Thursday, March 19, 2026
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एसआईटी जांच पर मदरसा बोर्ड को भरोसा नहीं!

  • ‘जनवाणी’ से बोले-बोर्ड के चेयरमैन की ऐसी कोई रिपोर्ट आई ही नहीं

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मदरसों में विदेशी फंडिंग के साथ साथ अवैध मदरसों के संचालन का मुद्दा एक बार फिर गरमाया हुआ है। प्रदेश सरकार को सौंपी गई एसआईटी जांच रिपोर्ट में अवैध मदरसों को बंद करने की बात कही गई है। हालांकि इन सब से परे यूपी मदरसा बोर्ड बेफिक्र है। बोर्ड का मानना है कि इस प्रकार की कोई रिपोर्ट आई ही नहीं है। बोर्ड ने तो इस संबंध में विभिन्न समाचार पत्रों में छपी खबरों को ही ‘अवैध’ बता दिया।

यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड एसआईटी की जांच पर भरोसा क्यों नहीं कर पा रहा है। इस पूरे मामले में जब जनवाणी ने यूपी मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिेखार जावेद की सफाई जाननी चाही तो उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कोई रिपोर्ट आई ही नहीं है। उन्होंने लगे हाथों इस प्रकार की खबरों को ही अवैध करार दे दिया। अवैध मदरसो पर आरोप है कि यह सभी मदरसे तय मानकों के खिलाफ चलाए जा रहे थे।

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यहां एक सवाल और यह है कि जब इतनी बड़ी तादात में अवैध मदरसे मिले हैं तब मदरसा बोर्ड ने अपनी जिम्मेदारियों से मंूह क्यों फेरा। समय रहते बोर्ड सक्रिय क्यों नहीं हुआ। मदरसों में खाड़ी देशों से फंडिंग का मामला बेहद गंभीर विषय है। अगर समय रहते मदरसा बोर्ड अपने स्तर से ही कार्रवाई करता तो कुकुरमुत्तों की तरह उग आए अवैध मदरसों के संचालन पर खुद ही लगाम लगती।

दरअसल, यूपी में अवैध पाए गए मदरसों की संख्या हजारों में है। एसआईटी अवैध मदरसों के मामले में दो बार अंतरिम रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसमें अवैध मदरसों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की संस्तुति तक की जा चुकी है। मदरसों में विदेशी फंडिंग के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।

जनाब ! यह वक्फ प्रॉपर्टी है, खाला का घर नहीं

वक्फ प्रॉपर्टियां अक्सर कौम के नाम, औलाद के नाम या फिर खुदा के नाम पर वक्फ (आरक्षित) होती हैं। इनके साथ खिलवाड़ करना शरई (इस्लामी कानून) तौर पर गुनाह (पाप) माना जाता है। वक्फ प्रॉपर्टी के साथ छेड़छाड़ कानूनी तौर पर भी अपराध है, लेकिन इन सबसे परे आज वक्फ प्रॉपर्टियां जंग का अखाड़ा बन गई हैं। जो भी रसूख वाला है वही इस पर हाथ साफ कर रहा है। शहर में कई वक्फ प्रॉपर्टियां ऐसी हैं जिन पर रार है।

इन प्रॉपर्टियों को लेकर खूब टांग खिंचाई हो रही है। इसी प्रकार का एक मामला पिछले काफी दिनों से चर्चाओं में है। मामला स्मिथ गंज (कबाड़ी बाजार) स्थित एक वक्फ प्रॉपर्टी का है। एक पक्ष (रोहिल पुत्र यूनुस निवासी तोपचीवाड़ा) का आरोप है कि दूसरा पक्ष (आजम निवासी कोटला व फैसल निवासी बागपत गेट) स्मिथ गंज स्थित वक्फ संख्या 236 को वक्फ संख्या 526 की दुकान बताकर हड़पना चाहते हैं। रोहिल पक्ष का यह भी आरोप है कि आजम व फैसल पक्ष ने वक्फ प्रॉपर्टियों के मामले में यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के आॅडिटर असद उज जमां को साथ लेकर एक गिरोह बना रहा है,

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जिनकी नजर वक्फ प्रॉपर्टियों पर रहती है। उधर, आजम व फैसल पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि खुद को पाक साफ बताया और कहा कि किसी भी स्तर की जांच करा ली जाए रोहिल पक्ष ही गुनाहगार मिलेगा। आजम और फैसल पक्ष ने यहां तक आरोप लगाया कि रोहिल पक्ष को भाजपा के एक नेता का संरक्षण प्राप्त है। उधर, रोहिल पक्ष ने मण्डलायुक्त कार्यालय को एक ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि आजम व फैसल पक्ष स्मिथ गंज स्थित प्रॉपर्टी को हड़पना चाहते हैं।

रोहिल पक्ष का यह भी आरोप था कि आजम व फैसल पक्ष ने इस प्रकरण में हाईकोर्ट से सही तथ्यों को छिपाया। रोहिल पक्ष ने मंडलायुक्त से यह भी मांग की कि इस प्रॉपर्टी से संबंध सभी दस्तावोजों की नगर निगम के राजस्व अभिलेखों में जांच कराई जाए कि उक्त प्रॉपर्टी किस वक्फ की है।

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