जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेरठ-बागपत हाइवे पर काम तो तेजी से चल रहा है, लेकिन वर्तमान में खंभे शिफ्ट नहीं हो पा रहे हैं। मेरठ के हिस्से में डिवाइडर पर जो खंभे लगे हैं, उन्हें ऊर्जा निगम ने अभी शिफ्ट नहीं किया है। हालांकि जानी और मेरठ औद्योगिक क्षेत्र तक छह किलोमीटर काली सड़क बना दी गई। अभी काफी काम बचा हुआ है।
पांचली में नाले का निर्माण दोनों तरफ कर दिया गया है, लेकिन सड़क पर मिट्टी डाली जा रही है। मिट्टी का भराव करीब दो-दो फुट ऊंचा किया जा रहा है। क्योंकि पांचली व जानी में आबादी के बीच में सड़क पर जलभराव की समस्या बन जाती है, जिसके चलते सड़क क्षतिग्रस्त हो जाती है।
इस समस्या का स्थाई समाधान एनएचएआई कर रहा है। सड़क को उठाकर बनाया जा रहा है। फिर पानी निकासी की प्रबंध भी नाला निर्माण कर किया जा रहा है। इसके बाद पानी सड़क पर नहीं भरेगा। जानी व पांचली के बीच करीब छह किलोमीटर काली सड़क भी तैयार कर दी गई है। हालांकि इसमें फाइनल टच अभी नहीं दिया गया है। बीच-बीच में रोडी डालकर बेस तैयार किया जा रहा है।
यह बेस तैयार करने में समय लग रहा है। क्योंकि कहा जा रहा है कि मिट्टी एनएचएआई को नहीं मिल पा रही है, जिसके चलते इसके निर्माण में देरी हो रही है। बागपत बाइपास से लेकर पांचली के बीच डिवाइडर लगा हैं, जिसके बीच में बिजली के खंभे लगे हैं। विश्वकर्मा उद्योगिक क्षेत्र में यहां बिजली की आपूर्ति की जाती है। यहां चौबीस घंटे बिजली की आपूर्ति दी जाती है, क्योंकि औद्योगिक क्षेत्र है।
इसी वजह से खंभे भी शिफ्ट नहीं किये जा रहे हैं। इसके लिए पहले बिजली की नई लाइन तैयार होगी, जिसके बाद ही पुराने खंभों को हटाया जाएगा। वैसे भी पुराने खंभे जर्जर हो चुके हैं। आये दिन टूटकर गिर जाते हैं, जिसके चलते बिजली की आपूर्ति कई बार ठप हो चुकी है।
औद्योगिक क्षेत्र की आपूर्ति भी चलती रहे, इसके लिए ऊर्जा निगम के अधिकारियों को नई लाइन बनाकर देनी होगी, जिसके बाद ही नई लाइन से बिजली की आपूर्ति दी जा सकेगी। एनएचएआई के अधिकारियों ने ऊर्जा निगम के अफसरों को खंभों को शिफ्ट करने के लिए लिखा भी है। इसकी जो धनराशि जमा होगी, उसके बारे में भी पूछा है। क्योंकि एनएचएआई के अधिकारी ऊर्जा निगम से ही खंभों को शिफ्ट करने के लिए कहते हैं।
अवैध कॉलोनियों पर चला एमडीए का बुलडोजर
मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) ने प्राधिकरण उपाध्यक्ष मृदुल चौधरी के ििनर्देश पर गुरुवार को एमडीए ने अम्हेड़ा रोड पर अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। अशोक सैनी की अवैध कॉलोनी को ध्वस्त करने का एक वर्ष पहले आदेश हुआ था, जिस पर अमल अब हुआ है। इस मामले में बहुत शिकायत हुई थी, मगर एमडीए कार्रवाई नहीं कर रहा था।
वर्तमान में नोडल अधिकारी सुभाष गौतम ने फाइलों में चल रहे आदेशों को निकालकर कार्रवाई शुरू कर दी है। जोन-बी में आदिपुर मेन रोड पर अशोक सैनी की वृंदावन एन्क्लेव से लगी करीब दो हजार वर्ग गज भूमि पर अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही थी, जिसके विरुद्ध प्राधिकरण ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी। यहां पर 18 दुकानों को बनाया गया था, जो गिरा दी गई।
अशोक सैनी की कॉलोनी में भी अवैध तरीके से मकानों का निर्माण किया गया है। विकास आदि ने अम्हेड़ा आदिपुर-सिखेड़ा में अवैध कॉलोनी विकसित की थी, जिस पर एमडीए ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर दी है। यह कॉलोनी करीब आठ हजार वर्ग गज में विकसित की जा रही थी।
ध्वस्तीकरिण की कार्रवाई के दौरान जोनल अधिकारी राजीव कुमार सिंह, जोडल अधिकारी सुभाष गौतम, नीरज कुमार, सुबोध कुमार चिन्हा, योगेश गुप्ता, संजय विशष्ठि, संजीव तिवारी, आदि स्टाफ के लोग मौजूद थे। यह कार्रवाई मजिस्ट्रेट संदीप श्रीवास्तव की देखरेख में की गई।
बता दें, इससे पहले जोन-सी में एमडीए टीम ने ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण पर कार्रवाई की थी। यहां पर व्यापक स्तर पर होटल व ढाबे ग्रीन बेल्ट में खोल दिये गए थे। दुकानें भी बड़ी मात्रा में बनाई गयी थी। इन सभी दुकानों को भी ध्वस्त कर दिया गया है। ग्रीन बेल्ट में अभी भी निर्माण बचे हुए हैं, जिनकी एमडीए सूची बना रहा है।
मंडप भी ग्रीन बेल्ट में बने हुए हैं, जिनको अभी नहीं गिराया गया। मंडप स्वामी हाईकोर्ट का स्टे होना बताकर एमडीए के अधिकारियों को डरा लेते हैं, जबकि ऐसा संज्ञान में आया है कि किसी तरह का हाईकोर्ट से स्टे है ही नहीं।

