Monday, March 23, 2026
- Advertisement -

सबक सिखाती हैं गलतियां

अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर लोगों ने अपनी गलतियां पर विजय प्राप्त की। उन पृष्ठों को खंगालने की आवश्यकता भर है। इसके विपरीत कुछ ऐसे हठी लोग होते हैं, जो आयुपर्यन्त गलतियां करते रहते हैं। उनसे सीख लेकर वे आगे कदम बढ़ाने के लिए तैयार ही नहीं होते।

सीपी सूद

मनुष्य जीवन में बहुधा गलती करता रहता है। यदि वह गलती नहीं करेगा तो भगवान बन जाएगा। इसका यह अर्थ कदापि नहीं लगाना चाहिए कि गलती करना मानवीय स्वभाव है तो हमें गलती करने का लाइसेंस मिल गया है। अब तो हम अहर्निश गलतियां करेंगे और यह कहकर साफ बच निकलेंगे कि गलती तो इन्सान ही करता है इसलिए हमसे भी गलती हो जाती है। गलती से बचने का यह कोई सकारात्मक उपाय नहीं कहा जा सकता। हम समझदार इंसान हैं, इसलिए हमारा दायित्व बनता है कि हम एक बार जिस गलती को करें, उसे पुन: दोहराएं नहीं बल्कि उस गलती से हम एक सबक सीखें।

उसे भविष्य में न दोहराने की कसम अपने मन में लें। इस तरह हम मनुष्य एक ही गलती को बार-बार दोहराकर समाज में अपनी किरकिरी करवाने से बच जाएंगे। दूसरों के समक्ष न तो नजरें झुकानी पड़ेंगी और न ही शर्मिंदा होना पड़ेगा।

यदि कोई मनुष्य कहीं नौकरी कर रहा है और वहां थोड़े-थोड़े दिनों के पश्चात गलती करता रहेगा तो उस दफ्तर या कम्पनी का मालिक उसे सुधरने के लिये तीन-चार अवसर देगा। उसके बाद भी यदि वह गलती करने से बाज नहीं आएगा, तब तो शर्तिया बात है कि उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा। इसी प्रकार यदि किसी फर्म का मालिक बार-बार गलती करेगा, तो वह कम्पनी डूब जाएगी और दिवालिया हो जाएगी।

हम जब गलती करते हैं, तब उम्मीद करते हैं कि सामने वाला हमें उस गलती की सजा न देकर हमें माफ कर दे। ऐसी ही अपेक्षा हम परमेश्वर से भी करते हैं। परन्तु जब हमारी आती है, तब हम गलती करने वाले को सजा देना चाहते हैं। उसे हम किसी भी शर्त पर क्षमा नहीं करना चाहते। ऐसा दोगला चरित्र हम लोग जीते हैं। लेने और देने के बाट तो सदा एक जैसे ही होने चाहिए। उनमें अन्तर करना किसी के लिए भी उचित नहीं होता।

गलती किसी मनुष्य के जीवन का एक छोटा-सा पृष्ठ होती है परन्तु हमारे रिश्ते एक पूरी पुस्तक के समान होते हैं। आवश्यकता पड़ने पर गलती का एक पन्ना फाड़ देना मेरे विचार से उपयुक्त होता है। यानी उस एक व्यक्ति से किनारा कर लेना फिर भी उचित कहलाता है, परन्तु एक पृष्ठ या एक व्यक्ति के लिए पूरी रिश्ते रूपी उस सम्पूर्ण पुस्तक को खोने से यथासम्भव बचने का उपाय करना चाहिए। एक समझदार मनुष्य का यह परम कर्तव्य होता है कि वह गलती करने वाले से किनारा करने के स्थान पर उसे प्रेम से अपने पास बिठाकर समझाए। उसे भविष्य में गलती न दोहराने के लिए प्रेरित करे। यदि वह समझदार व्यक्ति होगा तो अपनी गलती को दूर करने का प्रयास करेगा और समाज के मानदण्ड पर खरा उतरने का प्रयास करेगा। अपना खोया हुआ स्थान पुन: प्राप्त कर लेगा।

अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर लोगों ने अपनी गलतियां पर विजय प्राप्त की। उन पृष्ठों को खंगालने की आवश्यकता भर है। इसके विपरीत कुछ ऐसे हठी लोग होते हैं, जो आयुपर्यन्त गलतियां करते रहते हैं। उनसे सीख लेकर वे आगे कदम बढ़ाने के लिए तैयार ही नहीं होते। ऐसे दुराग्रही लोग अपने जीवन की रेस में पिछड़ जाते हैं। चाहकर भी उनका हाथ थामकर कोई उन्हें आगे नहीं ले जा सकता। अन्तत: जीवन की बाजी हारने के उपरान्त उनके पास पश्चाताप करने के अतिरिक्त कोई और चारा नहीं बचता।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

UP Cabinet Decisions 2026: किसानों को MSP में बढ़ोतरी, गोरखपुर बनेगा सोलर सिटी

जनवाणी ब्यूरो | लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक...

हमारी धार्मिक अवधारणाएं विज्ञान सम्मत

राजेंद्र बज वर्तमान दौर में सारी दुनिया हमारी अपनी गौरवशाली...

गैस को देखने का अपना अपना नजरिया

समस्या गैस की हो, तो प्राथमिक स्तर पर परीक्षण...
spot_imgspot_img