- लगभग आधा घंटे तक रहा टोल फ्री, हुई टोल कर्मचारियों से हुई तीखी नोकझोंक
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: दिल्ली जाते हुए भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने सोमवार की सुबह टोल फ्री करा दिया। लगभग आधा घंटे तक टोल फ्री रहा।
इस दौरान टोलवे कंपनी के अधिकारियों और यूनियन के कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक भी हुई। हालांकि सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।
पुलिस से भी पदाधिकारियों ने नोकझोंक की, लेकिन बाद में पुलिस के समझाने बुझाने के बाद किसी तरह मामला शांत हुआ। इसके बाद टोल सुचारु हो सका।
सरकार द्वारा पारित किए गए अध्या देश के विरोध में सोमवार को भाकियू के कार्यकर्ता एकत्रित होकर दिल्ली जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन करने के लिए जा रहे थे।
जब सुबह के समय भाकियू कार्यकर्ताओं के साथ-साथ अन्य किसान टोल प्लाजा पर पहुंचे तो उन्होंने टोल प्लाजा को फ्री करा दिया और वहां रखे कई बूथों में तोड़फोड़ भी कर दी।
किसानों के हंगामे को देख तुरंत टोलवे कंपनी के अधिकारी मौके पर पहुंच गए और उन्हे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। जिसके चलते टोलवे अधिकारियों और किसानों के बीच नोकझोंक हुई।
टोल फ्री होने की सूचना मिलने पर दौराला थाना प्रभारी करतार सिंह भी मयफोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। थाना प्रभारी ने किसानों और यूनियन के पदाधिकारियों को समझाया तो उनके साथ भी नोकझोंक हुई।
हालांकि बाद में थाना प्रभारी द्वारा समझाने के बाद किसी तरह किसान माने। लगभग आधा घंटे तक टोल फ्री रहा। जिसके चलते वाहन फ्री निकलते रहे। हजारों रुपये का टोल को नुकसान भी हुआ।
किसानों के जाने के बाद ही टोल सुचारु हो सका। इस सम्बंध में टोल प्लाजा के मैनेजर प्रदीप चौधरी ने बताया कि टोल प्लाजा पर यूनियन के पदाधिकारियों द्वारा टोल को फ्री कराया गया।
लगभग आधा घंटे तक टोल फ्री रहा। टोल पर कुछ पदाधिकारियों द्वारा टोल पर तोड़फोड़ भी की गई है। हालांकि पूरे प्रकरण से पुलिस को अवगत करा दिया गया है। थाना प्रभारी करतार सिंह का कहना है समझा-बुझाकर किसानों को भेज दिया।
किसान ट्रैक्टर लेकर कलक्ट्रेट में घुसे

किसानों ने ट्रैक्टरों के साथ कलक्ट्रेट में हल्ला बोल दिया। किसानों को पुलिस रोकती रही, लेकिन किसान कलक्ट्रेट में ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर एंट्री कर गए। इस दौरान टकराव भी पैदा हुआ, लेकिन किसानों ने एक नहीं सुनी।
किसानों ने कह दिया कि ट्रैक्टर लेकर ही भीतर जाएंगे। इसके बाद पुलिस बैकफुट पर आ गई। किसान कई मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे थे। किसान आक्रोशित थे, यूपी व केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों को लेकर।
किसानों ने कहा कि किसान विरोधी निर्णय सरकार ले रही है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीएम कार्यालय पर युवाओं व किसानों ने संयुक्त रूप से केंद्र व राज्य सरकार की कृषि नीति को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति व राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन डीएम के माध्यम से सौंपा।
इस अवसर पर युवाओं ने कहा कि भारत सरकार द्वारा जारी तीनों समिति एक्ट एमआरपी का खात्मा, आवश्यक वस्तु अधिनियम, कांट्रेक्ट फार्मिंग, अध्यादेश दोनों सदनों में व्यापक चर्चा के बाद लागू किए जाएं।
साथ ही कहा कि एसएनपी के लिए नया अध्यादेश लाया जाए व कृषि उर्वरक, कीटनाशक से जीएनटी खत्म हो। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपने ट्रैक्टर जबरन कलक्ट्रेट में प्रवेश करा दिए। प्रदर्शन करने वालों में राममेहर सिंह गुर्जर, नरेंद्र, पूर्व मंत्री मेराजुद्दीन, नासिर अंसारी, सोपेंद्र, रतन सिंह, कुलवंत सोलंकी आदि मौजूद रहे।
जीएम, सचिव का घेराव धरने पर बैठे किसान
बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर सोमवार को किसान आक्रामक हो गए। मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल में गन्ना बकाया भुगतान और अन्य समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया।
शुगर मिल के जीएम और सचिव का घेराव कर किसान धरने पर बैठे गए। दिल्ली रोड स्थित मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल में भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले सैकड़ों किसानों ने हंगामा करते हुए मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल जीएम शीशपाल सिंह और गन्ना सचिव सुनील कुमार का घेराव किया।
किसान नेता विजयपाल घोपला ने बताया कि मोहिउद्दीपुर शुगर मिल पर किसानों का करीब 80 करोड़ बकाया है और दूसरा सत्र भी शुरू होने जा रहा है। किसान भुखमरी के कगार पर आ खड़ा हुआ है। किसानों ने कहा कि गन्ना बकाया भुगतान जल्द से जल्द किया जाए और शुगर मिल को भी जल्द ही चलाया जाए, जिससे समय से किसानों का गन्ना उठ जाए और गेहूं की फसल बोने में आसानी हो सके।
मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल जीएम शीशपाल सिंह ने बताया कि जल्द ही किसानों को 70 प्रतिशत बकाया गन्ना भुगतान कर दिया जाएगा।
क्योंकि शुगर मिल जल्द ही एक्सपोर्ट की गई शुगर के 10 करोड़ रुपये और बिजली एक्सपोर्ट के छह करोड़ रुपये लेकर किसानों को देने जा रहा है, वहीं उन्होंने कहा कि मोहिउद्दीनपुर शुगर मिल को 25 अक्टूबर को चालू कर दिया जाएगा, जिससे किसानों को किसी भी तरह की दिक्कतों का सामना न करना नहीं पड़ेगा।
धरना देने वाले किसानों में विपिन चौधरी, रघुवंश अच्छरोंडा, राजकुमार राणा, सचिन चौधरी, सुन्दरपाल घोपला, महक सिंह गून, हीनू चौधरी आदि मौजूद रहे।

