- बिजली के नखरों से बेहाल लोग अब कर रहे त्राहिमाम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के चेयरमैन की सख्त हिदायत के बाद भी अघोषित कटौती से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। शहर से लेकर देहात तक सभी जगह लोग बिजली के नखरे उठाने को मजबूर हैं। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाइवे कांवड़ मार्ग तक बीच-बीच में अंधेरे में डूबा रहा। बिजली संकट को लेकर तमाम जनप्रतिधियों ने सीएम योगी को अवगत कराया। उसके बाद ही विगत 30 जुलाई को चेयरमैन, अध्यक्ष आशीष गोयल आईएएस ने प्रदेश भर के सभी डिस्कॉम जिनमें पीवीवीएनएल, पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल व केस्को कानपुर के एमडी को पत्र लिखकर बिजली सप्लाई को लेकर बाकायदा एडवाइजरी जारी की है।
इस एडवाइजरी में चेयरमैन ने जिला मुख्यालय पर 24 घंटे बिजली सप्लाई, तहसील स्तर पर 21.30 घंटे तथा जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति हर दशा में किए जाने के निर्देश दिए हैं। पत्र में आशीष गोयल ने कहा कि विद्युत सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए तत्काल फाल्ट ठीक किए जाएं। विद्युत फाल्ट होने पर कटी बिजली को अतिरिक्त सप्लाई देकर पूरा किया जाए। वहीं, दूसरी ओर पीवीवीएनएल चीफ धीरज सिन्हा का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप बिजली आपूर्ति की जा रही है। कहीं लाइन पर काम करना होता है या फिर रखरखाव के चलते कट लेना हो तो अलग बात है, लेकिन उस स्थिति में भी शीघ्र ही आपूर्ति शुरू करा दी जाती है।
नहीं सुधर रहे हालात
एक ओर तो पावर चेयरमैन के आदेश दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि उमस भरी गर्मी में भी बिजली कटौती ने जीना मुहाल कर दिया है। जिला मुख्यालय पर भी बिजली सप्लाई का रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। बिजली के लगातार झटकों व नखरों ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। उनका कहना है कि अब तक डिमांड भी पहले से कुछ घटी है। पहले से पारा भी थोड़ा बहुत नीचे आया है, लेकिन बिजली कटौती में सुधार होना अभी बाकि है। पूर्व पार्षद अब्दुल गफ्फार व सपा के अफजाल सैफी, इकरामुद्दीन बालियान आदि ने इस मसले पर सीएम योगी का पत्र भेजा था, लेकिन हालात जस के तस बने हैं। बिजली आपूर्ति है कि सुधरती नजर नहीं आ रही है। आमतौर पर बिजली कटौती पीक ओवर में की जाती है। मसलन भरी दोपहरी को, लेट नाइट या फिर अल सुबह करीब चार से छह बजे के बीच। पीक ओवर में बिजली आपूर्ति के नाम पर नखरे दिखाना अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों को इस मौसम में भी किस प्रकार की मुसीबत उठानी पड़ रही है।
ट्विटर तक सीमित सीएम के आदेश
आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश शर्मा ने बिजली कटौती पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने हा है कि मुख्यमंत्री का आदेश अखबार और ट्विटर पर ही चलता है। बिजली की अघोषित कटौती के हालात नहीं सुधर रहे हैं। इसके इतर जमीनी स्तर पर पीवीवीएनएल अफसर भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं। उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। लापरवाही की वजह से भ्रष्टाचारी मजे ले रहे हैं।

