- माता-पिता ने तो कर ली थी खुदकुशी, मासूम रिया के लिए पुलिस बनकर आई फरिश्ता
- पुलिस ने टेडी बीयर और कपड़े दिये तो खुश हो गई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मौत के मुंह से लौट कर आई पांच साल की मासूम रिया की जिंदगी से मां और बाप शब्द खत्म हो गए। भारी कर्ज के कारण पत्नी की हत्या करने के बाद अरविन्द ने फांसी पर लटक कर जान दे दी थी।
रिया की मौत ईश्वर को मंजूर नहीं थी इस कारण वो मौत को नजदीक से देखकर वापस आ गई। जिला अस्पताल में तीन दिन रिया अब सामान्य होती जा रही है। सदर थाने की महिला सिपाहियों के भरोसे उसे रखा गया है। शनिवार को उसने बताया कि पापा ने उसके गले में रस्सी बांध कर दबाया था, जब उसने शोर मचाया तो पापा हट गये थे।
जिला अस्पताल में भर्ती रिया अब नब्बे फीसदी ठीक हो चुकी है। शरीर से जहर का असर खत्म हो गया है। चेहरे पर सूजन भी कम हो गई है। एसओ सदर विजय कुमार ने उससे नाम पूछा तो उसने अपना नाम रिया बताया। उसने बताया कि पापा ने मेरे और मम्मी के साथ खाना खाया था।
बाद में पापा ने मेरे गले में रस्सी बांधी और जब खींचने लगे तो मैंने शोर मचा दिया। इस पर पापा वहां से हट गये। इसके बाद संभवत रिया को जहर के कारण नींद आने लगी होगी और उसे उसके आगे का वाकया याद नहीं है। शनिवार को सदर थाने की महिला सिपाहियों ने कई दिन से गंदी बिस्तर पर पड़ी रिया को ठीक ढंग से नहलवाया और एसओ ने बाजार से उसके लिये कपड़े मंगवाये।
नये कपड़े पहन कर उसे काफी खुशी हुई और महिला सिपाही के सीने से लग गई। मां के बिना बच्ची की जिंदगी कैसी होती है यह रिया के चेहरे से साफ दिख रहा था। पुलिस ने उसे खाने के लिये सामान भी मंगवाया। बिस्कुट और चिप्स आदि खाकर उसे काफी सुकुन मिला।
जैसे ही एसओ ने उसे टेडी बीयर लाकर दिया उसने उसे अपने से चिपका लिया और मुस्कराने लगी। पुलिस ने बताया कि दिन भर वो मम्मी की याद में गुमशुम रहती है और बीच बीच में मां कहकर रोने लगती है। उसने पापा का नाम बमुश्किल एक दो बार ही लिया होगा। एसओ ने बताया कि जब तक बंगाल से उसकी नानी नहीं आ जाती है तब तक वो महिला सिपाहियों के पास रहेगी। इसके बाद उसका भविष्य प्रशासन तय करेगा।

