जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: उत्तराखंड के चमोली जिले के ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद रेस्क्यू अभियान जारी है। दुर्घटना में जान गंवाने वाले सभी छह लोगों के शव देर रात भारतीय सेना ने अपने कब्जे में ले लिए थे। हालांकि, अंधेरा होने और घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता बेहद दुर्गम होने के कारण शवों को रात में सड़क तक नहीं पहुंचाया जा सका। इसके चलते रात में बचाव अभियान रोकना पड़ा।
शनिवार सुबह एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और भारतीय सेना के जवान एक बार फिर घटनास्थल पर पहुंचे और शवों को सड़क तक लाने का अभियान शुरू किया। घटनास्थल से सड़क की दूरी करीब 10 से 12 किलोमीटर है, जिसे जवानों को पैदल तय करना पड़ रहा है।
प्रशासन के अनुसार, हादसे में मृतकों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए हैं। इस वजह से उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने और सड़क तक पहुंचाने में काफी समय लग रहा है। दुर्गम पहाड़ी रास्ते और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए सभी बचाव टीमें पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही हैं।
डीजीसीए और एएआईबी की टीमें करेंगी हादसे की जांच
ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर हादसे की जांच अब विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की विशेषज्ञ टीमें करेंगी। अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को विशेषज्ञों की टीम उत्तराखंड पहुंचेगी।
जांच के दौरान दुर्घटनास्थल और हेलिकॉप्टर से जुड़े तकनीकी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो पाएगी।
गौरतलब है कि इस साल चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में हुआ यह पहला हेलिकॉप्टर हादसा है। इससे पहले वर्ष 2025 में चारधाम यात्रा के दौरान पांच हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएं हुई थीं।
पिछले साल हेलिकॉप्टर हादसों में गई थी 13 लोगों की जान
वर्ष 2025 में चारधाम यात्रा के दौरान हुए पांच हेलिकॉप्टर हादसों में से तीन मामलों में आपातकालीन लैंडिंग के दौरान हेलिकॉप्टर क्षतिग्रस्त हुए थे। हालांकि, इन घटनाओं में किसी की जान नहीं गई थी।
वहीं, उत्तरकाशी और केदार घाटी में हुए दो बड़े हेलिकॉप्टर हादसों में पायलट समेत 13 यात्रियों की मौत हो गई थी। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद प्रदेश सरकार और डीजीसीए ने हेलिकॉप्टर संचालन को सुरक्षित बनाने के लिए कई सख्त कदम उठाए थे।
हेलिकॉप्टर संचालन के लिए SOP, निगरानी व्यवस्था भी मजबूत
हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए डीजीसीए के दिशा-निर्देशों के तहत संचालन से जुड़ी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की गई। इसके साथ ही उड़ानों की निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की गई।
सोनप्रयाग और सहस्त्रधारा में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं, ताकि हेलिकॉप्टरों की आवाजाही पर बेहतर निगरानी रखी जा सके।
इसके अलावा मौसम खराब होने की स्थिति में हेलिकॉप्टरों को उड़ान की अनुमति नहीं दी जाती है। इन तमाम सुरक्षा उपायों के बावजूद जोशीमठ क्षेत्र में हुए ताजा हादसे ने एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर संचालन की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

