जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना का सबसे अनुभवी और ऐतिहासिक लड़ाकू विमान मिग-21 आज आधिकारिक रूप से रिटायर हो गया। चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित गरिमामयी विदाई समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एपी सिंह, थलसेना अध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने विशेष रूप से शिरकत की।इस ऐतिहासिक क्षण ने एक युग का अंत और नए युग की शुरुआत का संकेत दिया -जहां तेजस, मिग-21 की विरासत को आगे ले जाने के लिए तैयार है।

मिग-21 की आखिरी उड़ान
समारोह के दौरान, छह मिग-21 विमानों ने ‘पैंथर फॉर्मेशन’ में अंतिम बार आसमान को चीरते हुए उड़ान भरी। इस अंतिम प्रदर्शन का नेतृत्व स्क्वाड्रन 23 (पैंथर्स) के ग्रुप कैप्टन राजेंद्र नंदा ने किया। खास बात यह रही कि इस अंतिम उड़ान में वायुसेना की जांबाज महिला पायलट स्क्वाड्रन लीडर प्रिया शर्मा भी शामिल रहीं।
समारोह के दौरान वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने भी ‘बादल-3’ कॉल साइन के तहत मिग-21 के साथ विदाई उड़ान भरी। इस पल को देखने वाले पूर्व वायु सैनिक और उपस्थित गणमान्यजन भावुक हो गए। जैसे ही विमान रनवे पर लौटे, उन्हें पानी की बौछार देकर अंतिम सलामी दी गई।
मिग की विरासत
मिग-21 की पहली स्क्वाड्रन की स्थापना भी चंडीगढ़ में हुई थी, और अब इसकी विदाई भी यहीं से की गई। इस ऐतिहासिक कड़ी को संजोते हुए एयरबेस पर एक ‘मेमोरी लेन’ बनाई गई है, जो 1963 से 2025 तक मिग-21 की गौरवगाथा को दर्शाती है।
समारोह के अंत में, मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग अफसर ने ‘फॉर्म-700’ — एक विशेष डॉक्युमेंटेशन — वायुसेना प्रमुख को सौंपा, जिसमें विमान के संपूर्ण तकनीकी रिकॉर्ड, मेंटेनेंस लॉग और पायलटों की उड़ान रिपोर्ट संकलित हैं।
भारत की हवा में गूंजती हुई शक्ति
अधिकतम रफ्तार: 2,175 किमी/घंटा (सुपरसोनिक)
पेलोड क्षमता: लगभग 3,500 किलोग्राम
मिशन प्रकार: एयर-टू-एयर कॉम्बैट, ग्राउंड स्ट्राइक, ट्रेनिंग और टोही मिशन
युद्ध इतिहास?
1965 और 1971 भारत-पाक युद्ध
1999 कारगिल युद्ध
2019 बालाकोट एयर स्ट्राइक
ऑपरेशन सिंदूर जैसे कई सफल मिशन
मिग-21 अपनी रफ्तार, सटीकता और फुर्ती के लिए जाना जाता था। इसे भारतीय वायुसेना का ‘बर्ड ऑफ ऑल सीजन’ कहा गया — हर मौसम, हर मोर्चे पर भरोसेमंद साथी।
“मिग-21 सिर्फ विमान नहीं, भावना है”
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा “मिग-21 सिर्फ एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि भारत और रूस के ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक रहा है। इसने भारतीय वायुसेना की रीढ़ बनकर दशकों तक राष्ट्र की सेवा की। चंडीगढ़ से इसकी शुरुआत हुई और यहीं से इसे गरिमामयी विदाई मिली — ये क्षण वायुसेना के इतिहास में दर्ज हो चुका है।”

सेना प्रमुखों ने जताया गर्व और भावुकता
थलसेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी: “मिग-21 की ताकत दुश्मन भी मानते थे। इसकी विदाई बेहद भावुक क्षण है।”
पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ: “यह विमान हमारी वायुसेना की ताकत रहा है। इसकी कमी जरूर खलेगी, लेकिन इसकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।”
अब तेजस संभालेगा कमान
मिग-21 की जगह अब स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस को आगे बढ़ाया जाएगा, जो न केवल तकनीकी रूप से अधिक उन्नत है बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल का सशक्त उदाहरण भी है। यह बदलाव वायुसेना की आधुनिकता और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।
बता दें कि, मिग-21 की विदाई एक गर्व और गौरव से भरा क्षण है। छह दशकों तक राष्ट्र की सेवा कर चुके इस सुपरसोनिक योद्धा ने भारत को आसमान में जो आत्मविश्वास और ताकत दी, उसे शब्दों में बांधना मुश्किल है। आज भले ही उसकी गर्जना थम गई हो, लेकिन उसका शौर्य, पराक्रम और योगदान भारत के हर नागरिक के दिल में हमेशा गूंजता रहेगा।

