Tuesday, June 25, 2024
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पौष पूर्णिमा 2023 से प्रयागराज में मास पर्यंत अनुष्ठान शुरू, श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

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जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: यूपी के प्रयागराज में भीषण ठंड और कोहरे के बीच माघ मेले के प्रथम स्नान का श्रीगणेश पौष पूर्णिमा से हो गया। गंगा, यमुना और अदृश्य संगम में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सर्व सिद्धि योग में पुण्य की डुबकी लगाई। मेले में सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक बंदोबस्त किया गया है। संगम तट पर एटीएस कमांडों को तैनात किया गया है। पौष पूर्णिमा डुबकी के साथ कल्पवासियों का मास पर्यंत चलने वाला अनुष्ठान शुरू हो गया है।

शुक्रवार को भोर से ही हर हर महादेव और हर हर गंगे के उद्घोष के साथ पुण्य की डुबकी शुरू हो गई। बुधवार से ही श्रद्धालुओं का संगम पर पहुंचने का सिलसिला चालू हो गया था। माघ मेले में कुल 14 स्नान घाट बनाए गए हैं। कोविड प्रोटोकाल के साथ ही श्रद्धालुओं को मेले में प्रवेश दिया जा रहा है। सभी की थर्मल स्कैनिंग की जा रही है।

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रोज से ज्यादा शुक्रवार को कोहरे और ठंड का प्रकोप दिखा। बृहस्पतिवार को पारा लुढ़ककर पांच डिग्री पर पहुंच गया था। बावजूद इसके श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। भोर से ही स्नान दान का सिलसिला शुरू हो गया।

अधूरी तैयारियों के बीच कहीं बिजली नहीं तो कहीं सीवर लाइन के गड्ढे खोद कर छोड़ दिए गए हैं। इस तरह की समस्याओं की परवाह किए बिना कल्पवासी जप,तप, ध्यान के लिए पहुंचते रहे। अरैल, झूंसी के अलावा रामघाट, काली घाट, दशाश्वमेध घाट के अलावा मेला क्षेत्र में सेक्टरवाइज बने 14 घाटों पर इस बार पौष पूर्णिमा का स्नान होगा।

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संतों की टोलियां भी स्नान के लिए संगम पहुंचेंगी। प्रथम स्नान पर्व पर आधी रात के बाद ही मेला क्षेत्र में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। इस दौरान ट्रैक्टर-ट्राली पर पुआल, लकड़ी,चूल्हा और गृहस्थी के सामान लेकर कल्पवासी अलग मार्गों से अपने शिविरों में पहुंचते रहे। इसी के साथ आम श्रद्धालुओं का भी रेला आधी रात से ही संगम की ओर बढ़ने लगा।

पौष पूर्णिमा पर कल्पवासियों, संतों, भक्तों के संगम पर डुबकी लगाने के लिए सुगम यातायात और सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। इस दौरान कमांडो दस्ते के साथ पुलिस के आला अफसर मार्च करते रहेंगे। इसके लिए अलग-अलग घाटों और तिराहों, चौराहों पर पुलिस, पीएसी, एटीएस, आरएएफ के अलावा घुड़सवार पुलिस, महिला पुलिस के जवानों के साथ अग्निशमन दस्ते को तैनात किया गया है। गंगा की धारा में स्नानार्थियों की सुरक्षा के लिए गोताखोर भी लगाए गए हैं।

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माघ मेला की व्यवस्था एक नजर में

  • 14 घाटों पर होगा पौष पूर्णिमा का प्रथम स्नान।
  • 16 प्रवेश द्वारों पर कोविड हेल्प डेस्क करेगी कोरोना के संदिग्धों की जांच।
  • 05 पांटून पुलों से होकर गुजरेंगे संत और भक्त।

पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक शंभू कुमार ने मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को मेला क्षेत्र में अधिक सतर्कता बरतने की हिदायत दी। उन्होंने मेला क्षेत्र में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के निर्देश दिए। प्रबंध निदेशक ने मुख्य अभियंता विनोद कुमार गंगवार और माघ मेला में तैनात अधिशासी अभियंता भविष्य कुमार सक्सेना से मेला क्षेत्र के कार्यों की पूरी जानकारी भी प्राप्त की।

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महाकुंभ के रिहर्सल के रूप में बसे माघ मेले में इस बार महाकाल की यज्ञशाला देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं का ध्यान खींचेगी। इस यज्ञशाला में शुक्रवार से महीने भर चलने वाला राष्ट्ररक्षा महायज्ञ आरंभ होगा।

सेक्टर तीन में खाक चौक स्थित महावीर मार्ग पर स्थित इस यज्ञशाला में सवा पांच लाख रुद्राक्ष के मनकों से महाकाल का पांच फुट ऊंचा शिवलिंग बृहस्पतिवार की शाम तैयार कर लिया गया। विशाल यज्ञ वेदी में चार चरणों में स्हस्त्र त्रिशूल स्थापित किए गए हैं। इसमें इसमें काले रंग के घेरा वाले त्रिशूल आतंक के विनाश के लिए, सफेद रंग के घेरे वाले त्रिशूल ज्ञान-विद्या के लिए और इसी तरह लाल रंग के त्रिशूल अर्थव्यवस्था मजबूत करने के लिए और पीले त्रिशूल शत्रु पराजय की कामना से लगाए गए हैं।

इस महाकाल यज्ञशाला में पौष पूर्णिमा की सुबह सात बजे शिव योगी मौनी स्वामी लेटकर मंगल यात्रा की शुरुआत करेंगे। यह यात्रा महावीर पांटून पुल से होकर संगम तट पर पहुंचेगी। वहां वह डुबकी लगाने के बाद उसी क्रम में यज्ञशाला वापस आएंगे और वहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ आरंभ होगा।

इस यज्ञशाला में राष्ट्र रक्षा की कामना से सवा पांच लाख आहुतियां दी जाएंगी। साथ 1.51 लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मौनी बाबा ने बताया कि यह उनका 37वां अनुष्ठान है। इससे पहले माघ मेले में उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए महायज्ञ किया था।

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