जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सेंट्रल मार्केट में आवास विकास परिषद ने आवासीय मकानों व प्लाटों पर बनी दुकानों को ध्वस्तीकरण का अभियान छेड़ दिया है। शुक्रवार को आवास विकास परिषद ने सेंट्रल मार्केट के 31 आंवटियों को तत्काल दुकान खाली करने का नोटिस जारी किया। जिससे दुकानदारों में खलबली मच गई। इससे पहले आवास विकास परिषद ने तीन मंजिला कांप्लेक्स के ध्वस्तीकरण के लिए 22 दुकानदारों को तत्काल का नोटिस जारी कर रखा है। उन्हें तुरंत दुकानें खाली करने के लिए अल्टीमेंटम दिया हुआ है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि वह दुकानों को खाली नहीं करेंगे। 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारी की टाइम एक्सटेंशन मांग वाली याचिका स्वीकार करते हुए आवास विकास को जवाब दाखिल करने के लिए 21 दिन का समय देते हुए तब तक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया।
इससे पहले 17 दिसंबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में सेंट्रल मार्केट स्थित तीन मंजिला काप्ंलेक्स को ध्वस्त करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने का समय दिया। 4 मार्च को व्यापारियों ने परिसर खाली करने के लिए और समय दिया जाने जाने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की। 29 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने व्यापारियों की समय सीमा बढ़ाने वाली याचिका को खारिज कर दिया। आवास विकास परिषद ने 2 मई को सेंट्रल मार्केट में बनी 22 दुकानों को खाली करने का नोटिस चस्पा किया।
शुक्रवार को आवास विकास परिषद के अधिकारी सेंट्रल मार्केट पहुंचे। उन्होंने वहां पर आवासीय भवन व भूखंडों पर बनी 31 दुकानों को तत्काल दुकान खाली करने का नोटिस दिया है। जिससे व्यापारियों में दहशत का माहौल बना हुआ है। वहीं, दूसरी ओर कांप्लेक्स के ध्वस्तीकरण के लिए ई-टेंडर भी खोल दिया गया है। एक कंपनी को उसका मलबा हटाने का ठेका दे दिया गया है।
139 अफसरों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर
सेंट्रल मार्केट के मामले में अब आवास एवं विकास के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी हो रही है। 2014 तक तैनात रहे 139 अधिकारियों और कर्मचारियों पर एफआईआर कराई जाएगी। आवास एवं विकास परिषद ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अवैध निर्माण करने वाले व्यापारियों के साथ अपने उन 139 अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है जो 2014 तक यहां तैनात रहे हैं। इन अधिकारियों के सामने परिषद की सभी आवासीय योजनाओं में अवैध निर्माण होते रहे, लेकिन इन्होंने रोकने के बजाय नोटिस देकर इतिश्री कर ली।
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण करने वाले व्यापारियों के साथ इस दौरान आवास एवं विकास परिषद के उन सभी कर्मियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने को कहा है जिनके कार्यकाल में अवैध निर्माण हुए हैं। परिषद ने व्यापारियों के साथ अपने 139 अधिकारियों, कर्मियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। 1977 से 2014 तक के उन सभी अधिकारियों, कर्मियों की सूची तैयार की जा रही जो यहां तैनात रहे। कॉम्पलेक्स के 21 साझीदार व्यापारियों के साथ 31 अन्य व्यापारियों और परिषद कर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी जानी है।

