- तेल, मेदा समेत सभी पदार्थों पर बढ़े हैं दाम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: होली के मौके पर बढ़ती महंगाई ने सबकुछ फीका कर दिया है। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों से रसोई का बजट गड़बड़ाता दिख रहा है। पकवान बनाए जाने वाली सामग्री पर भी महंगाई की मार है। सब्जी की कीमतों पर भी लगाम नहीं लग पा रहा है। महंगाई से गुजिया की मिठास कम होती दिखाई दे रही है।
महंगाई प्रतिदिन बढ़ रही है, जबकि होली पर्व पर सबसे अधिक खर्च खाद्य सामग्री को बनाने पर किया जाता है। घी, रिफाइंड, वनस्पति, मेदा, सूजी, घी, बेसन आदि की सबसे अधिक मांग रहती है, लेकिन इन दिनों इन सभी खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ी हुई हैं। इतना ही नहीं रोजमर्रा खाने के प्रयोग में आने वाली सब्जियां भी महंगी हैं। इनकी भी कीमतें कम नहीं हो रही हैं। बढ़ती कीमतों से आम आदमी में पर्व को लेकर उत्साह कम दिखाई दे रहा हैं।
विशेषकर गरीब और मध्यम परिवारों में गृहणियां महंगाई को लेकर चितित हैं। एक आम आदमी जो त्योहार के मौके पर घर में गुजिया, मटरी, नमक पारे, चिप्स व विभिन्न प्रकार की कचरी बनाता है इस बार महंगाई ने उनकी चाह को कम कर दिया है। लोगों ने बहुत ही कम मात्रा में पदार्थों को खरीदा है। बढ़ती महंगाई ने सबका बजट बिगाड़कर रख दिया है। सभी वस्तुओं पर 15 से 20 फीसद तक कीमतें बढ़ी हुई हैं।
सबसे अधिक कीमतें रिफाइंड और वनस्पति पर बढ़ी हैं। यह महंगाई रूस और यूक्रेन युद्ध का प्रभाव है। नई सरसों आ जाने से सरसों के तेल की कीमत बीते माह से कुछ कम है। अन्य वस्तुएं महंगी हुई हैं। गुप्ता ट्रेडर्स के आॅनर सोनू गुप्ता ने बताया कि पिछले एक माह से महंगाई बढ़ रही है। रिफाइंड पर भी दाम बढ़े हैं। पहले रिफाइंड का जो टीन दो हजार रुपये का था, वह अब 2800 रुपये का आ रहा है।
इसी प्रकार मेदा के दामों में भी वृद्धि हुई है। जिस कारण घर में चीजे बनाना और भी महंगा हो गया है। गरीब और मध्यम वर्ग के लिए यह महंगाई परेशानी का सबब बन गई है। कीमतें नियंत्रित करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। आम जरूरत की चीजें तो सस्ती होनी ही चाहिए।

