Saturday, March 21, 2026
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बरसात में खिले मशरूम के पौधे

  • खेत खलियान को हरा-भरा करने में सबसे बेहतर है मशरूम के पौधे

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: इस बार के मौसम में बरसात इस बार कम है। पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम हो रही है, लेकिन जो भी छुटपुट बारिश हो रही है। उससे पर्यावरण खिल उठता है। बरसात का मौसम अपनी बगिया और खेत खलियान को हरा-भरा करने के लिए सबसे बेहतर होता है। इस मौसम में हम कई मानसूनी पौधे सीजनल सब्जियां फल और हर्बल प्लांट्स को अपनी बगिया में उगा सकते हैं।

प्राकृतिक रूप से भी कई पौधे जमीन से निकलकर पनपने लगते हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां पर मिट्टी की बामी बनी हुई है। बारिश के कारण इस पर आने को मशरूम के पौधे उगाए हैं।

छोटे-छोटे छाते की तरह मशरूम पूरी बामी को ढक लिए है। यह एक प्रकृति का अच्छा नजारा कहा जाता है। इन बागियों में सर्प का निवास होता है। इसके आसपास के क्षेत्र में लोग जाने से डरते हैं, लेकिन सावन किस महीने में बारिश के वार से यहां अनेकों मशरूम देखे जा सकते हैं।

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इस मशरूम को टरमिटोमायसेज माइक्रो कार्पस नाम से वैज्ञानिक रूप से जाना जाता है। जो मुख्य रूप से दीमक के बामी पर रुकता है तथा अपने लिए भोजन दीमक से प्राप्त करता है। यह मशरूम लिओ फिल्थी फैमिली का खाद्य मशरूम है। जो अधिकतर जंगली भोजन के रूप में प्रयोग करता है और इसको जंगली भोजन के रूप में आदमी प्रयोग में लाते हैं।

इसमें गुणवत्ता युक्त प्रोटीन होता है। जिसमें 17 अमीनो एसिड पाए जाते हैं। यह प्रमुख रूप से भारत सहित पूरे एशिया तथा अफ्रीका में पाया जाता है। भारत में गोवा तथा अन्य राज्यों में मुख्य रूप से बरसात में यह अपने से उगता है। जिसमें विशेष प्रकार का व्यंजन बनता है।

जिसे टोनक कहते हैं। इससे कई प्रकार की औषधियों में भी प्रयोग किया जाता है। आदिवासी लोग इसको सब्जी के रूप में प्रयोग करते हैं। जिससे उनको प्रोटीन की भरपूर मात्रा प्राप्त होती है। मशरूम कई प्रकार के होते हैं। इसमें से कुछ जहरीले होते हैं तो अनेकों मशरूम खाने के लिए पौष्टिक और प्रोटीन से युक्त होते हैं।

यहां पर उगे हुए मशरूम कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों डा. गोपाल सिंह विभागाध्यक्ष डा. कमल खिलाड़ी प्राध्यापक डा. प्रशांत मिश्रा एवं प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डा. आरएस सेंगर ने विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को इस प्रकार की मशरूम जो प्राकृतिक रूप से कम उपलब्ध होती है।

उसको लोगों ने देखा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरके मित्तल ने बताया प्रकृति में कई तरह के गुणकारी पौधे उगाने की क्षमता है और जब बरसात का सीजन आता है तो प्रकृति खिल उठती है और इस समय लगभग सभी प्रकार के पौधों का विकास अच्छी तरह से होता है।

इसका प्रणाम है कि इस तरह के मशरूम भी परिसर में उग सकी है। वैज्ञानिकों ने इस मशरूम को अपनी प्रयोगशाला में संरक्षित किया है। अब इसकी गुणवत्ता की जांच और मृदा की जांच करके इस बात का पता चला जाएगा किस में कौन-कौन से गुण है।

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