- रैपिड की खुदाई पर बोले इतिहासविद, सुरंग से शहर को कोई खतरा नहीं
- राय: दिल्ली में भी बनी सुंरगे, लेकिन कोई नुकसान नहीं
- बोले, बारिश के कारण कारण धंस रही हैं जमीनें
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रैपिड रेल के लिए शहर में हो रही भूमिगत खुदाई पूरी तरह से सुरक्षित है। महाभारतकालीन शहर होने के बावजूद रैपिड के लिए सुरंगों की खुदाई से कोई दिक्कत नहीं आएगी। राजधानी दिल्ली भी काफी पुरानी है वहां भी सुरंगे खोदी गर्इं और आज वहां मेट्रो अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ रही है। यह कहना है इतिहासविदों का जो शहर में रैपिड की अंडरग्राउंड खुदाई से कुछ स्थानों पर घंसी सड़कों पर ‘दैनिक जनवाणी’ से चर्चा कर रहे थे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इतिहास और संस्कृति पर विशेष पकड़ रखने वाले इतिहासकार डॉ. अमित पाठक व हस्तिनापुर जैसे विषय पर शोध कर रहे प्रियांक भारती चिकारा का कहना है कि पूरी पुरानी दिल्ली का इतिहास मुगलकालीन है। यह बरसों पुराना शहर है। इसके बावजूद यहां पर मेट्रो ट्रेन के लिए हुई सुंरगों की खुदाई से कोई दिक्कत नहीं आई।
इन इतिहासविदों के अनुसार यही स्थिति मेरठ की भी है। यह भी महाभारतकालीन शहर है, लेकिन यहां जो पुरानी इमारते हैं वो बेहद मजबूत हैं, क्योंकि उस समय के और अब के आर्किटेक्चर में जमीन आसमान का अंतर है। दूसरा शहर के जिस हिस्से में सुरंग के लिए खुदाई हो रही है वो ज्यादातर नया शहर है। इसलिए भी कोई दिक्कत नहीं आएगी।
दिल्ली में बिना दिक्कत के दौड़ मेट्रो
आप पुरानी दिल्ली को ही ले लीजिए क्योंकि वहां भी मेट्रो के लिए सुरंगे खोदी गर्इं और आज वहां मेट्रो बिना किसी दिक्कत के दौड़ रही है। दूसरा शहर में जो बेहद पुराने इलाके हैं वहां पर सुरंग नहीं खोदी जानी इसलिए यह भी हमारे लिए प्लस प्वाइंट है। नादिर अली बिल्डिंग में थोड़ा के्रक आया, यदि सुरंग की खुदाई से कोई खतरा होता तो पुरानी बिल्डिंग होने के चलते इसे भारी नुकसान पहुंचता।
-डॉ. अमित पाठक, (इतिहासविद्)
जो जमीन धंसी है, जिसकी बारिश वजह है
तब के और अब के आर्किटेक्चर में जमीन आसमान का अंतर है। उस समय के निर्माणों में बेहद मजबूती होती थी। इसके अलावा 100 साल से पुरानी इमारतों को ही प्राचीन माना जाता है और सुरंग वाले रुट पर इतनी पुरानी इमारतें न के बराबर हैं। उधर, जो जमीन धंसी है वो लगातार बारिश की वजह भी है, क्योंकि मिट्टी ने काफी पानी सोख लिया है। रैपिड सुरंग निर्माण के कोई खतरा नहीं होना चाहिए। -प्रियांक भारती, (इतिहासविद्)
…ताकि समय से दौड़े अपनी रैपिड
दिल्ली-मेरठ के बीच दौड़ने वाली रैपिड ट्रेन समय से दौड़े इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर भी प्रयास तेज कर दिए गए हैं। आरआरटीएस के इस प्रोजेक्ट में सभी लंबित बिंदुओं पर मंगलवार को कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे. ने थोड़ी सख्ती दिखाई और सभी पेंडिंग कामों को समय से पूरा करने के निर्देश दिए। कमिश्नर ने कहा कि अधिकारी सभी लंबित बिन्दुओं पर समन्वय बनाते हुये नियमानुसार कार्रवाई कर परियोजना निर्माण कार्य में तेजी लाएं।

बैठक में मोदीपुरम डिपो में भू-स्वामित्व का आपसी सहमति से क्रय करना, मेरठ-गाजियाबाद में परियोजना के अंतर्गत निजी कृषक भूमि का अधिग्रहण करना, भैंसाली बस अड्डे एवं बस डिपो को मोदीपुरम एवं मेरठ दक्षिण स्टेशन के निकट स्थानांतरित करने, टर्मिनल पर सुरक्षा प्रबंधन करने, आरआरटीएस के प्राथमिकता खंड के लिए फीडर बस सर्विस का प्रावधान करने और साहिबाबाद में प्रवेश एवं निकास के निर्माण के लिए यूपीसीडा से संबंधित मुद्दे पर चर्चा की गई और यूपीपीटीसीएल के अग्रिम लेखों मिलान समाधान, यूपीपीटीसीएल की मौजूदा एक 132 केवी पारेषण लाइन, जोकि मोदीपुरम ट्रेन डिपो में आरआरटीएस के कार्यों में बाधा डाल रही है।
उसकी शिफ्टिंग कार्य से संबंधित बिन्दुओं पर विस्तृत रूप से चर्चा करते हुये आयुक्त ने कहा कि उपर्युक्त बिन्दुओं से संबंधित अंतरर्विभागीय लंबित प्रकरण पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई की जाय। इस दौरान कमिश्नर को मोदीपुरम डिपो की भूमि के आपसी सहमति से क्रय करने के संबंध में बताया गया कि भूमि के रेट सहित लगभग सभी मामलों पर सहमति बन गयी है, शीघ्र ही कार्य को पूर्ण कर लिया जायेगा। इस अवसर पर एनसीआरटीसी सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

