
ज्यादातर मामलों में बाउल साउंड्स यानी कि पेट से उठने वाली आवाजें सामान्य ही होती हैं लेकिन कई बार ये किसी स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर स्थिति की ओर भी इशारा कर सकती है। नींद के दौरान बाउल साउंड की कमी का आना सामान्य प्रक्रिया है। इसी तरह इस साउंड में कमी का होना कई बार कब्ज के कारण भी हो सकता है। वहीं कुछ खास प्रकार की औषधियां भी इस आवाज को धीमा कर सकती है।
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आंतों का काम चालू है: पेट की आवाजों का सीधा संबंध आंतों की कार्यप्रणाली से है। बाउल साउंड या पेट से उठने वाली आवाजों का मतलब होता है कि आंतें भोजन को पेट में आगे बढ़ा रही होती हैं। इस दौरान हो रहे आंतों के मूवमेंट से ये आवाजें पैदा होती हैं। असल में मनुष्य शरीर में मौजूद आंतें ठीक किसी पानी के पाइप की तरह हॉलो या खाली होती है। ऐसे में जो आवाज उत्पन्न होती है वह पेट की दीवारों से टकरा कर इको जैसी स्थिति बना देती है, ठीक वैसी ही आवाज जैसे पानी की पाइप में पैदा होती है।
इसका मतलब होता है कि गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट अपना काम कर रही है। यह आवाज अधिकांशत: हानिरहित ही होती है और स्टेथेस्कोप से इसे सुन कर डॉक्टर पेट के अंदर के हाल-चाल जान लेते हैं लेकिन कई बार यह किसी तरह की अस्वस्थता को भी इंगित कर सकती है।
आवाज में कमी आ जाए: ये वह स्थितियां है जिनके अंतर्गत पेट में हो रही आवाजें कम हो जाती हैं या उनका संतुलन गड़बड़ा जाता है। ऐसे में डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी हो जाता है।
जैसे: इलियस एक ऐसी स्थिति है जिसमें आंतों की कार्यप्रणाली में कमी आ जाती है। ऐसा विभिन्न मेडिकल कंडीशन्स के कारण भी हो सकता है। इस स्थिति में उपचार आवश्यक हो जाता है क्योंकि आंतों के कार्य में बाधा आने से आंतों के आसपास मौजूद पदार्थ फ्लूइड तथा गैस आदि ज्यादा मात्रा में जमा होने से आंत की दीवारें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।
पेट के अंदर आवाजों का धीमा, कमजोर या अनियमित होना भी इस बात की ओर इशारा करता है कि आंतों की गतिविधि बाधित हो रही हैं। इस बात को डाक्टर ही स्टेथेस्कोप के जरिए समझ सकता है। कई बार आंतों की यह आवाज इतनी तेज भी हो सकती है कि बिना स्टेथस्कोप के ही सुनाई दें। इसका मतलब है आंतों की एक्टिविटी में तेजी आई है और ऐसा भोजन के बाद या डायरिया के दौरान भी हो सकता है।
उल्टी, गैस, दस्त या नॉजिया जैसे लक्षणों के साथ भी बाउल साउंड के परीक्षण पर ध्यान दिया जाता है। बाउल साउंड्स की अनियमितता के साथ ही यदि अन्य परेशानियां भी सामने आएं तो तुरंत परीक्षण करवाना जरूरी है।
नरेंद्र देवांगन


