- एसीएम के साथ युग हॉस्पिटल पहुंची जांच टीम टीम ने इंक्यूबेटर देखा डाक्टर से की पूछताछ
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गढ़ रोड स्थित युग हॉस्पिटल में भर्ती नवजात की जलकर मौत के मामले की मजिस्ट्रीयल जांच शुरू हो गई। एसीएम सिविल लाइन के नेतृत्व में जांच टीम युग हॉस्पिटल पहुंची और जहां बच्चा भर्ती था, उसका इंक्यूबेटर देखा। उन्होंने हॉस्पिटल के एमडी से पूछताछ की। एसीएम ने इस मामले में जो व्यक्ति अपना लिखित या मौखिक साक्ष्य देना चाहता है तो 15 जून तक किसी भी कार्य दिवस में प्रस्तुत कर सकता है।
गत दो जून को दीपक चौहान निवासी दतावली की पत्नी पिंकी ने आकाशदीप नर्सिंग होम में बच्ची को जन्म दिया था। नवजात की हालत नाजुक होने पर उसे युग हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। उसे इंक्यूबेटर में रखा गया था। पांच जून को नवजात की मौत हो गई। परिजनों ने देखा की बच्ची की कमर जली हुई। उन्होंने हंगामा किया। उन्होंने उपचार करने वाले डा. विनोद आहुजा से बच्चे के जलने के बारे में पूछा, लेकिन वह कुछ जवाब नहीं दे पाए। अन्य चिकित्सकों ने परिजनों को बताया कि बच्ची सेप्टीसीमिया की मरीज थी, इसमें खाल रूखी और लाल हो जाती है।
किसी रिश्तेदार ने इसकी वीडियो क्लिप बना ली। तब तो वे बच्चे के शव को ले गए। आठ जून को किसी ने सोशल मीडिया पर बच्ची के जलकर मौत का वीडियो वायरल कर दिया और मामले की शिकायत सीएम पोर्टल, कमिशनर व डीएम से की। इस मामले की एसीएम सिविल लाइन की अध्यक्षता में मजिस्ट्रीयल जांच बैठा दी गई। जांच में एसीएमओ सुधीर कुमार, थानाध्यक्ष नौचंदी को शामिल किया गया। मंगलवार को जांच टीम युग हॉस्पिटल पहुंची और मामले की जांच की। जांच टीम ने जिस वार्ड में और जिस इंक्यूबेटर में बच्ची को रखा गया था, उसको देखा। जांच पूरी न होने तक इंक्यूबेटर से कोई छेड़छाड़ न करने और किसी अन्य बच्चे को उसपर न लिटाने की हिदायत दी।
उन्होंने युग हॉस्पिटल के पीआईसीयू के स्टाफ से भी पूछताछ की। उन्होंने युग हॉस्पिटल के एमडी डा. आलोक अग्रवाल ने घटना के बारे में जानकारी ली। डा. आलोक ने जांच टीम को बताया कि बच्ची सेप्टेसीमिया की पेशेंट थी। उसकी हालत बेहद नाजुक थी। उनके अस्पताल में उसे भर्ती किया गया था। उसकी मृत्यु होने पर परिजन उसके शव को ले गए थे, लेकिन चंद घंटों बाद परिजन कुछ लोगों के साथ आए और हंगामा किया। उनका आरोप था कि हॉस्पिटल में बच्ची की जलकर मौत हुई।
उन्होंने बताया कि सेप्टीसीमिया में बच्चे की खाल रूखी हो जाती है। उसे ले जाते समय रगड़ लगने से बच्ची की खाल उतर गई। हंगामे के दौरान किसी परिचित ने वीडियो बनाई और दो दिन उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया। एसीएम सिविल लाइन ने लोगों से अपील की कि यदि इस मामले से संबंधित कोई भी मौखिक या लिखित साक्ष्य देना चाहता है तो 15 जून तक उनके कार्यालय में किसी भी कार्य दिवस में दे सकता है।

