Wednesday, March 18, 2026
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मेरठ-पौड़ी हाइवे: मुआवजे पर ‘रार’ कैसे होगा समाधान?

  • भाकियू राष्टÑीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत से भी मिले किसान
  • उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने की मांग

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एनएच-119 मेरठ-पौड़ी हाइवे पर मुआवजे को लेकर शुरू हुई ‘रार’ का समाधान क्या हो पाएगा? अब यह मामला तूल पकड़ सकता है। क्योंकि विपक्षी दलों ने भी आग में घी डालने का काम शुरू कर दिया है। दरअसल, मुआवजा आबादी क्षेत्र में कम दिया जा रहा है, जिसको किसानों ने मुद्दा बना दिया है। इसमें अब विपक्षी दल भी कूद गए हैं। राजनीतिक दलों के नेता किसानों को भड़काने के लिए मीटिंग दर मीटिंग कर रहे हैं, ताकि यह मामला बड़ा तूल पकड़ जाए। इसी उद्देश्य के साथ विपक्षी दलों के नेता जुट गये है।

दरअसल, किसानों की मांग है कि सर्किल रेट का दोगुना मुआवजा आबादी क्षेत्र के किसानों को दिया जाए, जबकि एनएचआई ने 36 सौ रुपए प्रति वर्ग गज के हिसाब से किसानों को मुआवजा दिया है। यह मुआवजा किसानों को स्वीकार नहीं है, जिसको लेकर किसानों और प्रशासन के बीच टकराव के हालात बन रहे हैं। अब वर्तमान में चार दिन पहले एनएचएआई ने आबादी क्षेत्र की दुकानों पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण कर दिया था।

यह एनएचएआई की बड़ी कार्रवाई थी। इस तरह से एनएचआई ने करीब 100 से ज्यादा दुकानें और मकान तोड़े। किसानों की मांग है कि जो मकान और दुकान तोड़े गए हैं, उनके मलबे का भी पैसा मिलना चाहिए। इसको लेकर अब विपक्षी दल प्रशासन की घेराबंदी करने में जुट गए हैं। क्योंकि आबादी क्षेत्र में जो सर्किल रेट निर्धारित है, उसका दोगुना किसानों को नहीं मिल रहा है।

किसान उसी दिन से गंगानगर के पास धरना देकर भी बैठे हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई किसानों की नहीं हुई है। अब किसान मुआवजे के मुद्दे को लेकर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के से भी मिले तथा उनसे मांग की है कि किसानों के साथ किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई जाए। अब यह मुद्दा भारतीय किसान यूनियन भी उठा सकता है और विपक्ष भी।

इस तरह से प्रशासन की घेराबंदी चल रही है। हालांकि डीएम से भाजपा के कैंट विधायक अमित अग्रवाल भी मिले थे तथा मांग की थी कि आबादी क्षेत्र में सर्किल रेट के अनुसार किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए, जो यहां पर जमीन अधिग्रहण करने के लिए अवार्ड घोषित हुआ है, वह गलत हैं। आबादी क्षेत्र और कृषि क्षेत्र, दोनों का अलग-अलग मुआवजा होता हैं, लेकिन यहां पर कृषि क्षेत्र और आबादी क्षेत्र दोनों का 3600 रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से घोषित कर दिया हैं, जो गलत हैं।

इसी मुद्दे को अब विपक्ष ने भी पकड़ लिया हैं। किसान नेता रोहित जाखड़ ने भी कहा है कि अब इस मुद्दे को लेकर गांव-गांव जाकर मीटिंग की जाएगी तथा किसानों को इस मुद्दे पर एकजुट कर लड़ाई लड़ी जाएगी। किसानों को प्रशासन आर्थिक चोट पहुंचा रहा हैं, जो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसमें आंदोलन करने के लिए रणनीति के साथ किसान एकजुटता दिखाते हुए मैदान में कूद सकते हैं।

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