Friday, May 1, 2026
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बिजली चोरी की तो लगेगा ‘करंट’

  • तीन और चार केवी के बिजली कनेक्शनों की भी होगी एमआरआई

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चोरी की बिजली से यदि घर और दुकान रोशन करने का इरादा है तो सावधान हो जाइये। इरादा टाल दीजिए। क्योंकि बिजली चोरी रोकने के लिए पीवीवीएनएल प्रशासन अब खास अभियान चलाने जा रहा है। पीवीवीएनएल सूत्रों ने जानकारी दी है कि कम किलोवाट पर अधिक लोड चलाने वाले और मीटर शंट करके बिजली चोरी करने वाले लोग विभाग से बच नहीं सकेंगे। पीवीवीएनएल की ओर से अब तीन और चार किलोवाट के बिजली कनेक्शनों की भी एमआरआई (मीटर रीडिंग इंस्ट्रूमेंट) कराई जाएगी।

उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डा. आशीष गोयल की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं। बिजली चोरी और बिजली की खपत का पता लगाने के लिए पावर कारपोरेशन की ओर से 5 से 9 किलोवाट के विद्युत कनेक्शन की एमआरआई कराई जा रही थी। इसके वांछित परिणाम आने के बाद अब विभाग ने तीन और चार किलोवाट के कनेक्शन की एमआरआई कराने का निर्णय लिया है। मार्च माह से ऐसे विद्युत कनेक्शनों की एमआरआई शुरू हो जाएगी। विद्युत विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर उपभोक्ताओं के मीटर की जांच करेंगे।

60 हजार 3 व 4 केवी के कनेक्शन

शहर में तीन और चार केवी के कनेक्शनों की संख्या 60 हजार से अधिक है। इन सभी उपभोक्ताओं के यहां एमआरआई करने वाली कंपनी के अधिकारी उनके घर जाएंगे। वह उपभोक्ता के मीटर की जांच करेंगे और उसकी वास्तविक खपत और डिमांड का पता लगाएंगे।

एमआरआई यानि मीटर रीडिंग इंस्ट्रूमेंट

एमआरआई का मतलब मीटर रीडिंग इंस्ट्रूमेंट से है। इस उपकरण के इस्तेमाल से मीटरों की जांच की जा रही है। मीटर में इंस्ट्रूमेंट को लगाकर पता लगाया जा रहा है कि जहां कनेक्शन लगा है, वहां बिजली की खपत कितनी है और बिजली खर्च कितनी हो रही है। अगर बिजली डिमांड से अधिक फूंकी जा रही है

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तो इसका तुरंत पता चल जाएगा। मीटर पर अगर अधिक लोड है तो वह भी सामने आ जाएगा। फिर लोड के आधार पर मीटर की क्षमता को बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा अगर मीटर को टैंपर करके बिजली चोरी की जा रही है तो इसका भी पता चल जाएगा।

भूमाफियाओंं ने 52 फुटा सरकारी रास्ते को कब्जाया

मेरठ: शहर के लिए सालों पहले भोला झाल से एक स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु एक मुख्य पाइप लाइन का प्रावधान किया गया था। वार्ड-22 के अंतर्गत 52 फुटा रोड के नाम से जाने वाले इस मार्ग पर भूाफियाओं ने कब्जा कर इसे 12 फीट संकुचित बना दिया। सरवस्ती लोक से खड़ौली बाइपास राष्टÑीय मार्ग से जोड़ने वाले इस सरकारी मार्ग आज भी बदहाल स्थिति में है। जबकि राजस्व अभिलेखों में 52 फुटा के नाम से दर्ज इस सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर प्रशासन कुंभकरणी नींद सोये हुए है।

वार्ड-22 के पार्षद ने कमिश्नर के समक्ष इस मार्ग की समस्या को उठाते हुए इसे कब्जामुक्त करने की मांग की है। कई वषों से सरवस्ती विहार से खड़ौली बाईपास राष्टÑीय मार्ग उत्तर प्रदेश राजस्व अभिलेखों में 52 फीट चौड़ा दर्ज है। वार्ड-22 से पार्षद मदनपाल ने 30 नवम्बर को कमिश्नर मेरठ मंडल से मिलकर इस 52 फुटा मार्ग की समस्या को उनके समक्ष रख इसका निवारण करने की मांग की थी। उन्होंने अपने मांगपत्र के माध्यम से अवगत कराया था कि यह 52 फुटा मार्ग सरवस्वी लोक से खड़ौली एनएच-58 से जुड़ता है,

लेकिन प्रशासन इसका निर्माण करने पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है, लेकिन वर्षों से बदहाल स्थिति में पड़ा यह 52 फुटा मार्ग आज भी संकरा और कच्चा है। इस मार्ग से सीधे सीधे क्षेत्र की कई कालोनी ऐरा कालोनी, खड़ौली, नंद विहार, संगम विहार, गगन विहार, गोकुल एन्कलेव, शिवरामपुरम, गोलाबढ़, सरवस्ती विहार, शालीमार गार्डन, हरदेव नगर जुड़ती हैं, लेकिन बावजूद इसके आज भी प्रशासन इस मार्ग की सुध लेने वाला नहीं है। यही वजह है कि भूमाफियाओं ने इस मार्ग पर कब्जा जमा इसे 52 फुटा से 12 फीट पर ला दिया है, लेकिन इस सरकारी जमीन पर कब्जा होने के बाद भी प्रशासन नहीं चेता है। उधर वार्ड-22 के सभासद आज भी अपनी मांग को पुरजोर तरीके से उठाने में जुटे हैं।

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