Thursday, April 30, 2026
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बोर्ड आफ आफिसर की रिपोर्ट के बाद भी कैंट अफसरों की अवैध कब्जे पर चुप्पी

  • करियप्पा स्ट्रीट स्थित बंगला 105 रिज्यूम के लिए एडम कमांडेट ने लिखा था डीईओ को पत्र

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आर्मी के बोर्ड आफ आफिसर की रिकमंडेशन के बाद 105 करियप्पा रोड स्थित जिस बंगले को सेना के लिए रिज्यूम किया जाना था, उस बंगले एक बड़े हिस्से पर कब्जे पर कैंट अफसरों ने हैरानी भरी चुप्पी साध ली है। इसके अलावा यह भी पता चला है कि इस बंगले का एक बड़ा हिस्सा बेच भी दिया गया है।

इस पूरे मामले को सबसे चौंकाने वाला पहलू तो यह है कि जिनका कोई मालिकाना हक नहीं तथा न ही जिनका नाम जरलन लैंड रजिस्टर में है, उनका नाम एक होटल मालिक दो भाइयों को इसके बड़े भाग का सौदा कर दिया सुनने में आया है। हालांकि इसकी अधिकृत पुष्टि नहीं की जा सकी है।

16 मई 2019 को तत्कालीन एडम कमांडर रोहित पंत ने करियप्पा स्ट्रीट बंगला 105 को सेना के लिए जरूरी बताते हुए इसको रिज्यूम करने के लिए पत्र पश्चिमी यूपी सब एरिया हेड क्वार्टर भेजा था। साथ ही इसके निहितार्थ तमाम बिंदुओं पर एक रिपोर्ट भेजी थी।

07 19

एडम कमांडेंट के लेटर के बाद सब एरिया से आर्मी का बोर्ड आफ आफिसर गठित किया गया था। इसमें 510 बेस वर्कशाप के कर्नल तथा आर्मी की 197 लाइट इन्फेन्ट्री के अफसर तथा डीईओ के प्रतिनिधि शामिल थी।

बोर्ड आफ आफिसर ने बंगला रिज्यूम कर लिए जाने के तमाम आधार मौजूद होने की बात कही थी। बोर्ड आफ आफिसर की रिपोर्ट के बाद जिस बंगले को तत्काल सेना के लिए खाली कराया जाना था, हैरानी तो इस बात की है कि उस बंगले पर अवैध कब्जा हो गया और कैंट अफसर चुप बैठे रहे।

अपुष्ट सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि इस बंगले के एक बड़े हिस्से का होटल मालिक दो भाइयों से मोटी रकम लेकर सौंदा कर दिया गया है। जिस स्थान पर यह बंगला मौजूद हैं, वहां से दिन में कई बार कैंट और आर्मी अफसरों की गाड़ियां गुजरती हैं, लेकिन किसी का भी ध्यान बंगले पर अवैध कब्जे की तरफ न जाना हैरानी भरा है।

छुट्टी के दिन अवैध निर्माण

रविवार साप्ताहिक अवकाश के दिन इस बंगले में तेजी से अवैध निर्माण भी शुरू करा दिया गया है। जनवाणी टीम ने इस अवैध निर्माण को कैमरे में कैद किया तो वहां काम कर रहे मजदूरों में हड़कंप मच गया। वहीं, दूसरी ओर अपुष्ट सूत्रों ने जानकारी दी है कि इस बंगले के एक हिस्से के सौदे में कैंट बोर्ड में जनता के जिस नुमाइंदे का नाम लिया जा रहा है।

बताया जाता है कि उसने कैंट अफसरों से अपने संबंधों का वास्ता देकर ही अपने कार्यकाल में बंगले में निर्माण कार्य करा देने का वादा किया है और हुआ भी ऐसा ही।

रविवार को भारी भरकम मजदूर लगाकर बंगले में अवैध निर्माण भी शुरू कर दिया गया है। हैरानी की बात तो ये है कि कमांड हाउस और कैंट बोर्ड अवैध निर्माण स्थल से चंद कदम दूरी पर ही मौजूद हैं। उसके बाद भी नींद टूटती नजर नहीं आ रही है।

सदस्यों ने साधी चुप्पी, अफसर मौन

बंगले में किए जा रहे अवैध निर्माण को लेकर कैंट बोर्ड के सदस्यों से जब सवाल किया तो उन्होंने चुप्पी साध ली। वहीं, दूसरी ओर रविवार अवकाश का दिन होने की वजह से कई बार प्रयास किए जाने के बाद भी कैंट बोर्ड के किसी भी अफसर ने मोबाइल कॉल रिसीव नहीं की, जिसकी वजह से समाचार में उनका पक्ष नहीं लिया जा सका है

भाजपाइयों की चढ़ी त्यौरियां

इस प्रकरण को लेकर भाजपाइयों की भी त्यौरियां चढ़ी हुई हैं। भाजपा का जो खेमा पहले से ही टोल मामले को लेकर कैंट बोर्ड के कुछ सदस्यों से नाराज है, बताया गया है कि बंगले के मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने भी इसको लेकर नाराजगी का इजहार संगठन स्तर पर कर दिया है।

चुनावी राजनीति के लिहाज से पूरे मामले को लेकर संगठन की बदनामी के तौर पर पेश किया गया है। वहीं, दूसरी ओर पता चला है कि कैंट बोर्ड के कई सदस्य महानगर संगठन के एक बड़े पदाधिकारी के पास फरियाद लेकर पहुंचे थे। कैंट में अवैध निर्माणों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों का ठिकरा विरोधियों पर फोड़ने का प्रयास किया, लेकिन जब आईना दिखाया तो कन्नी काटते नजर आए।

दरअसल, बोर्ड के इन्हीं सदस्यों की वजह से टोल मामले को लेकर जनता के बीच भाजपा की जमकर किरकिरी हुई थी। इस मुद्दे पर संगठन की किरकिरी के लिए इन्हीं सदस्यों को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है। आरोप है कि संगठन के साथ नजर आने का दम भरने वाले बोर्ड के कुछ सदस्य अंदरखाने ठेकेदार से दोस्ती निभाते रहे।

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