- विभाग को नहीं लगी भनक, जानकारी के बाद मिट्टी चोरों के खिलाफ थाने में दी तहरीर
- खनन माफियाओं के आगे बौना नजर आ रहा प्रशासन
जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: वन आरक्षित क्षेत्र में खनन माफियाओं के तिलिस्म को तोड़ पाना, पुलिस और तहसील प्रशासन के लिए लगातार बड़ी चुनौती बना हुआ है। खनन माफियाओं के रसूख के आगे सिस्टम बौना नजर आता है। एक दशक से अवैध खनन ग्रामीणों और सरकार के लिए नासूर बने हुए हैं। ताजा उदाहरण वन आरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरने वाली मध्य गंगा नहर पर देखने को मिल रहा है। खनन माफियाओं ने प्रशासन को चुनौती दे नहर की सफाई के दौरान निकाली करोड़ों रुपये की सिल्ट चोरी कर विभागीय अधिकारियों को भनन तक नहीं लगने दी।
सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत लगी तो विभागीय अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूटी और मिट्टी चोरों के खिलाफ थाने पर तहरीर दी। विभागीय सूत्रों के अनुसार वन आरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरने वाली मध्य गंगनहर की सफाई के लिए सिंचाई विभाग ने रामराज से लेकर किठौर स्थित साइफन पुलिस चौकी तक लगभग 25 करोड़ का टेंडर दिया था। सफाई के दौरान करोड़ों रुपये की सिल्ट गंगनहर किनारे लगाई गई। सिंचाई विभाग गंगनहर की सिल्ट का टेंडर निकालता, इससे पहले ही खनन माफियाओं ने करोड़ों रुपये की सिल्ट चोरी कर सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व का चुना लगा दिया।
करोड़ों की सिल्ट चोरी के लिए जिम्मेदार कौन?
यूं तो पुलिस, तहसील प्रशासन और खनन अधिकारी के साथ वन विभाग की क्षेत्र में हो रहे खनन की बात को नकारते हैं। गंगनहर सफाई के दौरान निकाली गई करोड़ों रुपये की सिल्ट चोरी हो गई। किसी को कानों कान खबर तक नहीं लगी। जबकि पुलिस प्रशासन हो या वन विभाग दोनों ही अपराध और शिकार पर अंकुश लगाने के लिए दिन-रात गश्त की बात करते हैं, लेकिन गश्त के दौरान करोड़ों रुपये की सिल्ट चोरी किसी को नजर नहीं आई, या फिर यूं कहे कि दोनों की मिलीभगत के चलते क्षेत्र में खनन माफियाओं का बोलबाल है।
एक दशक पूर्व भी गायब हुई थी सफाई में निकाली सिल्ट
सिंचाई विभाग द्वारा सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाने का ये पहला मामला नहीं है। इससे पूर्व में सपा सरकार में गंगनहर की सफाई का कार्य हुआ। करोड़ों रुपये की सिल्ट सफाई के दौरान गंगनहर से निकाली गई। विभागीय सूत्रों की माने तो करोड़ों रुपये की सिल्ट को खनन माफियाओं ने कुछ माह में ही गंगनहर किनारे से गायब कर दिया, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने कोई सीख नहीं ली। नतीजा खनन माफियाओं ने एक बार फिर से करोड़ों रुपये की सिल्ट को गायब कर दिया।

