पहिया वाहनों की तलाश में सोतीगंज में आए दिन पुलिस के छापे लगते हैं। नाम न छापे जाने की शर्त पर पता चला है कि वाहन चोरों को लेकर दूसरे राज्यों की पुलिस पहुंचती है। चोरी के वाहनों की खरीद फरोख्त करने वालों की तलाश में दबिशें दी जाती हैं, लेकिन आमतौर पर ऐसे वाक्यात कम ही होते हैं, जिनमें किसी को धरा गया हो। ज्यादातर मामले ले देकर निपटा दिए जाते हैं।
छापों का जारी होता है अलर्ट
सोतीगंज में चोरी के वाहनों को खपाने वालों की तलाश में दूसरे राज्यों की पुलिस फोर्स के छापे से पहले अलर्ट जारी कर दिया जाता है। जानकारों की मानें तो ऐसा उन्हीं मामलों में किया जाता है। जिनमें दूसरे राज्यों की पुलिस आमद दर्ज कराती है। ऐसी स्थिति में खाली हाथ लौटने के अलावा कोई चारा नहीं होता। जब कभी सीधे कबाड़ी के ठिकाने पर छापा मारा जाता है तो भले ही चोरी का वाहन या कबाड़ी हत्थे न चढे, लेकिन खाली हाथ लौटने की नौबत नहीं आती।

ऐसे ली जाती है डिलीवरी
चोरी के वाहनों की डिलीवरी की यदि बात की जाए तो शहर के सीमावर्ती थाना क्षेत्रों में इनकी डिलीवरी ली जाती है। ऐसे थानों क्षेत्रों में मवाना, गंगानगर, मेडिकल, परतापुर, रेलवे रोड, दौराला सरीखे थानों के नाम गिनाए जाते हैं। मेरठ के आसपास के जनपद ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से जो वाहन चोरी कर लाए जाते हैं, उनकी डिलीवरी देने को आने वालों के शहर में घुसने या सोतीगंज तक पहुंचने की नौबत नहीं आने दी जाती है। सीमावर्ती थाना क्षेत्रों में डिलीवरी ली जाती है।
दूसरी जगह खुलती है गाड़ी
चोरी के जो दो पहिया वाहन सोतीगंज में ठिकाने लगाने को लाए जाते हैं, उनको खोलने का काम सोतीगंज में कभी नहीं किया जाता। दरअसल सोतीगंज के जो कबाड़ी इस धंधे में उतरे हुए हैं और जिन्होंने अपने दो पहिया ओल्ड वाहनों के पार्ट्स के शोरूम बना लिए हैं उन्होंने गाड़ियों को खोलने के लिए शहर के अन्य इलाकों में ठिकाने बना लिए हैं। ऐसे ठिकानों का खुलासा भी जनवाणी शीघ्र करेगा। इन ठिकानों पर गाड़ी खोलकर पार्ट्स चार पहिया वाहनों की डिग्गी में डालकर सोतीगंज के शोरूम तक पहुंचा दिए जाते हैं।
ऐसे होता है खेल कबाड़ियों को बचाने का खेल
चोरी के वाहनों में फंस जाने के चलते यदि किसी कबाड़ी को बचाने पर पुलिस उतर आए तो उसके लिए भी पुलिस के पास बेहद सधे हुए तरीके होते हैं। जैसा कि तीन दिन पहले यानि बीते गुरूवार को सुनने में है। दूसरे राज्य से चोरी की गई एक लग्जरी गाड़ी सोतीगंज में कबाड़ी के ठिकाने तक पहुंच गई, लेकिन गाड़ी ठिकाने तक पहुंचाने इसमें लगे जीपीआरएस सिस्टम से बेखबर रहे।
गाड़ी को 80 फीसदी तक खोल भी लिया गया। गाड़ी मालिक व राज्य की पुलिस जीपीआरएस सिस्टम की मदद से सोतीगंज तक पहुंच गई, लेकिन कार्रवाई की नौबत से पहले लोकल पुलिस संकट मोचन बन गई। कबाड़ी पर आंच नहीं आने दी गई और दबिश को पहुंची पुलिस को लिसाड़ीगेट क्षेत्र में सुनसान स्थान पर लावारिस अवस्था में छोड़कर गाड़ी बरामद भी करा दी गई।
हालांकि इसमें थोड़ा खर्चा हो गया, लेकिन काम सभी का बन गया। वहीं, इस संबंध में एसओ सदर बाजार दिनेश चंद का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने संपर्क किया था। उन्हें बता दिया था कि सदर क्षेत्र में ऐसी कोई गाड़ी नहीं। शहर में कहीं अन्य तलाश करें। उसके बाद क्या हुआ जानकारी नहीं।

