Monday, April 13, 2026
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कैराना पर जाट-सिख समाज का वोट होगा निर्णायक साबित

  • कैराना विस पर रिकार्ड 75.12 प्रतिशत हुआ मतदान

जनवाणी संवाददाता |

कैराना: कैराना विधानसभा की हॉट सीट पर देश-प्रदेश की निगाहें हैं। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैराना पहुंचे थे तथा पलायन के तिलिस्म छेड़कर 2022 विधानसभा चुनाव में लाभ लेने का प्रयास किया गया था। गृह मंत्री अमित शाह ने भी कैराना पहुंचकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार अभियान का शंखनाद किया था।

इसके अलावा सपा रालोद गठबंधन प्रत्याशी नाहिद हसन का गैंगस्टर एक्ट में जेल जाना व भगवा खेमे द्वारा चुनावी रैलियों में कैराना पलायन मुद्दे को गरमाने जैसे प्रकरणों से एक बार फिर कैराना सुर्खियां बटोर रहा हैं।

विधानसभा चुनाव आते ही कैराना का किला जीतने के लिए भाजपा ने स्वर्गीय बाबू हुकुम सिंह की पुत्री मृगांका सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया तो वहीं सपा-रालोद गठबंधन ने कैराना सीट पर दो बार भाजपा को हराकर विधायक बन चुके नाहिद हसन पर विश्वास जताते हुए उनको चुनावी समुद्र में उतार दिया था।

समाजवादी पार्टी हो या भाजपा दोनों कैराना का गढ़ जीतने के लिए करीब एक महीने से कसरत कर रहें थे। नाहिद हसन की गैरमौजूदगी में उनकी बहन इकरा हसन उनका चुनाव प्रचार कर रही थी। एक और भाजपा के वरिष्ठ नेता मृगांका के पक्ष में प्रचार कर रहे थे तो वहीं इकरा हसन अकेले ही चुनाव प्रचार कर रहीं थीं।

लेकिन जैसे ही 10 फरवरी को कैराना विधानसभा पर मतदान का नंबर आया तो किसी ने सुरक्षा को लेकर मतदान किया तो किसी ने गन्ना भुगतान, किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों, बेरोजगारी व महंगाई के खिलाफ मतदान किया। इस दौरान न तो हिंदू मतदाताओं और ना ही मुस्लिम मतदाताओं ने कम मतदान किया।

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के 69.36 प्रतिशत मतदान के मुकाबले अबकी बार कैराना की जनता ने मत प्रतिशत का मीटर 75.12 प्रतिशत पर पहुंचा दिया। जिसके बाद एकाएक दोनों दलो के प्रत्याशी व उनके समर्थक हक्के भक्के रह गए।

कैराना विधानसभा सीट पर करीब तीन लाख 18 हजार मतदाता हैं। मत प्रतिशत से अलग अगर बात करें तो कैराना विधानसभा पर 2 लाख 41 हजार मत पड़े हैं। हर चुनाव में मतों का जोड़-तोड़ कर हार जीत का गणित बैठाने वाले राजनीतिक पंडितों की माने तो कैराना सीट का चुनाव कशमकश का चुनाव बन गया हैं।

क्योंकि मत प्रतिशत के हिसाब से कैराना कस्बे में करीब 51 हजार 700 वोट डाली गई हैं। जिनमें से करीब 41000 वोट नाहिद हसन को मिलने की संभावना जताई जा रही हैं। इसके अलावा झिंझाना व चौसाना कस्बे में करीब 30 हजार मुस्लिम मतदाताओं ने 75 प्रतिशत मतदान किया है। जिनमें से 22500 मत नाहिद को मिलने की संभावना है।

इसके अलावा कैराना ब्लॉक के देहात में करीब 52000 वोट हैं। जहां पर करीब 85 प्रतिशत मतदान होना माना जा रहा हैं। मत प्रतिशत के हिसाब से नाहिद हसन को करीब 44000 मत मिल रहें हैं। इसके अलावा ब्लॉक क्षेत्र में मौजूद जाट और सिख समाज के 30,000 वोट हैं। जिनका लगभग 85 प्रतिशत मतदान माना जा रहा हैं। जिनके 25500 मत पड़े हैं।

किसान आंदोलन, गन्ना भुगतान तथा रालोद का असर भी इन मतदाताओं में देखने को मिलता रहा। जिस कारण पड़े हुए मतों में से 70 प्रतिशत नाहिद हसन व 30 प्रतिशत मृगांका सिंह के पक्ष में मतदाताओं का रुझान माना जा रहा हैं। यहां पर भी नाहिद को करीब 17 हजार मत जाट व सिख समाज के मिल रहें हैं।

सभी को जोड़कर नाहिद हसन को पूरी विधानसभा पर करीब 1 लाख 25000 वोट मिलना माना जा रहा हैं। इनमें से अगर कांग्रेस प्रत्याशी अखलाक व बसपा प्रत्याशी राजेंद्र उपाध्याय दोनों प्रत्याशियों को 2000 वोट दिए जाए तो नाहिद हसन 1 लाख 23 वोटों पर आकर टिकते हैं।

भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को कुल पड़े हुए मतों में से सभी के मत निकालकर बाकी 1 लाख 16000 मत मिल सकते हैं। ऐसी स्थिति में नाहिद हसन मात्र 5 या 7 हजार वोटों से जीत सकते हैं। वहीं अगर जाट व सीख समाज के मतदाताओं के मतों का अनुपात नाहिद के पक्ष में कम होता हैं तथा कांग्रेस प्रत्याशी अखलाक ने मुस्लिम वोटों में उम्मीद से ज्यादा सेंध लगा ली तो नाहिद हसन की मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

ऐसी स्थिति में नाहिद के मतों का आंकड़ा नीचे तो मृगांका सिंह का मतों का आंकड़ा ऊपर पहुंच सकता हैं। इसी के साथ अगर बसपा प्रत्याशी राजेंद्र सिंह उपाध्याय दलित व पिछड़ी जातियों के मतों को अपनी ओर खींचने में कामयाब होते हैं तो हार जीत की गोली नाहिद हसन व मृगांका सिंह में से किसी के भी कान के पास से गुजर सकती हैं।

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