- तहसील में नहीं हो रहे समस्याओं के समाधान, जनता परेशान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सदर तहसील में लोगों की समस्याओं के समाधान नहीं हो रहे हैं। अधिकांश लेखपालों द्वारा लोगों की समस्या का समाधान करने की बजाय खर्चे के नाम पर उनसे अवैध वसूली करके समस्या को और अधिक बढ़ाया जा रहा है। जिसके चलते लोगों में लेखपालों के प्रति काफी रोष पनपता दिखाई दे रहा है। इस बात पर तहसील के आला अफसर काफी नाराज हैं।
सदर तहसील में मानों अधिकांश लेखपालों का एक राज चल रहा है। अधिकांश लेखपालों द्वारा जनता का जमकर के शोषण किया जा रहा है। बात चाहे मृतक आश्रितों के वारिसों के नाम चढ़ाने की हो या फिर जमीनी फर्द में कोई और कमी को सुधारने की हो या फिर खसरा खतौनी आदि की नकल लेने की बात हो, लेखपाल अपनी करनी से बाज नहीं आ रहे। अत्यंत विश्वनीय सूत्रों द्वारा बताया गया कि अभी हाल ही में कलीना पर तैनात लेखपाल सीताराम ने मृतक आश्रितों के नाम चढ़ाने की एवज में कई फरियादियों से खर्चे के नाम पर अवैध वसूली की और काफी समय बीतने के बाद भी फर्द में नाम नहीं चढ़ाए।
अब जब फरियादी फर्द में नाम चढ़ाने की बात करते हैं तो लेखपाल सीताराम उनसे और खर्चा देने की बात कर रहा है। पीड़ितों ने इसकी शिकायत डीएम दीपक मीणा से करने की बात कही है। इसके अलावा कई सीताराम लेखपाल द्वारा फरियादियों की मुश्किलों को और अधिक बढ़ाने एवं अपने आर्थिक स्वार्थ के लिए कई लोगों के नाम फर्द में नाम गलत अंकित कर दिए। जोकि आलाधिकारियों से शिकायत के बाद ठीक हो पाए हैं।
इस बारे में जब तहसील के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की गई तो उन्होंने इस पर काफी नाराजगी जताते हुए सीताराम पटवारी को फटकार लगाई और भविष्य में ऐसा न करने की चेतावनी दी। तहसील में अपने-अपने कार्य कराने के लिए पहुंचे नरेश कुमार, रविदत्त कुमार,राजेश, कालू, भजनलाल आदि ने बताया कि तहसील में कोई भी कार्य समय पर नहीं हो रहा है। कार्य करने की ऐवज में अधिकांश लेखपाल अवैध वसूली कर रहे हैं। वहीं जब इस बारे में तहसीलदार से वार्ता करने की कोशिश की तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
तहसीलदार ने सुनी बेबस पिता की
सदर तहसील में लोगों को जमीन की फर्दों में भारी कमी देखने को मिल रही है। किसी का नाम गलत दर्ज है तो किसी का संबंध। ऐसा ही मामला तहसील के एक गांव में देखने को मिला है। जिसमें एक पिता इस बात के लिए तहसील के चक्कर काट रहा था कि पत्नी की मौत के बाद वारिस दर्ज करने में लेखपाल द्वारा उसकी बेटी को ही फर्द में उसकी पत्नी दर्शाया गया था। तीन साल तक तहसील में चप्पल घिसने के व आत्मदाह की चेतावनी के बाद तहसीलदार ने मामले में गंभीरता दिखाई और समस्या का समाधान किया।

सदर तहसील के गांव मोहिउद्दीनपुर ललसाना निवासी महेन्द्र कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी बीना देवी का लगभग चार वर्ष पूर्व देहांत हो गया था, बताया कि जमीन उनकी पत्नी के नाम पर थी। पत्नी के देहांत के बाद जब जमीन की फर्द में वारिसों के नाम दर्ज कराने के लिए लेखपाल से मिले तो आरोप है कि तत्कालीन लेखपाल प्रहलाद सिंह ने फर्द में नाम चढ़ाने की ऐवज में खर्चे के नाम पर उनसे तीन हजार रूपये की अवैध वसूली की और कहा कि अब आपका कार्य आसानी से हो जाएगा, लेकिन काफी वक्त बीतने के बाद भी जब कार्य नहीं हुआ तो महेन्द्र कुमार ने फिर लेखपाल से संपर्क किया।
इस पर लेखपाल ने फिर से कुछ खर्चा करने की डिमांड की, जोकि महेन्द्र कुमार ने पूरी नहीं की। आरोप है कि मांग पूरी न होने पर लेखपाल ने जमीन में जो नाम अंकित किए उसमें महेन्द्र कुमार और मृतका बीना देवी की बेटी वंदना गर्ग को उनकी पत्नी दर्शा दिया। समस्या का समाधान कराने के लिए महेन्द्र कुमार ने तहसील के चक्कर काटने शुरु कर दिए, लेकिन समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ।
मामले से आहत होकर इस बात की शिकायत तहसीलदार से की गई और समस्या का निस्तारण न होने पर पीड़ित द्वारा तहसील में ही आत्मदाह करने की चेतावनी दी गई। आत्मदाह की चेतावनी के बाद तहसील के आला अफसरों में खलबली मच गई और मामले की गंभीरता क ो देखते हुए तहसीलदार ने पीड़ित के हक में आदेश पारित किए। तब कहीं जाकर के पीड़ित की समस्या का समाधान हो पाया।
समस्या का समाधान होने के बाद पीड़ित ने कहा कि लेखपाल की गलती की सजा उसे तहसील में तीन साल तक चक्कर काटकर चुकानी पड़ी। इस बात को लेकर के पीड़ित काफी दुखी है, ऐसे में बड़ा सवाल ये बनता है कि आखिर जनता का शोषण करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों पर शासन का शिंकजा क्यों नहीं कसा जाता।

