Friday, May 1, 2026
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रोडवेज के कई कार्यालय खस्ताहाल

  • भूतल पर सीनियर फोरमैन कार्यालय और स्टोर की हालत हो चुकी दयनीय
  • पांच दशक पुराने जर्जर भवन में टपकती छत
  • रिसती दीवारों के साये में बैठते एआरएम और उनके सहयोगी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: सोहराब गेट डिपो में बने पांच दशक पुराने भवन में बने एआरएम और उनके सहयोगियों के आफिस न केवल जर्जर हो चुके हैं, बल्कि हल्की सी बारिश हाते ही इनकी छतें टपकने लगती हैं और दीवारों से पानी रिसने लगता है। हालत यह है कि एआरएम अपने कार्यालय के बजाय अधिकांश समय वर्कशॉप में बने स्टेशन इंचार्ज के रूम में बैठकर कार्य करते देखे जा सकते हैं। इस भवन के भूतल पर बने सीनियर फोरमैन के आफिस और दूसरी तरह बने स्टोर रूम की छतों की जर्जर स्थिति से बड़े हादसे की आशंका के बीच कर्मचारी ड्यूटी करते देखे जा सकते हैं।

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विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार सोहराब गेट डिपो वर्ष 1972 में शुरू किया गया था। उसी दौरान डिपो के अधिकारियों के लिए एक भवन बनकर तैयार किया गया था। सोहराब गेट डिपो में सबसे पीछे एक जर्जर भवन नजर आता है, जिसके ऊपर लगा काफी पुराना बोर्ड बताता है कि यह सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक का कार्यालय है। एक नजर में ही एआरएम कार्यालय की जर्जर स्थिति का अंदाजा हर किसी को हो जाता है।

इसी तरफ से भवन के प्रथम तल पर जाने के लिए एक जीना बनाया गया है, जिसके दोनों ओर की दीवारों की कहानी तस्वीरें बयान कर देती हैं। प्रथम तल पर पहुंचकर सीधे हाथ की ओर एआरएम और उनके स्टाफ के बैठने के लिए कक्ष बनाए गए हैं। जबकि दूसरी ओर ईटीएम कक्ष, वेतन कक्ष, बैग सेक्सन, टिकट भंडार आदि कई दशक से बने हुए हैं। इन अनुभागों में काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी किन हालात में ड्यूटी करते हैं, इसका अनुमान यहां की तस्वीरों से लग जाता है।

यहां कार्यरत गणपत सिंह त्यागी, मोहनलाल, महाराज सिंह आदि का कहना है सामान्य दिनों में भी बिल्डिंग के गिरने का खतरा उन्हें पूरे मन से काम नहीं करने देता। वे अपनी ड्यूटी करते हुए काम जरूर करते हैं, लेकिन उन पर खौफ तारी रहता है। बरसात की स्थिति में छत और दीवारों से कक्षों में रिसकर आने वाला पानी उनके डर को और भी बढ़ा देता है।

जबकि पानी भरने से पुराने रिकार्ड के लगातार खराब होने का अंदेशा बना रहता है। जिसे सुरक्षित रख पाना स्टाफ के लिए मुश्किल हो चला है। इसी का नतीजा है कि कक्षों में जगह-जगह प्लास्टिक के बोरों में भरकर रिकार्ड को बचाने का प्रयास किया जाता है। स्टाफकर्मी बताते हैं कि पूर्व एआरएम तो अपने कार्यालय तक में आने से बचते रहे हैं। उनका अधिकतर समय वर्कशॉप में बनाए गए स्टेशन इंचार्ज के कार्यालय में रहकर कामकाज करते हुए ही बीत गया।

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हाल ही में आए नए एआरएम भी जर्जर भवन में बने कार्यालय में बहुत कम आ पाते हैं। और स्टेशन इंचार्ज के कार्यालय में बैठकर ही काम करने का प्रयास करते हैं। जनवाणी संवाददाता ने जब भूतल पर बने सीनियर फोरमैन और स्टोर की स्थिति देखने का प्रयास किया, तो पता चला कि इस बिल्डिंग की बनावट ऐसी है कि भूतल और प्रथम तल के रास्ते अलग-अलग दिशाओं से बनाए गए हैं।

यानि भूतल की स्थिति देखने के लिए वर्कशॉप से होकर उसके पीछे वाले भाग तक जाना पड़ा। जहां के हालात दिखाते हुए सहायक स्टोर इंचार्ज नरेश शर्मा ने बताया कि छत और दीवारों के जरिये स्टोर में पानी भर जाता है। जिसके कारण वर्कशॉप में प्रयुक्त होने के लिए लाए गए उपकरणों को जंग खाने से बचाना उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

इसके अलावा बिल्डिंग की जर्जर स्थिति में उनके गिर जाने की आशंका तो बनी ही रहती है। सीनियर फोरमैन कार्यालय में कार्यरत ओमकिशन, मिथलेश, ओमवीर, जयपाल, गंगादेवी, हरबीरी आदि का कहना है कि इस जर्जर भवन में हर दिन उनकी जिंदगी दांव पर लगी रहती है।

छत पर जाने के लिए नहीं है कोई रास्ता

सोहराब गेट डिपो के पांच दशक पुराने इस भवन का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि इसकी छत तक जाने के लिए कोई जीना या अन्य रास्ता नहीं बनाया गया है। इसी कारण भवन की छत की साफ-सफाई और रखरखाव करने के लिए कोई कर्मचारी वहां तक पहुंच ही नहीं पाता है। कुछ दिन पहले छत के एक सिरे पर रखी पानी का टैंक फट गया था।

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जिसके स्थान पर नया टैंक रखने के लिए कर्मचारियों को नाकों चने चबाने पड़े थे। पहले इस टैंक पर बंदर आदि हमला करते रहते थे, जिसके कारण पानी पीने के लायक भी नहीं बचता था। इस बार विभागीय अधिकारियों ने टैंक की सुरक्षा के लिए एक लोहे का जाल जरूर लगवा दिया है।

इसी से बस स्टैंड पर बनाए गए वाटर पोस्ट को पानी की सप्लाई की जाती है। हालांकि इसके बावजूद रोडवेज के विभिन्न अनुभागों में काम करने वाले अधिकारी और कर्मचारी इस टैंक के पानी को पीने के लिए प्रयोग नहीं करते। लगभग हर अनुभाग में फिल्टर का पानी मंगाकर पीने के काम लिया जाता है।

भवन की स्थिति का कराया जाएगा आकलन: केके शर्मा

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम मेरठ परिक्षेत्र के आरएम केके शर्मा का कहना है कि उनके लिए अपने स्टाफ की सुरक्षा सर्वोपरि है। पांच दशक पुराने इस भवन में कार्यालय बनाकर रहना कितना सुरक्षित है या इससे किसी की जान का जोखिम है, यह पता लगाने के लिए उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखा है। जिसमें भवन की स्थिति का आंकलन करके रिपोर्ट देने का अनुरोध किया गया है।

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आरएम केके शर्मा का कहना है कि इस काम में विलंब न हो, इसके लिए वे व्यक्तिगत रूप से लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से संपर्क करेंगे। अगर रिपोर्ट में भवन को असुरक्षित माना जाता है, तो बिना देर किए स्टाफ के बैठने की व्यवस्था सुरक्षित कक्षों में की जाएगी।

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