जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद भारत अब पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका देने की तैयारी में है। केंद्र सरकार रावी नदी के भारत वाले हिस्से का पानी पाकिस्तान की ओर जाने से रोकने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। यदि यह कदम उठाया जाता है, तो गर्मियों में पाकिस्तान का जल संकट और गंभीर हो सकता है।
पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर बन रहा शाहपुर कंडी बांध लगभग पूरा होने के करीब है। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राना ने जानकारी दी कि संधि निलंबन के बाद इस परियोजना के काम में तेजी आई है। उनके अनुसार, बांध के पूरा होने के बाद रावी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान जाने से रोका जा सकेगा और उसे कठुआ व सांबा जैसे सूखाग्रस्त जिलों की ओर मोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इन इलाकों की सिंचाई जरूरतों को पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है।
यह परियोजना मूल रूप से 1979 में रावी के भारत हिस्से के पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई थी। 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसकी आधारशिला रखी थी। हालांकि, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच विवाद के कारण निर्माण कार्य लंबे समय तक अटका रहा। वर्ष 2008 में इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया गया, जिसके बाद काम को फिर गति मिली।
करीब 3,394 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस बांध में पंजाब सरकार ने 2,694 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार ने 700 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। 55 मीटर ऊंचा और 7.7 किलोमीटर लंबा यह बांध पंजाब में लगभग 5,000 हेक्टेयर भूमि और जम्मू क्षेत्र के कठुआ व सांबा जिलों में 32,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि की सिंचाई में सहायक होगा।
पूर्व सिंचाई मंत्री ताज मोहिदीन का कहना है कि सिंधु जल संधि रावी नदी के पानी के संचालन को सीमित नहीं करती, क्योंकि इस नदी के जल पर भारत का पूर्ण अधिकार है।

