Thursday, April 25, 2024
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तानाशाही की राह पर जिनपिंग

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PRABHAT KUMAR RAIशक्तिशाली राजनीतिक शख्सियतों की वस्तुत: विवेचना की जाती है और प्राय: ऐतिहासिक तौर से तुलना भी की जाती है। जिस तरह से वर्तमान राजनीतिक दौर में रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के व्यक्तित्व की तुलना कामरेड स्टालिन के तानाशाह व्यक्तित्व के साथ की जा रही है, तकरीबन उसी तरह से ही चीन के वर्तमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तुलना कामरेड माओ के साथ की जाने लगी है। 1949 में चीन में कम्युनिस्ट इंकलाब के पश्चात कामरेड माओ 1949 से 1976 तक 27 वर्ष अपनी मृत्युपर्यन्त सत्तानशीन बने रहे। चीन का कोई भी अन्य कम्युनिस्ट लीडर कामरेड माओ की एकाधिकारिवादी सत्ता को गंभीर चुनौती पेश नहीं कर सका। कामरेड माओ के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने तृतीय सत्ताकाल के लिए चीन के सर्वोच्च एकाधिकारवादी सत्ताधीश बन गए हैं। चीन के संविधान में कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव के कार्यकाल को दस वर्ष के लिए निर्धारित किए गया था। 2018 में संविधान में एक बुनियादी संशोधन करके पार्टी महासचिव के दस वर्ष के कार्यकाल से बढ़ा कर अनिश्चित अवधि तक कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि चीनी संविधान के तहत कम्युनिस्ट पार्टी का महासचिव ही देश के राष्ट्रपति पद पर आसीन होता है और लाल सेना का सर्वोच्च कमांडर-इन-चीफ भी नियुक्त किया जाता है। विगत दस वर्ष के अपने निर्बाध सत्ताकाल के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अत्यंत निर्ममता के साथ अपने विरोधी राजनेताओं का सफाया किया और कामरेड स्टालिन की तर्ज पर व्यक्तित्व पूजा को बाकायदा स्थापित कर दिखाया। चीनी हुकूमत द्वारा राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रखर आलोचना करने वाले कम्युनिस्ट लीडरॉन का तकरीबन मुंह बंद करा दिया गया। अब देखना है कि भविष्य में कथित पीपुल्स रिपब्लिक आॅफ चाइना का क्या हश्र होता है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि चीन की कम्युनिस्ट धरा पर क्या शी जिनपिंग वस्तुत: कामरेड माओ सरीखी राजनीतिक शक्ति और ऐतिहासिक गौरव हासिल कर सकेंगे अथवा नहीं?

