- शिकायत के बावजूद अधिकारियों ने नहीं दिया संज्ञान
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: महाभारत कालीन तीर्थ नगरी से चंद किमी की दूरी पर भाजपा सरकार ने गोवंश को बचने के लिए लगभग तीन साल पूर्व गोशाला का निर्माण कराया था। गोशाला पर लगातार आने वाले अधिकारियों व श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए चुनाव आचार संहिता से पूर्व जिला पंचायत द्वारा गोशाला को जोड़ने के लिए हस्तिनापुर मुख्य मार्ग से मालीपुर तक लाखों रुपये खर्च कर लगभग तीन किमी लंबे मार्ग का निर्माण कार्य कराया गया। आलाधिकारियों की अनभिगता के कारण तीन किमी लंबा मार्ग चंद दिनों में ही धराशायी हो गया।

उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हो चुकी है और वर्तमान सरकार अपने विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच जा रही है। सरकार ने विकास कार्यों का ढिंढोरा पीट रही है। सड़कों में गड्ढे और उनमें भरा बारिश का पानी विकास कार्यों से रूबरू कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सड़कों में गड्ढों में पानी भरा हुआ है और आए दिन कोई न कोई बाइक सवार इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो जाता है। उन्होंने बताया कि कई बार यहां से निकलने वाले थ्री व्हीलर भी इन गड्ढों में जाने के कारण पलट गए और लोगों को चोटें भी आई।
लागत का नहीं किया खुलासा
सड़क निर्माण में हुआ भ्रष्टाचार निर्माण कार्य तक ही सीमित नहीं रह जाता है। तीन किमी लंबे सड़क निर्माण कार्य में कितनी लागत आई। इसकी जानकारी न तो अधिकारियों को है और न ही उद्घाटन बोर्ड पर खुलासा किया गया। हस्तिनापुर मुख्य मार्ग पर लगे उद्घाटन बोर्ड पर विभाग ने सब दर्शाया, लेकिन सड़क निर्माण कार्य में आई लागत को दर्शना यहां भी भूल गए। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी राहगीरों के गले उतरने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि अधिकारियों ने निर्माण के समय सड़क समय कोई एक्शन नहीं किया, जिसके चलते ठेकेदार ने खुलेआम घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया।
क्या कहते हैं अधिकारी
चंद दिनों में धराशायी हुई लाखों रुपये की लागत से बनी सड़क पर अधिकारियों की कथनी एकदम हास्यप्रद है। अधिकारी सड़क में घटिया निर्माण सामग्री को दोषी नहीं मान रहे, बल्कि ठंड को दोष दे रहे हैं। सड़क का निर्माण कार्य ठंड में हुआ है। जिसके चलते सड़क उखड़ गई। अवर अभियंता आशीष कुमार का कहना है कि सड़क निर्माण कार्य जल्द ही दोबारा कराया जाएगा ठंड में सड़क निर्माण होने के चलते सड़क उखड़ गई है। अभियंता/अपर मुख्य अधिकारी सुनील गुप्ता की भी कथनी भी अवर अभियंता से अलग नहीं है। वह भी ठंड के समय सड़क निर्माण को ही दोषी मान रहे हैं। लाखों रुपये की लागत से बनी सड़क ठंड में निर्माण के चलते खराब हो गई। जिसमें विभाग ठेकेदार द्वारा प्रयोग हुए घटिया निर्माण सामग्री नजर ही आ रही है।

