Sunday, April 21, 2024
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नई तकनीकी ताकत और चुनौती

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sambhu sumanएक ताकतवर डिजिटल माइंड के तौर पर तेजी से लोकप्रिय हो चुका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित चैट-जीपीटी ने थोड़े समय में ही कई स्तर पर खतरे की घंटी भी बजा दी है। डेटा चोरी की शिकायतें मिलने और नौकरियां छीने जाने की शुरुआत हो चुकी है। इसके द्वारा बौद्धिक और व्यावसायिक स्तर पर कामकाज के प्रभावित होने, मेधाशक्ति की मौलिकता में भोथरापन आने, विवेक की बुनियाद के झकझोरे जाने आदि समेत वैचारिक, ऐतिहासिक, भौगोलिक और सामाजिक तथ्यों के दस्तावेजों में सेंध लगाने की चिंता ने नई चुनौतियां पैदा कर दी है। माइक्रोसॉफ्ट संचालित प्लेटफार्म ओपन-एआई के चैटजीपीटी पर चालाकी, गलत जानकारियां और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए डेटा संग्रहित करने के आरोप तक लग रहे हैं।

शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और मौलिक रचनात्मकता जैसे क्षेत्र को दुष्प्रभावित होने की आहट को देखकर ही ओपन-एआई पर ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों द्वारा सख्ती बरतने का सिलसिला शुरू हो गया है।

उसे भले ही जल्द से जल्द अपनी त्रुटियां सुधारने और शिकंजा कसने की चेतावनी दी गई हो, लेकिन इटली, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया, फ्रांस और रूस में इस पर प्रतिबंध तक लगा दिया गया। यहां तक कि आस्ट्रेलिया में उसके मालिक सैम आल्टमैन पर मुकदमा करने की बात सामने आई चुकी है, जबकि भारत इसके भारतीयकरण की योजना बनाने में जुट गई है।

डिजिटलमय हो चुकी कार्यशैली में चार दशकों में सर्बाधिक क्रांतिकारी तकनीक चैट-जीपीटी की जिस तरह से दखलंदाजी बढ़ी है, उससे उसकी खामियां ंतो दूर खूबियां तक से पैदा हुई चुनौतियां को नजरंदाज नहीं किया जा सकता।

जबकि यह मशीनी है और मशीनीकरण एआई के जरिए हुआ है, इसलिए इसे डिजिटल माइंड कहना गलत नहीं होगा। इसमें मैथेमेटिकल प्रोबैब्लिटी की थ्योरी के अनुसार कई संभावनाएं और आशंकाएं विचित्रताओं से भरी हैं।

जैसे यह अगर सौ साल और भविष्य की दिल्ली की झलक दिखा सकता है, ताजमहल निर्माण की प्रक्रिया को दर्शा सकता है और सैंकड़ों साल पहले के इंसान की तस्वीरें बना सकता है, इसका तो सही-सही आकलन करना मुश्किल हो गया है कि इंसानी दिमाग को कई जटिलताएं में उलझाकर किस तरह जीवन को आसान बनाने के साथ-साथ मुश्किल बना सकता है? इसकी जद में और क्या कुछ आ सकता है?

सबसे अधिक बेचैन करने वाली चिंता डेटा सिक्योरिटी की है। चैट-जीपीटी के ओपन-एआई ने स्वीकार किया है कि वह अपने सर्वर पर इंटरनेट से डेटा लेकर संग्रहित करता है, जिसमें लोगों की व्यक्गितगत जानकारियां भी शामिल होती हैं। चैट-जीपीटी इन्हीं से कोड लिखता है।

ईमेल का जवाब तैयार करता है और बड़ी मात्रा में अपनी क्षमता और मांग के मुताबिक डेटा पैटर्न को खोज निकालता है। आनेवाले दिनों में वह और बेहतर संवाद भी कायम कर लेगा, तो डेटा के जरिए बनी असाधारण तस्वीरें दूसरे क्रिएटिव की तरह चलन मे आ सकती है। ऐसे में असली-नकली के पहचान की मुश्किलें आ सकती हैं।

हालांकि डेटा का आदान-प्रदान और इस्तेमाल हर फ्री-टू-यूज तकनीक के साथ होता है। जब डिजिटल टेक्नोलॉजी पर भरोसे की बात आती है तब चैटजीपीटी को लेकर सवाल खड़ा हो जाता है। क्योंकि एआई के चलते उसके अनियंत्रित होने की स्थिति में संवेदनशील डेटा का दुरूपयोग हो सकता है।

