- मिशन शक्ति अभियान में महिलाओं को दी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा
- कोविड़19 में जान हथेली पर रखकर कराया लोगों का इलाज
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: विकास खंड पुंवारका के गांव मोहीयुद्दीनपुर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नाजमा बेगम अपने आप में एक खुली किताब हैं। वह साबित करती हैं कि स्त्री भी पुरुष की तरह सक्षम होती है। मिशन शक्ति के तहत नाजमा ने सौ से ज्यादा महिलाओं को कानूनी प्रावधानों, उनके अधिकारों से वाकिफ कराया। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पूरी ताकत झोंक दी और मिसाल बन गईं।
यही नहीं, कोविड- 19 के दौरान तो वह जैसे फरिश्ता ही बन गईं। जान जोखिम में डालकर उन्होंने कोविड के दौरान मास्क वितरण से लेकर अन्य कार्यों को अंजाम दिया। मरीजों को अस्पताल ले गईं। सरकार की अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन में नाजमा बेगम का कोई सानी नहीं। नाजमा बेगम ने सन् 2006 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में काम करना शुरू किया। शुरू में तो इनका मन नहीं लगता था लेकिन, जब तरह-तरह की योजनाओं के क्रियान्वयन की बात आई तो नाजमा का मन भी बदलता चला गया। उन्होंने देखा गांवों में ज्यादातर महिलाएं हया का नकाब ओढ़कर चूल्हे-चौके तक ही सीमित हैं।
गांवों में किशोरियां भी पढ़-लिख भले रही हों पर उन्हें अपने अधिकारों के बारे में तनिक भी जानकारी नहीं है। इन सब बातों से वह खुद ही झकझोर उठीं और फिर क्या था नाजमा ने ठान लिया कि उन्हें अब इस दिशा में ठोस कदम उठाना है। लोगों में अलख जगाना है। इधर,जब सरकार ने मिशन शक्ति अभियान शुरू किया तो नाजमा ने दो कदम आगे बढ़कर अपने सर्वे के लिए 100 घरों का नियमित भ्रमण किया। उन्होंने गांव की महिलाओं को एकत्र कर उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया। नाजमा ने कानूनी प्रावधानों से अवगत कराया।

विधवा पेंशन दिलाने की बात हो या फिर कन्या सुमंगला योजना के पात्र लाभार्थियों का चयन हो, नाजमा ने अपने दम पर यह सब किया। गांव की महिलाएं इन्हें बहुत सम्मान इसीलिए देती हैं। कोविड 19 के दौरान नाजमा ने सभी को जागरूक किया। मास्क बांटे। मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल ले गईं। यही नहीं, इनके गांव में करीब 50 से ज्यादा व्यक्ति ऐसे थे जो कोविड टीकाकरण के नाम पर भागते थे। ऐसे ऐसों को नाजमा ने संवेदित किया। उनको टीकाकरण के लिए राजी किया। इस पर डीपीआरओ की ओर से इन्हें सम्मानित किया गया।
कोविड 19 के दौरान नाजमा ने अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य की समय-समय पर जांच कराई। परिवारिजनों को उचित पोषण आहार भी उपलब्ध कराया। सबसे दिलचस्प यह है कि जब कोविड 19 चरम पर था और लोग घरों से भी नहीं निकल रहे थे, उस समय भी नाजमा ने जान हथेली पर रखकर गांव में डीलर के साथ मिलकर राशन का वितरण कराया। संचारी रोग नियंत्रण अभियान में नाजमा की उल्लेखनीय उपलब्धि रही। उन्होंने घर-घर जाकर साफ-सफाई पर जोर दिया, बताया कि गंदगी से मच्छर पनपते हैं और मच्छरों से फैलता है रोग। अपने केंद्र पर नाजमा ने जो पोषण वाटिका तैयार की है, वह अत्यंत आकर्षक है। इसमें ताजी हरी सब्जियां, फल वगैरह हैं। फिलहाल, नाजमा कहती हैं कि उन्हें हर उस काम में संतोष मिलता है जिसमें दूसरों की भलाई हो। एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में वह अपना पूरा समय अपने दायित्व निर्वहन में लगाती हैं।

