
भारत में शिक्षा को प्राचीन काल से ही बहुत सम्मानजनक स्थान दिया गया है। वेदों के अनुसार, ‘शैक्षणिक संस्थाएं एक देवालय के समान है जहां शिक्षा की सुगंध फैली होती है।’ भारत में शिक्षा के लिए गुरुकुल जैसी संस्थाएं बनाई गई, जहां राजा के बेटे को भी किसी बच्चे के साथ झोंपड़ी में ही रहकर शिक्षा प्राप्त करनी होती थी। लेकिन आधुनिक विश्व में अधिकतर शैक्षणिक संस्थाएं व्यवसायिक दुकानों में बदल दी गई है, जहां शिक्षा बेची जा रही है। वर्तमान व्यवस्था में अगर आपकी जेब जितनी भारी है आप अपने बच्चे के लिए उतनी ही बेहतर शिक्षा का प्रबंध कर सकते हैं। मैडिकल जैसी अति आवश्यक शिक्षा तो लगभग अमीर वर्ग के बच्चों के लिए सुरक्षित सी ही कर दी गई हैं। इसके अलावा भी बहुत कम खर्च में सरकार के भरोसे यानी समाज के पैसे से मिल जाने वाली आईआईएम और आईआईटी जैसी डिग्रियां भी बेहद महंगी कर दी गई हैं।