- आगामी दो अगस्त को मनाई जाएगी नाग पंचमी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सावन माह में नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष नाग पंचमी शिव योग में मनाई जाएगी और कोरोना के कारण दो साल बाद नाग देवता की पूजा की जाएगी। नाग देवता की पूजा का न सिर्फ धार्मिक बल्कि ज्योतिष महत्व भी है। नाग पंचमी के दिन शिव भक्त तमाम तरह की मंगल कामनाओं के साथ कुंडली से जुड़े कालसर्प दोष को दूर करने के लिए विधि विधान से कालसर्प पूजन करते है।
बता दें कि इस साल नाग पंचमी दो अगस्त को मनाई जाएगी। इस साल नाग पंचमी पर भगवान शिव के साथ माता पार्वती का आर्शीवाद पाने का भी विशेष संयोग बन रहा है। सावन माह में जितना सोमवार का महत्व होता है, उतना ही मंगलवार व्रत का भी। सावन मास में मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है यह व्रत माता पार्वती को समर्पित है।
नाग पंचमी के दिन बन रहा मंगला गौरी व्रत का संयोग
दो अगस्त यानि नाग पंचमी के दिन मंगलवार है। ऐसे में इस दिन मंगला गौरी व्रत भी रखा जाता है। इस तरह से नाग पंचमी के दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की कृपा पाने का संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य अमित गुप्ता के अनुसार नाग पंचमी के दिन भोलेनाथ के साथ माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से दोनों देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल नाग पंचमी की तिथि दो अगस्त को है। जिसमें सुबह 5 बजकर 43 मिनट से 8 बजकर 23 मिनट तक यानि की 2 घंटे 40 मिनट की अवधि तक पूजा की जा सकती है।
महाभारत काल से संबंध है नाग पंचमी का
धार्मिक मान्यता के अनुसार महाभारत काल की लोक कथा के अनुसार राजा परीक्षित को सांपों के राजा तक्षक द्वारा काट लिया गया था, जो उनकी मृत्यु का कारण बना। इस घटना से राजा के बेटे जनमेजय को बड़ा दुख हुआ और उसने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए सपार्सात विशाल यज्ञ का आयोजन किया। जिसमें पृथ्वी पाताल सभी लोकों के सांपों को उस पवित्र आग में कूदने के लिए मजबूर किया।
यह देखकर राजा तक्षक सहायता के लिए इंद्र के पास गए, लेकिन इंद्र भी कुछ ना कर सके। इसके बाद भगवान ब्रह्मा ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मनसा देवी की मदद ली, मनसा देवी ने अपनी पुत्री अस्तिका को जनमेजय के पास भेजा और वह दिन श्रावण मास की पंचमी तिथि थी, तभी से नाग पंचमी बनाने का विधान शुरू हुआ।