स्मरण कीजिए 1989 को, जबकि सोवियत रूस खंडित हो रहा था और चीन में विद्यार्थी आंदोलन के परचम तले चीन वस्तुत: जनतांत्रिक और क्रांतिकारी कवरट ले रहा था। कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ चाइना के शीर्ष नेतृत्व में विद्यार्थी आंदोलन और बहुदलीय जनतंत्र के प्रश्न को लेकर तीखे मतभेद उभरे। कामरेड डेंग शियाओ पिंग की हुकूमत के दौर में प्रधानमंत्री झाओ झियांग एक प्रबल राजनीतिक सुधारक सिद्ध हुए और उन्होंने चीन में सामूहिक नेतृत्व की आधारशिला रखी। साथ ही संवैधानिक तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव का कार्यकाल दस वर्ष की अवधि तक निर्धारित किया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री झाओ झियांग ने विद्यार्थियों के साथ वार्ता करने की पेशकश की, किंतु कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष कट्टरपंथी लीडर ली पेंग ने विरोध किया। अंतत: उदारवादी प्रधानमंत्री झाओ झियांग की पार्टी में निर्णायक पराजय हुई और कामरेड डेंग द्वारा तत्कालीन उदारवादी प्रधानमंत्री झाओ झियांग बर्खास्त कर दिया गया। आखिरकार बहुदलीय जनतंत्र के विरोधी कट्टर कम्युनिस्टों की चीन में जीत हुई और कामरेड डेंग के नृशंस हुक्म पर बीजिंग के थ्यानमैन स्कवायर पर जारी विद्यार्थियों के जनतांत्रिक आंदोलन को लालसेना के टैकों द्वारा नेस्तोनाबूद कर दिया गया। कामरेड डेंग श्याओ राजनीतिक कट्टरता स्थापित करने के साथ ही साथ आर्थिक उदारवाद के प्रबल अधिष्ठाता बनकर चीन में उभरे। कामरेड डेंग की आर्थिक उदारवाद की नीतियों ने चीन की तस्वीर बदल कर रख दी। समस्त विश्व के लिए चीन की अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी पूंजी निवेश के सभी द्वार खोल दिए गए। चीन जबरदस्त आर्थिक तरक्की की रह पर चल निकला।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग से ठीक पहले चीन के राष्ट्रपति रहे कामरेड हू जिनताओ के दस वर्ष के कार्यकाल में चीन वस्तुत: विश्वपटल पर अत्यंत शक्तिशाली आर्थिक शक्ति बनकर उदित हुआ। किंतु इसी दौरान चीन में आर्थिक विकास का विराट उभार होने के साथ आर्थिक और राजनीतिक भ्रष्टाचार में भयानक बढ़ोतरी हुई। तत्कालीन राष्ट्रपति हू जिनताओ की हुकूमत के दौर में वाणिज्य व्यापार मंत्री बो शीलाई, जो अत्यंत कामयाब और लोकप्रिय राजनेता रहे, राष्ट्रपति शी जिनपिंग सरकार ने पूर्व केंद्रीय केबिनेट मंत्री बो शीलाई और झाओ योशांग पर भ्रष्टाचार के संगीन इल्जाम लगे और उन्हें गिरफ्तार करके आजीवन कारावास की सजा दी गई। तकरीबन दस लाख लोगों को भ्रष्टाचार के इल्जामात के तहत सख्त सजाएं दी गर्इं। सजायाफ्ताओं में चीन सरकार के 120 आला अफसरॉन और लालसेना में उच्च पदों पर विराजमान सैन्य कमांडर मुजरिम करार दिए गए।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग स्वयं एक शीर्ष कम्युनिस्ट कमांडर शी झाओंगशन के साहबजादे हैं, जिनको चीन के प्रथम राष्ट्रपति ल्यू शाओ ची का निकट साथी होने के कारण कामरेड माओ द्वारा संचालित सांस्कृतिक क्रांति में दंडित करके पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। वर्तमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग 2012 में जब सत्तासीन हुए, तब चीन में भ्रष्टाचार चरम पर था। भ्रष्टाचार के खात्मे के नकाब में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने विरोधियों का सफाया कर दिया। तीसरी दफा सत्तानशीन होते ही शी जिंनपिंग ने अपने सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी चीन के प्रधानमंत्री ली कशीयांग को पार्टी की पोलित ब्यूरो से निष्कासित कर दिया। हालांकि ली कशीयांग अगले छ: माह तक चीन के प्रधानमंत्री बने रहेंगे। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ लीडर पूर्व राष्ट्रपति हू जिनताओ को पार्टी अधिवेशन के दौरान ही अपमानित करके अधिवेशन से निकाल दिया गया। वरिष्ठ कम्युनिस्ट लीडर और पूर्व राष्ट्रपति हू जिनताओ के निर्णायक समर्थन से ही 2012 में पार्टी महासचिव के पद के चुनाव में शी जिनपिंग ने ली किशीयांग को पराजित किया था। किंतु पूर्व राष्ट्रपति हू जिनताओ संविधान संशोधन द्वारा शी जिनपिंग के तीसरी दफा राष्ट्रपति नियुक्त किए जाने का विरोध कर रहे थे। अत: चीन के तकरीबन तानाशाह बन चुके, शी जिनपिंग ने अपनी पार्टी के पुरोधा और राजनीतिक गुरु पूर्व राष्ट्रपति हू जिनताओ को खुले आम अपमानित कर दिखाया।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन की परम्परागत विस्तारवादी रणनीति को और अधिक आक्रामक एवं तेजतर बनाएंगे। तानाशाह हो चुके, शी जिनपिंग ताइवान पर सैन्य कब्जा स्थापित करने की अंधराष्ट्रवादी चाहत में अमेरिका से सीधे टकरा सकते हैं। चीन द्वारा दक्षिण चीन सागर में और अधिक आधिपत्य स्थापित करने की अंधराष्ट्रवादी ललक वस्तुत: जापान को चीन के विरुद्ध सैन्यीकरण अंजाम देने की राह दिखा देगी। भारत के विरुद्ध चीन की आक्रमक नीति बदस्तूर कायम बनी रहेगी। अरुणाचल और लद्दाख पर चीन अपना अवैध दावा बनाए रखेगा। रूस, चीन, उत्तरी कोरिया और ईरान का सैन्य गठजोड़ नॉटो सैन्य संगठन के विरुद्ध विनाशकारी तृतीय युद्ध की भूमिका लिख सकता है।


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