Sunday, July 21, 2024
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शुभ संयोग में मनाया जाएगा जन्माष्टमी का पर्व

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  • छह सितंबर को मनाई जाएगी श्री कृष्ण जन्माष्टमी
  • व्रत रखने से निसंतान दंपतियों को होगी संतान की प्राप्ति

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: हिंदू धर्म में हर साल जन्माष्टमी का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व बुधवार 6 सितंबर को है। इस वर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर कई वर्षों के बाद ऐसा संयोग बना है जो कि बहुत ही दुर्लभ है। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण अष्टमी तिथि बुधवार रोहिणी नक्षत्र एवं वृष राशि में मध्य रात्रि में हुआ था।

ज्योतिषाचार्य राहुल अग्रवाल ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी का त्योहार बुधवार 6 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस दिन श्रीकृष्ण की 5250वीं जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस बार की जन्माष्टमी काफी महत्वपूर्ण होने वाली है। पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। मान्यता है कि जन्माष्टमी पर व्रत रखने से भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त होता है साथ ही भक्तों के जीवन से सभी कष्ट दूर होते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से निसंतान महिलाओं को संतान की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि भाद्रपद की अष्टमी तिथि के दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था और इसलिए इसे कृष्ण जन्माष्टमी कहते है। इस साल यह तिथि बुधवार 6 सितंबर को दोपहर 3:37 मिनट पर शुरु होगी और इसका समापन 7 सितंबर को शाम 4:14 मिनट पर होगा। धर्म पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म रात्रि के समय रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।

इसलिए इस साल कृष्ण जन्माष्टमी 6 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 9:20 पर रोहिणी नक्षण शुरू होगा जो कि अगले दिन 7 सितंबर को सुबह 10:25 मिनट पर समाप्त होगा। बता दें कि जन्माष्टमी का त्योहार आमतौर पर दो दिन मनाया जाता है। गृहस्थ लोग 6 सितंबर को जन्माष्टमी मनाएंगे और वैष्णव संप्रदाय में 7 सितंबर के कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव मनाया जाएगा।

जन्माष्टमी पूजा विधि

जन्माष्टमी व्रत में अष्टमी के उपवास से पूजन और नवमी के पारण व्रत की पूर्ति होती है। इस व्रत के एक दिन पहले यानी सप्तमी के दिन हल्का और सात्विक भोजन ही करना चाहिए। व्रत वाले दिन प्रात: स्नान आदि से निवृत होकर सभी देवताओं को नमस्कार करें। पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाएं हाथ में जल, फल और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें। मध्यान्ह के समय काले तिल का जल छिड़क कर देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाएं।

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अब इस सूतिका गृह में सुंदर सा बिछौना बिछाकर उस पर कलश स्थापित करें। भगवान कृष्ण और माता देवकी की मूर्ति या सुंदर चित्र स्थापित करे। देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी जी का नाम लेते हुए विधिवत पूजन करें। यह व्रत रात 12 बजे के बाद ही खोला जाता है। इस व्रत में अनाज का उपयोग नहीं किया जाता। फलाहार के रूप में कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मावे की बर्फी और सिंघाड़े के आटे का हलवा खा सकते हैं।

जन्माष्टमी शुभ मुहूर्त

जन्माष्टमी तिथि बुधवार 6 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 37 मिनट से शुरु होगी। ये तिथि 7 सितंबर के दिन शाम 4 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 2 मिनट से लेकर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में लड्डू गोपाल की पूजा अर्चना की जाती है

और विधि-विधान से पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसी मान्यता के अनुसार गृहस्थ जीवन वाले 6 सितंबर को जन्मोत्सव मनाएंगे। इस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है।

व्रत करने से मिलेगी पाप-कष्टों से मिलती है मुक्ति

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहे दुर्लभ संयोग में पूजन का विशेष महत्व है। निर्णय सिंधु नामक ग्रंथ के अनुसार ऐसा संयोग जब जन्माष्टमी पर बनता है, तो इस खास मौके को ऐसे ही गवाना नहीं चाहिए। अगर आप इस तरह के संयोग में व्रत करते हैं तो 3 जन्मों के जाने-अनजाने हुए पापों से मुक्ति मिलती है।

मान्यता है कि इस तिथि और संयोग में भगवान कृष्ण का पूजन करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। व्यक्ति को भगवत कृपा की प्राप्ति होती हैं, जो लोग कई जन्मों से प्रेत योनि में भटक रहे हो इस तिथि में उनके लिए पूजन करने से उन्हे मुक्ति मिल जाती है।

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