- अफसर भ्रष्टाचार की सड़कों पर लगा रहे लीपापोती के पैबंद
- लाखों का खर्च कर बनवाई गयी तमाम सड़कें एक माह में ही लगी हैं उखड़ने
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सब एरिया कमांडर पीएस सांई के सरकारी बंगले के बाहर माल रोड के बनने के महज चंद दिनों बाद ही उखड़ने से कैंट बोर्ड अफसरों के भ्रष्टाचार की एक-एक परत को उधेड़ कर रख दिया है। करीब एक करोड़ की लागत जो सड़कें बनवायी गयी थीं उनमें से ज्यादातर का यही हाल है, लेकिन हैरानी तो इस बात की है कि सब एरिया के सर्वोच्च सैन्य अफसर के सरकारी बंगले के सामने वाली सड़क को भी भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों ने नहीं बख्शा।
जनवाणी ने की थी शुरुआत
कैंट बोर्ड की बदहाल सड़कों पर अफसरों व बोर्ड के सदस्यों को कुंभकर्णी नींद से जगाने की शुरूआत जनवाणी ने ही की थी। जनवाणी के लगातार प्रहार के बाद करीब एक करोड़ की लागत से बताया रहीं कई सड़कों का ठेका मैसर्स आरएस बिल्डर्स को दे दिया गया। भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस मवाना रोड से माल रोड को लिंग करने वाली जिस डेयरी फार्म रोड पर काम को सीईओ कैंट का दीपावाली गिफ्ट माना जा रहा था वो भी घटिया निर्माण सामग्री के चलते 10 दिन में ही दम तोड़ गयी। जगह-जगह से उधड़ गयी। जनवाणी ने जब कारगुजारियों की परत खोली तो 24 घंटे की भीतर डेयरी फार्म रोड को दोबारा बनवा दिया गया।
घटिया निर्माण सामग्री उखड़ी
लाखों की लागत से बनवायी गयीं तमाम सड़कें घटिया निर्माण सामग्री की वजह से उखड़नी शुरू हो गयी हैं। केवल डेयरी फार्म रोड ही नहीं बल्कि मेरठ छावनी के तमाम आला सैन्य अधिकारियों के आवासों के लिए पहचान रखने वाली माल रोड का भी बुरा हाल है। रजबन से भक्त स्कवायर की ओर जाने वाली सड़क भी भ्रष्टाचार की गवाही दे रही है। बनते ही सड़कों का जो हाल बना है वह आमतौर पर बारिश के बाद होता है, लेकिन भ्रष्टाचार की चाशनी के चलते इन सड़कों ने बारिश का इंतजार नहीं किया। बनने के मुश्किल से एक माह में ही तमाम सड़कों की सांस फूलने लगी है।
भुगतान की जल्दबाजी क्यों
सवाल पूछा जा रहा है कि क्या बगैर निरीक्षण के ही सड़क बनाने वाले ठेकेदार का भुगतान कर दिया गया। जिन सड़कों का यहां जिक्र किया जा रहा है उनका ठेका प्रसाद चव्हाण के कार्यकाल में दिया गया था। जबकि निर्माण वर्तमान सीईओ के आने के बाद किया गया है, लेकिन क्या भुगतान से पहले सड़कों की जांच कर यह पता किया गया कि मानकों के अनुरूप बनायी गयी हैं या नहीं।
सवालों से भाग रहे सभी
सड़कों की इस दुर्दशा पर कैंट बोर्ड प्रशासन के अफसर और बोर्ड के सदस्य इसको लेकर पूछे जा रहे सवालों से भाग रहे हैं। हैरानी की बात तो ये है कि सब एरिया कमांडर सरीखे बडे सैन्य अधिकारी के आवास की सड़क का यूं उखड़ने के सवालों पर भी गंभीरता नजर नहीं आ रही है। माना जा रहा है कि इस पर भी लीपापोती का पबंद लगा दिया।
तीसरी एजेंसी से कराएं जांच
बनने के चंद दिनों बाद टूट गयी सड़कें चींख-चींख कर कैंट अफसरों, कुछ सदस्यों व ठेकेदार की कारगुजारी बता रही हैं। सड़कोें की बेवक्त मौत का गुनाहगार कौन है? इसकी जांच आर्मी इंटेलिजेंस या फिर किसी तीसरी एजेंसी से करायी जानी चाहिए। हालांकि करीब एक करोड़ की लागत से बनीं इन सड़कों का जो हश्र हुआ है। उसकी शिकायत भाजपा के एक बडेÞ मंत्री का कवरिंग लेटर लगाकर जांच की मांग के साथ केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र भेज दिया गया है।
आ सकती है जीओसी की टीई
करीब एक करोड़ के ठेके की सड़कों का जो हाल हुआ है उसकी जांच को जीओसी इन चीफ की टैक्निकल एक्जाम यानि टीई मेरठ आ सकती है। हालांकि जनवाणी इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है, लेकिन पता चला है कि मिलिट्री इंटेलिजेंस की ओर से एक रिपोर्ट जीओसी को भेजी गयी सुनी जाती है। इसके आधार पर ही जीओसी की टीई के मेरठ आने की बात सुनने में आ रही है।

