
पिछले कुछ दिनों में देखा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में विस्फोट की घटनाएं लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। पिछले एक हफ्ते के भीतर इलेक्ट्रिक स्कूटरों में ऐसी चार घटनाएं हो चुकी हैं। ऐसे में, ग्राहकों के मन में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर शंकाएं पैदा होने लगी हैं। पिछले दिनों तमिलनाडु के वेल्लोर में ई-स्कूटर चार्जिंग के दौरान पिता और पुत्री की मौत हो गई। दरअसल, दुरईवर्मा नाम के शख्स ने रात को सोते वक्त ई-स्कूटर को चार्जिंग में लगा दिया और निश्चिंत होकर सो गए। देर रात चार्जिंग के दौरान बैट्री में धमाका हुआ और घर में आग लग गई। आग की वजह से कमरे में सो रहे पिता और पुत्री की दम घुटने से मौत हो गई। दुरईवर्मा ने हाल में नया ई-स्कूटर खरीदा था और घर के बाहर चार्जिंग सुविधा नहीं होने के कारण बेडरूम में उसे चार्ज कर रहे थे। बैट्री में धमाके का कारण उसकी क्षमता कम होना बताया जा रहा है।
ई-स्कूटर में आग लगने की घटना तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में भी हो चुकी है। 21 वर्षीय गणेश जब दफ्तर से ई-स्कूटर पर सवार हो कर घर लौट रहे थे तब उन्होंने अपनी गाड़ी से धुआं निकलता देखा। उन्होंने तुरंत ही गाड़ी रोक दी और वह देखते ही देखते जलने लगी। ऐसी ही घटना त्रिची में भी हुई। पुणे में भी एक ई-स्कूटर में आग लगने का मामला बीते दिनों सामने आ चुका है। वहां ओला के ई-स्कूटर में आग लग गई थी। पार्क किए गए ओला एस1 प्रो स्कूटर में बाहरी हस्तक्षेप के बिना आग लग गई थी। जिससे ग्राहकों के मन में ई-स्कूटरों की सुरक्षा को लेकर शंकाएं पैदा हो रही हैं। इन तमाम घटनाओं ने लोगों के मन में इलेक्ट्रिक स्कूटर को लेकर एक डर का माहौल पैदा कर दिया है।
हालांकि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को लोकसभा में कहा कि सरकार इन सभी घटनाओं की फॉरेंसिक जांच करवाएगी और अगर इस जांच में इन वाहनों को बनाने वाली कंपनियां जिम्मेदार पाई जाती हैं, तो उन पर कड़ी कार्रवाई होगी। दरअसल, मौजूदा वक्त में देश और दुनिया को इलेक्ट्रिक वाहनों के टेक्नोलॉजी की आवश्यकता है। जैसा कि यह तकनीकी भविष्य की जरूरत भी है। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों में आगजनी की घटनाएं वाकई बेहद चिंताजनक हैं। लिहाजा, इस टेक्नोलॉजी में सुधार के साथ ही साथ इसे और अधिक सुरक्षित बनाने की आवश्यकता है।
इस बीच आम-आदमी के मस्तिष्क में इस सवाल का कौंधना स्वाभाविक है कि आखिर ई-स्कूटरों में आग क्यों लग रही है? जानकार सबसे पहले इसके लिए बैट्री को जिम्मेदार बताते हैं। उनका कहना है कि ई-स्कूटर्स में बैट्री ही ऐसा हिस्सा है जहां आग लग सकती है। इसे लेकर कड़े सुरक्षा नियम अपनाए जाने की जरूरत है। वे सुझाव देते हैं कि लीथियम आयन बैट्री वाले टू व्हीलर को कठोर परीक्षण के बाद ही बाजार में बिक्री के लिए उतारने की इजाजत होनी चाहिए। साथ ही जानकार कहते हैं कि गाड़ी चलाने के तुरंत बाद उसे चार्जिंग में नहीं लगाना चाहिए। हीरो इलेक्ट्रिक के सीईओ सोहिंदर गिल ने हाल में एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि ई-स्कूटरों की सर्विस बेहद जरूरी है और इसको लेकर ग्राहकों के बीच जागरुकता फैलाई जानी चाहिए। गिल का कहना है कि डीलर और ग्राहक के बीच इसको लेकर जानकारी और जागरुकता का स्तर बेहद कम है, ग्राहकों को यह बताया जाना चाहिए कि बैट्री की देखभाल कैसी करनी है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिका में जब इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं, तब वहां इसकी जांच हुई थी और इस जांच में यह कहा गया था कि इलेक्ट्रिक वाहनों में लिथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है, जिसकी वजह से ये बैटरी ज्यादा तापमान में गर्म होकर आग पकड़ लेती है। इसके अलावा इस रिपोर्ट में आग लगने के पीछे वाइब्रेशन को भी एक कारण माना गया था। इसमें बताया गया था कि अगर वाहन के चलते समय बैटरी ज्यादा वाइब्रेट करें तो इससे भी उसमें आग लग सकती है। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग के दौरान कोई खामी रह जाए तो भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं।
यदि हम भारत में रजिस्टर्ड इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या की बात करें तो यहां आंकड़ा 10 लाख 76 हजार 420 है, जबकि पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या एक हजार 742 है। हालांकि एक अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2026 तक भारत को चार लाख चार्जिंग स्टेशनों की जरूरत पड़ेगी और वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की यह इंडस्ट्री 150 बिलियन डॉलर यानी साढ़े ग्यारह लाख करोड़ रुपए की हो जाएगी यानी आज की तुलना में यह इंडस्ट्री 90 गुना बड़ी हो जाएगी। आज इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के पीछे कई सारे फायदे भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। पॉल्यूशन से आजादी दिलाने में इन ई-वाहनों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता। आज पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएं से हम सभी परेशान हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों को चलाना ही सबसे बेहतर है।
आज देश में पेट्रोल और डीजल के भाव आसमान छू रहे हैं। ऐसे में बैटरी से चलने वाले वाहन काफी किफायती साबित हो सकते हैं। कहा जा सकता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल न केवल हमारे पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि हमारी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भी काफी कारगर है। लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनियों को यह समझना होगा कि अगर वह इस टेक्नोलॉजी को और अधिक सुरक्षित नहीं बनाएंगी, तो लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से डरने लगेंगे। क्योंकि पैसा तो किसी और भी तरीके से बचाया जा सकता है, लेकिन जान नहीं बचाई जा सकती। लिहाजा, इस टेक्नोलॉजी का सुरक्षित होना बेहद जरूरी है।


