Friday, April 24, 2026
- Advertisement -

अब शुरू होगी महंगाई की मार

 

Samvad 5


Anil Jainभारत में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम पिछले तीन-चार महीने से स्थिर हैं। बीते सितंबर महीने के आखिरी में केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू की थी और अक्टूबर के आखिरी तक लगभग हर दिन कीमतों में बढ़ोतरी की गई। लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही कीमतों का बढ़ना थम गया था और तब से अब तक कथित तौर पर हर दिन कीमत तय करने वाली पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों ने कीमतें नहीं बढ़ाई हैं।

चूंकि अब चुनाव प्रक्रिया पूरी होने वाली है। अगर पिछले उदाहरणों को देखा जाए तो नतीजे आने के दो दिन बाद से कीमतें फिर बढ़ना शुरू हो जाएंगी। पिछले साल दो मई को पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव नतीजे आए थे और उसके दो दिन बाद से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ना शुरू हुई थीं। करीब दो महीने की स्थिरता के बाद कीमतें इस अंदाज में बढ़ना शुरू हुई थीं कि देश के ज्यादातर हिस्सों में सौ का आंकड़ा पार कर गई थीं, जबकि उस समय कच्चे तेल की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी।

अब तो कच्चा तेल एक सौ तीस डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा है। सो, इस बार चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल के दाम बेहिसाब बढ़ेंगे, जिसका असर दूसरी चीजों के दामों पर भी पड़े बिना नहीं रहेगा। यानी आम आदमी को भीषण महंगाई या यूं कहें कि सरकार द्वारा प्रायोजित और बाजार द्वारा आयोजित लूट का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। वैसे रूस-यूक्रेन युद्ध का असर भी भारतीय बाजार में दिखने लगा है और कई आवश्यक चीजों के दाम बढ़ने का सिलसिला शुरू हो चुका है।

पिछले साल नवंबर-दिसंबर में जब कीमतों का बढ़ना रुका था तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम हो रही थी और एक समय यह कम होकर 63 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी। सो, कीमत नहीं बढ़ने की वजह समझ में आ रही थी। अभी इसकी कीमत एक सौ तीस डॉलर प्रति बैरल होने की ओर बढ़ रही है। इसके बावजूद कीमतें नहीं बढ़ रही हैं।

आखिरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम तीन नवंबर को बढ़ाए गए थे। उस समय भी कच्चे तेल की कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल थी। लेकिन उसके बाद अचानक दोनों र्इंधनों की कीमतों में बढ़ोत्तरी का सिलसिला थम गया। उसके बाद केंद्र सरकार ने डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपए और पेट्रोल पर पांच रुपए प्रति लीटर की कटौती की। सरकार का कटौती करना समझ में आता है, क्योंकि उसने इस शुल्क में अनाप-शनाप बढ़ोतरी की थी इसलिए चुनाव आने पर कटौती की।

लेकिन पेट्रोलियम कंपनियों ने किस तर्क से बढ़ोतरी स्थिर रखी? जाहिर है यह सिर्फ भ्रम है कि कीमतें बाजार के हिसाब से तय होती हैं। हकीकत यह है कि कीमतें राजनीति के हिसाब से तय होती हैं। पांच राज्यों में चुनाव होने थे तो सरकार के कहने पर कीमतें स्थिर रखी गईं। ऐसे ही पिछले साल मार्च से मई के पहले हफ्ते तक भी पांच राज्यों के चुनाव के कारण कीमतें नहीं बढ़ी थीं। उस समय पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुदुचेरी में विधानसभा के चुनाव हो रहे थे।

हैरानी की बात यह भी है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अब भी यही कथा सुना रही हैं कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम पेट्रोलियम कंपनियां तय करेंगीं। यही मिथकीय कथा सरकार और भाजपा के नेता संसद समेत हर मंच पर सुनाते रहते हैं कि डीजल और पेट्रोल के दाम तेल कंपनियां तय करती हैं न कि सरकार। लेकिन अब इस बात पर कौन यकीन करेगा? सवाल है कि अगर पेट्रोलियम कंपनियां ही तय करेंगी तो वे अभी क्यों नहीं कीमतें बढ़ा रही हैं?

जब कच्चे तेल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 63 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ कर 73 डॉलर प्रति बैरल हुई थी तो भारत में पेट्रोल की कीमत 120 रुपए लीटर पहुंच गई थी। आज कच्चा तेल प्रति बैरल एक सौ तीस डॉलर को छूने जा रहा है और पेट्रोलियम कंपनियां कीमत नहीं बढ़ा रही हैं। आखिर क्यों?

क्या वित्त मंत्री इस बात की गारंटी दे सकती हैं कि सात मार्च को चुनाव खत्म होने के बाद भी कंपनियां इसी तरह चुपचाप रहेंगी? वे कम से कम इतनी गारंटी तो दे ही सकती हैं कि अगर कच्चे तेल की कीमत घटने लगती है तो कंपनियां खुदरा कीमतें नहीं बढ़ाएंगी। लेकिन सबको पता है कि ऐसा नहीं होगा। पिछले तीन महीनों में पेट्रोलियम कंपनियों का मुनाफा जितना कम हुआ है|

उन सबकी भरपाई सात मार्च के बाद की जाएगी। खुद वित्त मंत्री ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारत की वित्तीय स्थिरता के लिए चुनौती पैदा हो रही है। इस चुनौती से निबटने के लिए सात मार्च के बाद भारत सरकार का तांडव शुरू होगा। महंगाई कहां जा कर रुकेगी, कुछ नहीं कहा जा सकता।

