जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मेरी दुनिया है मां तेरे आंचल में शीतल छाया दे दु:ख के जंगल में। सच सिर्फ मां ही है जो खुद दु:ख का पहाड़ सिर पर रखकर अपनी औलाद को खुश रखने की ताउम्र प्रयत्न करती है। ऐसी मां भी है, जिनके पति दुनिया छोड़कर पत्नी को मझदार में अकेले छोड़कर चले गए और वह महिलाएं दुनियां की चुनौतियां का सामना करते हुए अपने परिवार को चला रही है।
माता-पिता का साया उठने के बाद निभाया फर्ज
कहते है कि अगर मां और बाप का साया बच्चों के सिर से उठ जाए तो उनके लिए जिंदगी जीना कठिन हो जाता हैं। मगर कैंट निवासी रेखा सिंह ने अपने माता-पिता के स्वर्गवास के बाद अपने भाई बहनों की जिम्मेदारी संभाली और उनको पैरो पर खड़ा करने के साथ जीवन जीने की कला भी सिखाई।
रेखा बताती है कि जब वह 12वीं कक्षा में थी तो पिता का साया उनके सिर से उठ गया था उसके कुछ समय बाद मां भी उन्हें छोड़कर हमेशा के लिए चली गई। मगर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने भाई बहनों के लिए मां की तरह फर्ज अदा किया।
उनके इस कार्य में उनके पति ने भी पूरा सहयोग किया। गत वर्ष ही रेखा ने अपनी छोटी बहन का विवाह किया और इसके लिए पति और पत्नी दोनों ने मिलकर बहन का कन्यादान किया। रेखा के दो बेटे है। रेखा कहती है कि अपनों का सहयोग करना जीवन का सबसे बड़ा कार्य होता है।
पति के देहांत के बाद बच्चों को कर रही शिक्षित
शास्त्रीनगर निवासी काजल के पति की कुछ समय पहले कैंसर से मृत्यु हो गई थी। पति का साया उठने के बाद एक बार को काजल पूरी तरह टूट गई थी, लेकिन काजल ने अपने दोनों बच्चों के लिए फिर से जिदंगी जीने का हौसला कायम किया और वह इस समय गोंडा के एक प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाचार्या के पद पर कार्यरत है। काजल जहां अपने बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रही हैं। वहीं वह गरीब बच्चों की मदद के लिए भी उन्हें निशुल्क शिक्षा व कॉपी किताबों के साथ कपड़ों का वितरण भी करती है। इतना ही नहीं काजल बच्चों को रोजगार परक कोर्स भी करा रही है ताकि वह अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का कर रही है प्रयास
मां एक ऐसा शब्द है जिसमें प्रेम अलग ही छलकता है। वहीं बच्चों के सर पर लिए माता-पिता दोनों का साया होना जरूरी होता है। मगर दोनों में से एक न रहे है तो मुश्किल का सामना दोनों को ही करना पड़ता है। सपना गोयल के पति की मृत्यु हुए 11 साल हो गए हैं। उनके पति अकले थे तो सपना पर उनके माता-पिता और अपने दोनों बच्चों की जिम्मेदारी का बोझ आ गया था। मगर मां अपने बच्चों के लिए कुछ भी कर सकती है सपना ने अपने बच्चों को बेहतर परवरिश देने के लिए स्ट्रगल किया और आज उनका बेटा मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है और बेटी 12वीं कक्षा में है। सपना ने अपने पति के माता-पिता का भी पूरा सहयोग किया है।



