Thursday, April 25, 2024
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कर्म और सुख

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एक बार वर्षा के राजा इंद्र ने कृषकों से किसी कारण नाराज होकर बारह वर्षों तक बारिश न करने का निर्णय लिया। कृषकों ने एक साथ इंद्रदेव से वर्षा करवाने प्रार्थना की। इंद्र ने कहा, यदि भगवान शंकर अपना डमरू बजा देंगे तो वर्षा हो सकती है। इंद्र ने किसानों को ये उपाय तो बताया लेकिन साथ में चुपके से भगवान शिव से ये आग्रह कर दिया कि आप किसानों से सहमत न होना। जब किसान भगवान शंकर के पास पहुंचे तो भगवान ने उन्हें कहा, डमरू तो बारह वर्ष बाद ही बजेगा। किसानों ने निराश होकर बारह वर्षों तक खेती न करने का निर्णय लिया। लेकिन एक किसान ने खेत में काम करना नहीं छोड़ा। ये देख कर दूसरे किसान उससे पूछने लगे, जब बारह वर्षों तक वर्षा नहीं होने वाली तो अपना समय क्यों नष्ट कर रहे हो? उस किसान ने उत्तर दिया, मैं ये काम अपने अभ्यास के लिए कर रहा हूं। क्योंकि बारह साल कुछ न करके मैं खेती करना भूल जाऊंगा, मेरे शरीर की श्रम करने की आदत छूट जाएगी। इसीलिए ये काम मैं नियमित कर रहा हूं, ताकि जब बारह साल बाद वर्षा हो तो मुझे अपना काम करने के लिए कोई कठिनाई न हो। ये तार्किक चर्चा माता पार्वती भी बड़े कौतूहल के साथ सुन रही थीं। वह भगवान शिव से सहज भाव से बोलीं, प्रभु, आप भी बारह वर्षों के बाद डमरू बजाना भूल सकते हैं।

माता पार्वती की बात सुन कर भोले बाबा चिंतित हो गए। अपना डमरू बज रहा या नहीं ये देखने के लिए उन्होंने डमरू उठाया और बजाने का प्रयत्न करने लगे। जैसे ही डमरू बजा बारिश शुरू हो गई। जो किसान खेत में नियमित रूप से काम कर रहा था, उसके खेत में भरपूर फसल आई। बाकी के किसान पश्चाताप के अलावा कुछ न कर सके। हमें अपने कर्म पर विश्वास रखना चाहिए। हर रात्रि के बाद सुबह जरूर आती है।
प्रस्तुति : राजेंद्र कुमार शर्मा


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