फिलहाल महंगाई के छोटे-छोटे झटके तो चुनाव खत्म होने से पहले ही लगना शुरू हो चुके हैं। लोहा 80 रुपये प्रति किलो से ऊपर चला गया है। खाने के तेलों में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है। सीमेंट महंगा हो गया है। जिस तरह से बड़े पैमाने पर भूकंप आने से पहले छोटे-छोटे झटके लगते हैं, वैसे ही महंगाई रूपी लूट में तेजी से आने से पहले छोटे झटके लग रहे हैं।

जैसे दूध की कीमत बढ़ गई है। अमूल और वेरका ने दूध की कीमत बढ़ा दी है और जल्दी ही मदर डेयरी और दूसरे ब्रांड की कीमत भी बढ़ेंगी। रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ते हैं तो पता चलता है, लेकिन जिन वस्तुओं का आम आदमी का वास्ता कभी-कभी पड़ता है, उनकी कीमतें कितनी बढ़ गई हैं, इसका पता नहीं चलता। जैसे लोहे का सरिया बहुत ज्यादा महंगा हो गया है। सीमेंट पर पैसे बढ़ गए हैं।

कॉमर्शियल रसोई गैस वाले सिलेंडरों के दाम बढ़ गए हैं। 19 किलो वाले सिलेंडर के दाम में 105 रुपए की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत दो हजार रुपए से ऊपर पहुंच गई है और चेन्नई में 2100 रुपए से ऊपर। इसी तरह पांच किलो वाले सिलेंडर के दाम में 27 रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है।

घरेलू रसोई गैस यानी 14 किलो वाले सिलेंडर के दाम दिल्ली में 900 रुपए से ऊपर हैं, जिसके इसी महीने ऐतिहासिक ऊंचाई पर जाने की आशंका है। पेट्रोल और डीजल के दाम में कितनी बढ़ोत्तरी होगी और इनके दामों में बढ़ोत्तरी से अन्य वस्तुओं के दाम कितने बढ़ेंगे, इसका तो अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता।

अनिल जैन


janwani address 43

spot_imgspot_img
[tds_leads title_text="Subscribe" input_placeholder="Email address" btn_horiz_align="content-horiz-center" pp_checkbox="yes" pp_msg="SSd2ZSUyMHJlYWQlMjBhbmQlMjBhY2NlcHQlMjB0aGUlMjAlM0NhJTIwaHJlZiUzRCUyMiUyMyUyMiUzRVByaXZhY3klMjBQb2xpY3klM0MlMkZhJTNFLg==" f_title_font_family="467" f_title_font_size="eyJhbGwiOiIyNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMjAiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIyMiIsInBob25lIjoiMzAifQ==" f_title_font_line_height="1" f_title_font_weight="700" msg_composer="success" display="column" gap="10" input_padd="eyJhbGwiOiIxNXB4IDEwcHgiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMnB4IDhweCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCA2cHgifQ==" input_border="1" btn_text="I want in" btn_icon_size="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxNyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTUifQ==" btn_icon_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjMifQ==" btn_radius="3" input_radius="3" f_msg_font_family="394" f_msg_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_msg_font_weight="500" f_msg_font_line_height="1.4" f_input_font_family="394" f_input_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsInBvcnRyYWl0IjoiMTEiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiJ9" f_input_font_line_height="1.2" f_btn_font_family="394" f_input_font_weight="500" f_btn_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjExIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMCJ9" f_btn_font_line_height="1.2" f_btn_font_weight="700" f_pp_font_family="394" f_pp_font_size="eyJhbGwiOiIxMyIsImxhbmRzY2FwZSI6IjEyIiwicG9ydHJhaXQiOiIxMSJ9" f_pp_font_line_height="1.2" pp_check_color="#000000" pp_check_color_a="var(--metro-blue)" pp_check_color_a_h="var(--metro-blue-acc)" f_btn_font_transform="uppercase" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjYwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGUiOnsibWFyZ2luLWJvdHRvbSI6IjUwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9LCJsYW5kc2NhcGVfbWF4X3dpZHRoIjoxMTQwLCJsYW5kc2NhcGVfbWluX3dpZHRoIjoxMDE5LCJwb3J0cmFpdCI6eyJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiNDAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsInBob25lIjp7ImRpc3BsYXkiOiIifSwicGhvbmVfbWF4X3dpZHRoIjo3Njd9" msg_succ_radius="2" btn_bg="var(--metro-blue)" btn_bg_h="var(--metro-blue-acc)" title_space="eyJwb3J0cmFpdCI6IjEyIiwibGFuZHNjYXBlIjoiMTQiLCJhbGwiOiIxOCJ9" msg_space="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIwIDAgMTJweCJ9" btn_padd="eyJsYW5kc2NhcGUiOiIxMiIsInBvcnRyYWl0IjoiMTBweCJ9" msg_padd="eyJwb3J0cmFpdCI6IjZweCAxMHB4In0=" f_pp_font_weight="500"]

Related articles

कैसे बनाए जाते हैं शीतल पेय

आनंद कु. अनंत ग्रीष्म के आगमन के साथ ही बाजार...

महिला आरक्षण की मृगतृष्णा की उलझन

भारतीय राजनीति के रंगमंच पर इन दिनों एक नया...

केंद्र के साए में बंगाल के चुनाव

1952 से ही भारत में एक सुगठित चुनाव प्रणाली...

विदेश भेजने के नाम पर ठगी

कई युवाओं की विदेश में नौकरी की चाहत होती...
spot_imgspot_img