ओपन-एआई के एफएक्यू पेज के अनुसार उसके कर्मचारी सुरक्षा के लिए चुनिंदा चैटिंग की समीक्षा कर सकता है। इस आधार पर यह नहीं मान सकते है कि चैटजीपीटी से आप जो कुछ कहते हैं वह गोपनीय रखा ही जाएगा।

सामान्य तौर पर चैटजीपीटी मैसेजिंग के तहत नाम, पता, ईमेल के साथ-साथ अनुमानित स्थान, आईपी पता, पेमेंट डिटेल, और डिवाइस की जानकारी संबंधी अकाउंट के विवरण भी ले लेता है।

अधिकतर वेबसाइटें इस डेटा को एनालिटिक्स के उद्देश्य से एकत्र करती है, इस लिहाज से चैट-जीपीटी को अलग नहीं माना जा सकता है। यहां फर्क यह है कि फिलहाल अधिकतर वेबसाइटें एआई से संचालित नहीं होती हैं, जबकि चैटजीपीटी की बुनियाद ही एआई है।

इस पर शुरुआत में ही डेटा लीक की शिकायतें आर्इं। इसका एक उदाहरण साफ्टवेयर बग के नतीजे के रूप में सामने आया। इसमें कुछ उपयोगकर्ताओं द्वारा लॉग इन करने पर दूसरों के चैट शीर्षक देखने को मिले।

एक अन्य उपयोगकर्ता को सहेजे गए क्रेडिट कार्ड के अंतिम चार अंक दिखे। इस तरह से यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि चैट-जीपीटी वास्तव में सभी उपयोगकर्ता के डेटा को सेहजता है, तो इस तरह की घटनाएं एक ठोस जोखिम का संकेत देती है।

वैसे अभी तक चैट-जीपीटी निजी और ताकझांक करने वाली नजरों से दूर रहने में कामयाब रही है, लेकिन भविष्य में डेटा सुरक्षा या इसमें किसी की घुसपैठ नहीं होने की कोई गारंटी नहीं है। इस सिलसिले में उपयोगकर्ता अपने हिस्ट्री-डेटा से इस्तेमाल किए गए डेटा को हटा तो सकता है, लकिन ओपन-एआई के सर्वर से कुछ भी डिलिट नहीं होता है। इसका एकमात्र तरीका ओपन-एआई अकाउंट बंद करना ही है।

ओपन-एआई के अनुसार उसके इन-हाउस एआई ट्रेंड प्रशिक्षिक किसी भी प्रशिक्षण के लिए चैटजीपीटी मैसेजिंग का उपयोग कर सकते हैं। जैसे मशीन लर्निंग आधारित तकनीक की तरह ही इसके द्वारा जीपीटी-3।5 और जीपटी-4 भाषा मॉडल का अरबों मौजूदा नमूनों के साथ प्रशिक्षण किया जा चुका है।

ओपन-एआई त्रुटियों को सुधारने के लिए संग्रहित डेटाबेस का इस्तेमाल करते हुए इस तरह का प्राशिक्षण जारी रख सकता है। कहने को तो डेटा उपयोग की अनुमति नहीं देने के लिए आॅप्टआउट यानी इससे बाहर निकलने की प्रक्रिया बनाई गई है, जो मैन्युअल है और इसमें एक फार्म भरना होता है, यह काफी हद तक व्यवहारिक नहीं हो पाता है।

इसके साथ ही उस मनोविज्ञान को भी समझने की जरूरत है कि आखिर ओपन-एआई काफी पैसा खर्चकर किसी को भी चैट-जीपीटी मुफ्त में उपयोग करने के लिए क्यों दे रहा है? इसका जवाब स्पष्ट है कि ओपन-एआई ने संग्रहित डेटा को बेचने या दूसरे तरह के इस्तेमाल का तरीका खोज लिया है।

माइक्रोसाफ्ट ने ओपन-एआई में 2023 की शुरुआत में 10 बिलियन डॉलर का निवेश किया है, जो एज्योर क्लाउड सर्वर पर उपलब्ध है। चैट-जीपीटी किशोरों और नौसीखियों के लिए एक खतरा बनकर सामने आया है।

उन्हें लगता है कि सबकुछ रेडीमेड हासिल करने का एक बेहतरीन औजार हाथ लग गया है। वे कोर्स के पाठों के सवाल हल करने में उसका इस्तेमाल करने लगे हैं, तो इसे मनोरंजन का एक साधन बनाने पर भी आमादा हैं।

यह न केवल रचनात्मक सोच को प्रभावित करती है, बल्कि इससे मिलने वाली गलत जानकारियां नई पीढ़ी को दिग्भ्रमित कर सकती हैं। यही कारण है अधितर देशों के स्कूलों में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।


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