
राजा तालुकदार |
सिर दर्द नित्य सताने वाली बीमारियों में से है। इससे लोग प्राय: ग्रस्त होते रहते हैं। सम्पूर्ण सिर में दर्द होता है जो कुछ घंटों में स्वत: दूर हो जाता है। कभी-कभी अचानक सिर के किसी एक भाग में भयंकर दर्द होने लगता है। अचानक उत्पन्न होने वाला यह सिरदर्द 3 से 6 घंटे तो कभी-कभी 3-4 दिनों तक रहता है। बीच-बीच में यह सामान्य भी हो जाता है।
यह एक विशेष प्रकार का सिरदर्द है जिसे माइग्रेन कहा जाता है। यह मस्तिष्क की बीमारी है जो सामान्य सिर दर्द से भिन्न होती है। आज कल इस बीमारी से काफी लोग ग्रसित हैं। सिरदर्द के जितने मरीज हैं उनमें से 4० से 8० प्रतिशत रोगी माइग्रेन के ही हैं। गांवों की तुलना में शहरी लोग इस रोग का ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
लक्षण के आधार पर माइग्रेन के दो प्रकार होते हैं 1. माइग्रेन विद औरा 2 माइग्रेन विदाऊट औरा।
माइग्रेन विद औरा: इस तरह के माइग्रेन में सिर दर्द होने का आभास हो जाता है। सिरदर्द होने से पहले रोगी के आंखों के आगे चमकते तारे और फैलते हुए काले धब्बे दिखलाई देते हैं। फिर सिर के कुछ हिस्से में धक-धक (पल्सेटाइल) दर्द शुरू हो जाता है। रोगी काम करने में अक्षम हो जाता है। ऐसी स्थिति में वह लेटना पसंद करता है। उसे उल्टियां भी आ सकती हैं। एक तरफ होने वाला दर्द दूसरी तरफ चला जाता है। फिर दर्द पूरे मस्तिष्क में फैल सकता है।
माइग्रेन विदाऊट औरा:- इस माइग्रेन में बिना किसी पूर्व लक्षण के अचानक सिर में दर्द होने लगता है। इसमें सुबह उठते ही सिर के दोनों भाग में दर्द होता है। इसमें उल्टियां कम होती है।
इनके अतिरिक्त अन्य कई असामान्य तरह के माइग्रेन होते हैं बैसिलर आर्टेरी माइग्रेन, आॅप्थेलमो प्लीजिक माइग्रेन, हीमोप्लीजिक माइग्रेन आदि। बैसिलर आर्टेरी माइग्रेन से ग्रसित रोगी के दिमाग के पिछले हिस्से में दर्द होता है। रोगी तुतलाने लगता है। ंबेहोश भी हो जाता है। आंखों में ज्यादा चमक होती है तथा उसके शारीरिक व्यवहारों में परिवर्तन होने लगता है।
आॅप्थलमोप्लीजिक माइग्रेन में रोगी को एक वस्तु दो दिखाई देती हैं। रोगी बार-बार पलकें झपकाता है। हीमोप्लीजक माइग्रेन में रोगी लकवा का शिकार हो जाता है। मासिक धर्म में अनियमितता के कारण स्त्रियां माइग्रेन का शिकार हो जाती हैं।
यह प्राणघातक रोग नहीं है लेकिन नसों के सिकुड़न और फैलाव के कारण होने वाले दर्द से रोगी बेहाल हो जाता है। मस्तिष्क के एक तरफ हमेशा होने वाला दर्द किसी अन्य बीमारी के कारण होता है। माइग्रेन का दर्द अपना स्थान बदलता रहता है। इसका दर्द कभी दिमाग के एक भाग में तो कभी दिमाग के दूसरे भाग में होता है। इससे बच्चों से बूढ़ों तक सभी आयुवर्ग के लोग ग्रसित होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ रोग के लक्षण घटते जाते हैं, स्त्रियों पर इसका प्रभाव ज्यादा होता है। ध्वनि और वायु प्रदूषण के कारण शहरी लोग इससे ज्यादा ग्रसित होते हैं।
बचाव
-खान-पान में सावधानी बरतनी चाहिए।
-यदि भूख के कारण माइग्रेन का दौरा पड़ता हो तो थोड़ी थोड़ी देर पर कुछ कुछ खाते रहना चाहिए।
-दौरा पड?े का लक्षण दिखाई देते ही तुरंत शांत और अंधेरे कमरे में आराम करना चाहिए।
-जिन महिलाओं को मासिक धर्म से पहले दर्द होता हो, उन्हें नमक कम खाना चाहिए।
-माइग्रेन से ग्रसित होने वाली महिलाओं को गर्भनिरोधक गोलियां सेवन नहीं करनी चाहिए।
-रोगी को पूरी नींद लेनी चाहिए।
-तनावमुक्त रहने का प्रयास करना चाहिए।
-नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए।
-मद्यपान से बचना चाहिए।
उपचार – रोगी को निम्न उपचार से लाभ मिल सकता है।
-कपूर और पेठा मिलाकर खाने से लाभ मिलता है।
-देशी घी और गुड़ मिलाकर पीने से भी माइग्रेन का दर्द दूर होता है।
-घी और केसर एक साथ पीसकर सूंघने से दर्द दूर हो जाता है।
-दूध के साथ बादाम लेने तथा सूतशेखर रस से दो तथा बच चूर्ण एक माशा शहद के साथ सुबह शाम लेने से लाभ मिलता है।


