Friday, May 1, 2026
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आईटी में अग्रणी शहर साइबर ठगी के शिकार

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आईटी में अग्रणी शहर साइबर ठगी के शिकार 2

यदि यह प्रश्न किया जाए कि देश में सूचना प्रोद्यौगिकी में सबसे आगे कौन सा स्थान है तो बिना किसी झिझक व संदेह के एक ही शब्द का उत्तर आयेगा कि भारत में बेंगलुरू सूचना प्रोद्यौगिकी का बड़ा हब है। बल्कि यह कहना चाहिए कि बेंगलुरू की वैश्विक पहचान ही आईटी हब के रूप में होती है। अब यह भी माना जाना चाहिए कि सूचना प्रोद्यौगिकी या यों कहें कि आईटी में बेंगलुरुवासियों की समझ देश के अन्य प्रदेशों के नागरिकों की तुलना में अधिक ही होगी। दूसरी यह कि बेंगलुरू आईटी हब है तो निश्चित रुप से यहां के निवासियों का साक्षरता स्तर और समझ ना केवल अधिक होगी, अपितु अन्य शहरों की तुलना में अधिक ही होगी। अब तस्वीर का दूसरा पहलू जो सामने आता है वह यह कि देश में साइबर अपराधों से पीड़ितों की भी सबसे अधिक संख्या बेंगलुरू में ही हैं। साल दर साल साइबर अपराध से ग्रसित लोगों की बेंगलुरू में बढ़ती ही जा रही है। हालांकि दिल्ली, हैदराबाद आदि आदि अधिक समझदारों के क्षेत्रों में भी साइबर अपराध अधिक हो रहा है।

देश के केवल तीन शहरों बेंगलुरू, दिल्ली एनसीआर और हैदराबाद में ही साइबर ठगी के अपराधों का प्रतिशत 65 फीसदी है। यह आंकड़ा भी केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए गठित इंडियन साइबर क्राइम कार्डिनेशन सेंटर आई4सी की हालिया रिपोर्ट में उभर कर आया है। रिपोर्ट के अनुसार अकेले बेंगलुरू में साइबर ठगी के 26.8 फीसदी मामले हो रहे हैैं, तो दिल्ली एनसीआर में 18.4 और हैदराबाद में 19.97 प्रतिशत मामले सामने आ रहे हैं। यह इस मायने में भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि साइबर ठगी और उससे बचने की उपायों की बात भी स्वाभाविक हैं आईटी एक्सपर्ट द्वारा ही की जाती है। वैसे भी यह सामान्य सोच की बात है कि साइबर ठगी के शिकार पैसे वाले लोग ही हो रहे हैं और पैसे वाले लोगों की समझ, सरकारी गैरसरकारी क्षेत्र में कार्य का अनुभव और पढ़े-लिखे होने को लेकर कोई सवाल ही नहीं उठाया जा सकता। ऐसे में साइबर अपराधियों के कौशल या समझ को सराहा जाए या समझदार होने पर भी नासमझी पर आंसू बहाए जाएं या क्या किया जाएं, गंभीर चिंता, चिंतन और मंथन का विषय है।

सरकारी आंकड़ों की ही बात करें तो 2024 में 22845 करोड़ रुपए से अधिक की साइबर ठगी हुई है। इस साल के शुरुआती पांच माह की ही बात की जाए तो भारतीयों ने सात हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि साइबर ठगी में गंवा दिए हैं। असल में साल दर साल साइबर ठगी के मामले और राशि में बढ़ोतरी ही हो रही है। यह सब तो तब है कि सरकार द्वारा 2018 में साइबर ठगी रोकने के लिए आई4सी का गठन किया जा चुका है। समय-समय पर मोबाइल पर कॉल करते ही साइबर ठगी से बचने का संदेश कॉलर टोन के रूप में होता है तो सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म पर साइबर ठगों द्वारा अपनाये जाने वाले तरीकों से बचने के लिए आगाह किया जाता रहा है। एक और यह कि साइबर ठगी की टर्मनोलोजी से भी आज का लगभग प्रत्येक व्यक्ति रूबरू होने के बावजूद गलती कर ही रहा है। फिशिंग, स्पूकिंग, स्पैम और साइबर स्टाकिंग के साथ ही डिजिटल अरेस्ट आज मोबाइल एण्ड्रायड रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति जानकार है।

सबसे मजेदार या हास्यास्पद बात तो यह है कि साइबर ठगी के अधिकांश शिकार पैसे वाले और पैसेवालों में भी अधिकांश उच्च पदों से रिटायर्ड अधिकारी होते हैं। उनकी समझ पर किसी तरह का प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। यह सब होने के बावजूद चीन, म्यांमार, लाओस, थाईलैंड व ऐसे ही अन्य स्थानों से ठगों द्वारा भारतीयों को पैसे के लालच से जोड़कर यह अपराध करवा रहे हैं। देखने में यह भी आया है कि साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट कोई चंद मिनटों तक नहीं रखकर एक दो दिन या इससे भी अधिक दिनों तक रखकर आसानी से ड़रा-धमकाकर पैसे खातों से ले लेते हैं। भ्रमित इस कदर हो जाते हैं कि लाखों-करोडों में राशि देते समय आगे पीछे की सोचना ही भूल जाते है और ठगाते हुए अहसास होता है कि बड़ा धोखा हो गया।

हालांकि सरकार द्वारा टोल फ्री नंबर जारी करने के साथ ही अवेयरनेस कार्यक्रम भी लगातार चलाया जा रहा है। बार-बार यही कहा जाता है कि अनजान नंबरों से आने वाले वीडियो कॉल की अनदेखी करें। इसी तरह से मोबाइल या मेल पर आने वाले अनजाने लिंक पर क्लिक करने से भी बचें। ज्यादातर मामलों में आपको या आपके परिवार के निकटस्थ को अवैध गतिविधियों में लिप्त होने का झूठा आरोप लगाकर भय दिखा कर ठगी की जा रही है। जब घर में भी कोई सदस्य या परिचित रुपया पैसा उधार मांगता है तो हम दस बार सोचते हैं, आनाकानी करते हैं तो फिर ना जाने ऐसा कौनसा सम्मोहन या भय के हालात हो जाते हैं कि अपनी मेहनत की पूंजी को ठगों के हवाले कर देते हैं। पढ़े लिखे लोग ही अधिक शिकार हो रहे हैं तो फिर किसे दोष दिया जा सकता है।

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